Akhand Pratap Singh   (@yourakhand)
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Joined 6 July 2020


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Joined 6 July 2020
13 APR AT 15:19

काल के इस भवँर में
कठिनाइयों के इन प्रहर में
कर्तव्य को सारथी मान
लक्ष्य के अनमोल पथ पर
अब बिन रुके,मैं चलूँगा
आरम्भ जब मैंने किया
तो अंत भी मैं ही करूँगा।

सिर्फ योजना नही अब युद्ध होगा
आत्मा भी मेरा शुद्व होगा
गलतियों से सीख लेकर
मुझे रोकने वाली खुद की बुराइयों से
अब बिन रुके मैं लड़ूंगा
आरम्भ जब मैंने किया
तो अंत भी मैं ही करूँगा।।

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8 APR AT 22:15

स्याह रातों ने सिखाई है जो बातें तुझको
क्या दिन का उजाला वो बातें सिखा पाता!!

जो गुनाह हुए वो जरूरी थे,मेरे भाई
वरना इस रंगीन दुनिया मे,सफेद जीवन लिए तू कहाँ जाता।।

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16 MAR AT 15:00

ऐ सर्प ये दर्द बर्दाश्त क्यों
विष है डसना आता है तुझको
फिर मौन बैठा तू आज क्यों।

ऐ मनुष्य ये सर्प उदास क्यों
न काटा इसने किसी को बेवज़ह
फिर इसके वंश का आज सर्वनाश क्यों।

ऐ विधाता तुझसे ये आस क्यों
तूने ही चाहा सर्प का मरना
फिर मारने वाले के सिर पर उसका पाप क्यों।

ऐ वक़्त बता ये विनाश क्यों
लाखों मौते होती है यहाँ
फिर एक और का इतना,आज एहसास क्यों।।

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20 FEB AT 0:25

बहुत खयाल रखती थी मेरा, वो सितमगर
तभी तो रुख इल्जामों का,अपनी तरफ मोड़ गयी वो।

मेरी तो सिर्फ सूरत,उसकी तो सीरत भी प्यारी थी
यूँ ही नही सबके आंखों का कफन ओढ़ गयी वो।

ना हो बेईमानी किसी गैर के साथ,मौका मिले सबको
ये कह कर उस रोज रिश्ता तोड़ गयी वो।

कुछ इस तरह से टूटते दिलों को जोड़ गयी वो
मेरे छोड़ने से पहले ही मुझको छोड़ गई वो।।

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17 FEB AT 1:22

कह दो ना जो भी कहना चाहते हो तुम कुछ दिनों से,
दूर ही तो जाओगे मेरे दिल से तुम
पर बेवजह किसी दूसरे की तुम जगह तो न लोगे।
हर बात पर रुठ जाते हो बताओ सज़ा कितनी दोगे,
तुम्हारे गुनाहों के बारे में पूछूँ अगर,तो वजह कितनी दोगे।

अरे तुम कहो तो सही, साफ-साफ एक एक बार ये कि,
नही मुकम्मल हो सकता है अब इश्क़ हमारा।
बहुत दूर चला जाऊंगा मैं तुमसे उसी पल,
अब हर बार तो नही कर सकता मैं इंतजार तुम्हारा।

तुम्हारे लिए तो खेल है आशिक़ बदलना
सच्चे प्यार का देखा ही कहाँ तुमने कोई नज़ारा।
क्या होगा मेरा,
ये सोच कर मत ज़ाया करना तुम थोड़ा भी वक़्त तुम्हारा।

अरे मैं उनमे से नही जो मान कर बैठे है यहां कि,
इश्क़ किसी और से नही हो सकता दुबारा।।

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9 FEB AT 16:15

जो लोग खुद से रोज जंग लड़ा करते है,
यक़ीनन, हाशिल वो जीवन मे कुछ बड़ा करते है।

यूं ही नही मिल जाता सबकुछ उन्हें
आग में तप कर हर रोज वो,अपनी मूरत खुद गढ़ा करते है।।

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9 FEB AT 16:06

अगर मान ले कि कण कण में यहां विधाता है।
तो क्या मूर्ति साफ करते वक़्त
ईश्वर खुद से खुद की ही परत हटाता है!!

तो फिर लाभ कैसा,हानि कैसी,
दुख कैसा ,ग्लानि कैसी,
सबकुछ वही तो करवाता है
सबकुछ वही तो करके जाता है!!

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31 JAN AT 16:48

मुस्कुराते हो,मुस्कुराओ,मुस्कुराना अच्छा होता है
पर कभी तन्हाई में हँसो, तब तुम मानो तुम खुश हो।

छुपाते हो बेशक छुपाओ ,कुछ बातें छुपाई जाती है
पर गहराई के अंत मे जो बात छुपाई है तुमने,
बन बीज बनेगा ,वृक्ष वो एक दिन,
उसको ना छुपा तुम पाओगे।
मुस्कुराओगे,शरमाओगे,याद आएंगी बातें,पछताओगे
आज समय है कह सकते हो,उस वक़्त नही कह पाओगे।

कुछ पल दुख हो सकता है कहने पर,
पर सुकून होगा दिल मे एक ,खुश होकर तो जी पाओगे।।

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18 JAN AT 13:47

उनका वक़्त बेवक़्त रूठ जाना भी जायज लगेगा,
खामोश रहोगे तुम,और उनका तुमपे बेवजह चिल्लाना भी जायज लगेगा।
कमबख्त इश्क़ चीज ही ऐसी है दोस्त,
कत्ल होगा तुम्हारा उनके ही हाथों,फिर पलट के उनका मुस्कुराना भी जायज लगेगा।।

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12 JAN AT 22:56

यहां हर मन में है एक कोना,जिसमे छुपी है एक कहानी
कहीं ना कहीं हर किस्से में की है सबने खुद से एक बईमानी,
ना किसी ने हार ही है मानी,ना ही लड़ने कि है किसी ने ठानी।

यहां हर एक मन में है एक कोना,जिसमे लिखी है एक कहानी
बिना शब्दों कि एक किताब जिसकी श्याही,आँखों का पानी।

यहां हर एक मन में है एक कोना,जिसमे जली है एक कहानी
तक़लीफ़ हुई जलने से जिसके पर राख से भी मिली सुकून रूहानी।

यहां हर एक मन में है एक कोना,जिसमे अमर है एक कहानी
हर मोड़ पे शायद याद आये जिसके किरदारों की नादानी।।

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