Akanksha   (आकांक्षा)
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for conversations, random memedrops or even gossip:

akanksha.prakash011@gmail.com
Joined 26 April 2017


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akanksha.prakash011@gmail.com
Joined 26 April 2017
17 SEP AT 8:16


और हम चाहते हैं कि हम सब कुछ हो जाएं, यह भी-वो भी... सब कुछ जो दुनिया को समझ आ‌ए और हम अपने अधूरेपन को अजनबियों की तारीफ़ों से भर लें, क्या पता इसी से अगली सुबह आँखें खोलने का कारण मिल जाए पर, क्यों खोलनी हैं? क्या है ऐसा जो‌ आज नहीं हुआ और कल हो जाएगा? परिस्थितियां बदल सकती हैं, सब अच्छा हो सकता है लेकिन सालों से जिस खालीपन को हम-तुम घसीट रहे हैं वो लहुलुहान होकर भी हम पर हँस रहा है। झंड हो कर हम‌‌ इसे और अधमरा कर डालते हैं, सब के‌ सामने उघाड़ कर रख देते हैं कि आओ! जो हमसे बचे उसकी कसर तुम निकाल दो पर इस रिक्त स्थान ‌को भर‌ दो।
पर ब्लैक-होल का सिद्धांत पता है न?
उसे भरा नहीं जा सकता, न समय से, न किसी की बातों से, न आध्यात्म से न खुद के अस्तित्व से...वो वक्त के साथ बड़ा होता ही जाएगा, यही उसकी प्रकृति है।

जब भीतर-बाहर सब शून्य है, तो क्यों खोलनी हैं आँखें फिर?

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14 SEP AT 13:12

बहुत दिनों का पानी ठहरा, सड़ गया यह पात्र यहीं,
दरारें पड़ रहीं अंदर से, उखड़ी मिट्टी की परतें कई।
काला हुआ जाता है मन जो साफ़ गेरुआ था कभी,
भीतर‌ गल-गल गिरता मैं, बाहर चिकना घड़ा सही।

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1 SEP AT 23:35

"...हवा में अजीब-सी पर जानी पहचानी महक है, जैसे स्कूल बस छूटने वाली हो, कुछेक मिनट के पीछे।"


(पूरा लेख अनुशीर्षक में पढ़ें)

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27 AUG AT 18:13

अकथ्य के भार से
अब ज़ुबान ऐंठती है
आशाओं की सारी नमी
पुतलियों पर जमती है
सो रहा हूँ अपलक,
अचेत हूँ, पर सुनता हूँ तुम्हारी हिचक
चले आओ, अवसान से पहले देख लो,
कैसे निगल रहा मुझे यह तमस
ठंडी देह में कैद धधकता अन्तर्मन,
धीमे नि:श्वास से उठती है ऊमस
ये मैं,
वो मेरी शिकस्त।

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31 JUL AT 13:12

Do you remember the teletubbies' sun baby?
That cackle? Golden rays of absolute happiness?
The baby grew up to be Payal Wadhwa for the world around her, which includes me now, luckily!
Talking to this girl radiates mega bestie energy, reading her is as joyful as listening to her chuckle over the poorest jokes you crack.

In one heck of a complicated world, she's an innocently simple soul, a rare gem, the one with sweet chocolate filled inside and also the one that sparkles, shines and is an asset. She can turn your stars over, so don't hurt her.

Happy birthday, sunshine 🌞

-Akanksha

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4 JUL AT 18:56

मर जाओ उस दहलीज़ पर
जिस पर बैठने‌ वाले
पचहत्तर सालों से
खून‌ के धब्बे
तमगे की तरह पहनते आ रहे हैं
अधकचरे तर्कों का पुलिंदा
या सरकारी दफ़्तर का बंदा,
याचना का गला पकड़ लेता है
याचक की विवशता जकड़ लेता है
जहाँ धूल उड़ती ही हो इस मकसद,
कि ढँक जाये बड़े-बड़ों की बरकत
न इरादों की हरकत,
न हरकतों का जमघट
न्याय तो कोई तौलता नहीं,
भीतर भी कुछ खौलता नहीं
यह रोग है,
भयंकर
जब सब की नसों में
खून की कमी हो जाती है।

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20 JUN AT 18:46

[wan•der•lust] /n./
सफ़र का अनुराग
भाग-६

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14 JUN AT 19:58

–this is not a quote–

see it as a hand, a hug, two ears and a heart reaching out for help.
there has been a lot of talk going around about depression and how people should "let it out" but when they do, we ridicule them and casually tell them to "get their shit together."
it's not easy to spill
it's not easy being a listener too, without bias.
there is depression which often goes unnoticed and then there is depression that's rubbed on your face because you chose to listen. there are people who use depression as an excuse for anything, there are people who are actually struggling but they never tell. our motive should be to cure both, former with reason and the latter with love and care.
i volunteer to be a listener, for anyone who needs to throw things off his/her chest. feel free to drop an email right up on my bio.
(a little trick, talking to strangers is easier than you may think. you have nothing to lose)

-akanksha

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10 JUN AT 15:27

talk about constraints
unfair society, family pressures
easy for me, i'm a woman
nobody talks about 'his' inhibitions
self-control that's expected of him
at all times
yes, all.
have you been barred from breaking down?
or expressing love?
it is both adorable and heartbreaking
to see him sneak a kiss
from behind a screen
looking away immediately to see
if someone caught him
being vulnerably mine for a split second

-akanksha

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4 JUN AT 18:16

भोर
सांझ
बस तन का स्नान
शीत अंग पर हृदय का ताप
जिस मन को नित्य जलाता हो
उस मन को कभी झाड़, बुहार
उतने बादल बाहर भी हों
जितना भीतर भरा गुबार
एक बूंद
दो बूंद
फुहार
फिर हो ना
सारे सवाल
धो दे वो बरसात

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