Akhand Pratap Singh   (@yourakhand)
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Joined 6 July 2020


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17 OCT AT 1:27

अगर ये हमें, डुबाती है
तो तैरना भी यही सिखाती है।

ख्वाइशों के खेल में
हमे अक्सर ये बड़ा नचाती है।

आज अगर ये चाहिए इसे
तो कल उसकी भी मांग उठाती है।

कभी जीत कर हराती है
कभी हार कर जिताती है।

पर दोस्त,जिंदगी हर बार हमें
एक नई सीख दे जाती है।।

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12 OCT AT 22:30

नगर के नजदीक
नदी में एक नाव पर
इसी नरलोक में
निडर सा एक नाविक ।

निर्यात के नशे में
नीले नदी में
नीलम को ढूंढता
निश्छल सा वो नाविक।

नियति के निर्णय में
निष्ठा दिखाता पर
निरश जीवन मे
नीरज खिलाता वो नाविक।

निराश है आज पर
निश्चय भी किया है
नित नीलम की खोज में
निकल जाता वो नाविक।।

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5 OCT AT 13:48

नारी का जीवन
जैसे विचित्र एक कहानी
बंदिशें है समुन्द्र जितनी
त्याग जितना कि समुन्द्र में पानी ।।

नारी का जीवन
जैसे विचित्र एक कहानी
संघर्ष है आकाश जितना
पर है उड़ते चिल,कौवों से अनजानी।।

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30 SEP AT 15:27

खत्म कुछ भी होता नहीं यहां जब,
तो क्यों खत्म है करना खुद को !!

जिंदगी है समुन्द्र में अगर,
तो क्या नहीं जिंदगी मरुस्थल में !!

परिवर्तित होता है सबकुछ यहां जब,
तो क्या लोग नहीं परिवर्तित होंगे !!

परिवर्तन ही तो करना है खुद में तुझको,
जैसे समुन्द्र हो जाता परिवर्तित,किसी मरुस्थल में !!

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29 SEP AT 21:37

सही वक्त होता है,हर एक बात का
यूँ बेवक़्त नाराज़गी नही दिखाया करते।

छूट जाते हैं लाखों रिश्ते,पीछे उनलोगों के
जो जख्म गहरे लेकर,अक्सर जंगल मे जाया करते।।

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23 SEP AT 17:08

कभी कभी ,कुछ बदलने से
बदल जाता है बहुत कुछ ।

तब थोड़ा संभलने से
संभल जाता है बहुत कुछ ।

आज अगर हार ही गए तो क्या हुआ,याद रखो
गमों का गर्दिश भी सिखलाता है बहुत कुछ ।।

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15 SEP AT 13:14

मुश्किलें इतनी भी बड़ी नही होती दोस्त,
जितना वो अक्सर दिखा करतीं हैं।

ये तो बस उन वैश्याओं की तरह होती हैं,
जो अपने समय पर खूब बिका करती है।।

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14 AUG AT 20:40

अगर तू तलवार होता
काट डालता शीश तू शत्रु का
पर तुझको ना किंचित भी दुख होता।

जख्म देता कितने भी गहरे
और शत्रु जब दुख से रोता,
तनिक भी ना तुझे बुरा लगता नाही तू कभी लज्जित होता।

पर याद रख तू कोई तलवार नही
जख्म देकर खुश ही रहना,इतना भी आसान नही।

माना तेरा जीवन है रणभूमि
पर समय कि है अब पुकार यही
पुनःविचार कर तू फिर से
क्षमादान कर दे तू फिर से
है मानवता कि एक मांग यही।
है मानवता का एक सार यही।।

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12 AUG AT 23:58

समझना मुश्किल है लेकिन बहुत आसान सी नीति हूँ
हाँ मैं राजनीति हूँ।

चंद लोगो कि वजह से ,हर वक़्त जहर पीती हूँ
हाँ मैं राजनीति हूँ।

जो समय के साथ बदलता रहे वही तो रीति हूँ
हाँ मैं राजनीति हूँ।

सब के विचारों से सीख कर जीती हूँ
हाँ मैं राजनीति हूँ।

आज सोच कर देखो तुम्हारी भी आपबीती हूँ
हाँ मैं राजनीति हूँ।।

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8 AUG AT 19:18

एक चिता थी सामने,जला जो वो मेरा आक्रोश था।
क्षत्रियता निभा कर आज,फिर से मैं खामोश था।।

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