Alap Dave  
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Joined 29 April 2018


Joined 29 April 2018
Alap Dave 15 HOURS AGO

कुछ इस कदर उसकी आदत हो गयी,
की लोग उसे मेरा एब समजने लगे।

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Alap Dave 5 JUL AT 10:57

आज मैने मेरे ख्वाबो का पिटारा खोला,
कुछ ख्वाब हकीकत बन चुके थे तो किसी पर जंग लग गई थी,
कुछ अपनी मंजिल की ओर दौड़ रहे थे तो कुछ सुकून से सो रहे थे,
कुछ अपनी कामयाबी से खुश थे तो कोई अपनी नाकामयाबी पर रो रहे थे,
कुछ रूहानी बन चुके थे तो कोई जिस्मानी बन कर मर रहा था,
कुछ ख्वाबो को मैने अपने डर की बेड़ियों से बांध रखा था तो कुछ पर ओरो की लगाम थी,
कुछ दुनियावालों से लड़के घायल था तो कोई अपनो से ही लड़ रहा था,
कुछ ख्वाब यादे बन चुके थे तो किसी की तो यादे भी मिट चुकी थी,
कुछ हसरते भी थी उस ख्वाब में और कुछ गुरुर भी था,
कुछ खुशिया भी थी तो कुछ गम भी शामिल थे उसमे,
वक्त की साजिश भी थी और हालात की मजबूरिया भी थी,
कुछ पाने की ख़ुशी थी तो उसे खोने का डर भी था,
कुछ मिट्टी के गुल्लक की तरह ही थी फितरत उसकी,
अगर संभाल के रखो तो कुछ बढ़ता नही अगर फेक दो तो टूट जाता है,
हर रोज लड़ते थे एक दूसरे से पूरा होने को पर किस्मत देखो,कुछ पूरे होते थे तो कोई खत्म ही हो जाता था।


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Alap Dave 26 JUN AT 14:21

रोज मिलने की उम्मीद करता गया,
रोज उम्मीद का दिया बुजता रहा।

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Alap Dave 21 JUN AT 10:17

एक उंगली ही पकड़कर चलना था मुजे उसने अपना हाथ थमा दिया था,
एक छत चाहता था रहने को उसने अपना जहां थमा दिया मुजे,
कभी चंद सिक्को की थी जरूरते थी उसने नोट की गड्डी थमा दी थी,
कभी डाट देते है तो शाम को कंधे पे हाथ रखकर दोस्त भी बन जाते है,
कुछ इस तरह होता है ये बाप का किरदार जिसके चर्चे बहोत कम होते है लेकिन किस्से बहोत होते है।

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Alap Dave 19 JUN AT 22:38

कुछ वक्त से खामोश बेठी हो फिर भी नज़रे तुम्हारी थरक रही है,
तेरे माथे पे शिकन है और होठ नम है लगता है आज फिर मन मे बाढ आयी है।

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Alap Dave 17 JUN AT 23:57

कुछ यूं लापता हो गये हो तुम की ढूंढने पर भी ना मिले,
बस एक याद थी तेरी जो बिना दस्तक दिए भी मिलने आ जाती है।

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Alap Dave 14 JUN AT 20:06

आज फिर हवा का रुख बदला है आज तूफान आने को है,
आज फिर एक दिया बुज गया है रात को रात काली होने को है,
आज फिर किसी की आंखे बंद हो चुकी है उन आखो के लिए अश्क आने को है,
आज फिर कोई अलविदा कहकर चला है इस दुनिया को आज एक और जनाजा निकलनेवाला है।

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Alap Dave 12 JUN AT 22:57

ना उम्मीद हो कर लौटे थे जब आरज़ू को अपनी जिद बना बैठे,
ख्वाहिशो की कद्र करना तो दूर उसे मन का बंदी बना बैठे।

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Alap Dave 11 JUN AT 21:53

વાત તો આ પ્રજા ની છે
ન ચાલે કઇ એમ
જેમ રાજા કહે એમ.

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Alap Dave 11 JUN AT 0:03

आज बादल बरस रहा है बड़ी जोर से लगता है आज सालो बाद मौका मिला है उसे भी अश्क बहाने का।

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