aakash vishnoi   (Aakash vishnoi)
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Joined 2 April 2017


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Joined 2 April 2017
aakash vishnoi 8 HOURS AGO

जब
किसी रोज
सूरज की किरण
मेरे चेहरे पर पड़े कोई

मेरी आंखें खुलें ,
और नींद से जगू मैं
तेरी प्यारी बांहों में
खामोशी से उठूं मैं

कि सोती हुई सी तुम
ख्बाबों में होती हुई सी तुम
मुझे बेहद ही प्यारी लगती हो।

फिर धीरे से भी उठा अगर
तेरी उलझी जुल्फों में मगर
मेरी शर्ट का बटन हो उलझा सा
जो तेरी जुल्फों में उलझा,
मगर चाहत में हो सुलझा सा

तुम उठ न जाओ कहीं
कोई ख्बाब न रह जाए अधूरा
पास ही लेट जाता हूं फिर से
मैं तुम्हारे करीब होकर थोड़ा

फिर जब खुलती हैं जाना आंखें तुम्हारी💖
कर लेता हूं बंद ये अपनी अखियां बेचारी

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aakash vishnoi 15 AUG AT 21:36

💖💖💖Never mind💖💖💖

There are more obstacles
More than ,expected ones
Though
less chance to succeed there;
Though
Less chances to find the way;

U Never mind the , rude obstacles
U Never mind the rudeness of paths

Never mind the words of people
Never mind the silence of darks

Here is a beautiful destination
Everyone needs a path creation

Here is a brighter future,
Here exists a beautiful life;
In its succeeding branch
I hear the clapping of crowd lines

When i will get that i dreamed
When i will reach ,destination i dreamed😊
it's time, my dear wife,
Into my life, you're welcome!💖

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aakash vishnoi 16 JUL AT 23:25

जन्नत-ए- इश्क पेश कर, बर्बादियों से नवाजी गई जिंदगी मेरी
उससे मोहब्बत होने से पहले , घर मेरा भी आसमान में था।

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aakash vishnoi 7 JUL AT 15:51


& now Am sitting here
Sitting all alone
Staring those stars
Thinking about those moments
Losing myself in her
Losing myself in her memories
To meet her
To feel her
& To live with her again
& To keep those promises
That we never broke💖

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aakash vishnoi 3 JUL AT 0:11



जहां कभी
तेरे कदमों की आहट, तेरी पायलों की गुनगुनाहट
तेरे लबों पे मुस्कराहट
हुआ करती थी
जहां कभी
तेरी नजरों में मुझको,मेरी नज़रों में तुझको
मैं ढूंढा करता था
जहां कभी
तुम तन्हा राहों में,मेरी बाहों में
हंसते हुए गाते हुए,मुझे गुनगुनाते हुए
सो जाया करती थीं।
वहां, सिर्फ सफ़र है अब
और तन्हा राहें हैं
तन्हा है सागर
तन्हा ही किनारे हैं
ना ही शोर कोई ना खामोशी है
ना ही पछिंयो का चहचहाना
ना हवाओं में मदहोशी है
ना सवेरा
ना ही अंधेरा है
ना कोई परछाई है अब
ना ही कोई चेहरा है
ना उन भंवरों का मंडराना फूलों पर
ना ही मुझ पे तेरी जुल्फों का पहरा है
सब कुछ बदला यहां
बदल रहा है और भी कुछ
मगर मेरी डायरी ने कभी
तेरी यादों के पन्नों को सिमटने न दिया।
- आकाश विश्नोई








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aakash vishnoi 17 MAR AT 22:28

❣️ Then i kissed her❣️

We Both
sitting together
Closer than ever
Me smiling ...
Blushing she
about 10 pm
Late at night ...
Under the open sky
wind was much pleasent
Romantic was the sight..
& At a time i found myself
Into her mysterious eyes
She too lost herself
somewhere into my eyes
Soon the Conversation
changed Into the silence
Lips were silent
She was silent
Me was silent...
I started untwisting
Twisted hairs of her
She came closer
We came closer...

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aakash vishnoi 5 MAR AT 18:42

जुल्फें हैं या काली घटा कोई
जुल्फें हैं तेरी या बहती हवा कोई

जुल्फें हैं या तेरे चेहरे पे पहरा
जुल्फें हैं तेरी या कोई सपना सुनहरा

जुल्फें हैं या कोई बहता बादल
जुल्फें हैं तेरी या आंखों का काजल

जुल्फें हैं या सूरज की किरण कोई
जुल्फें हैं तेरी या मदमस्त हवा कोई

आंखें हैं या हैं चमकते सितारे
लब हैं तेरे या सागर के किनारे

पलकें हैं या सपनों का आंगन
पायल है तेरी या गुनगुनाता सावन

हंसी है तेरी या गीत पवन के
लबों से निकले जो मधुर धुन बनके

अदाएं ही कातिलाना या क़ातिल हो कोई
उतरीं हुई फलक से ,क्या अप्सरा ही हो कोई !

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aakash vishnoi 7 FEB AT 16:36

तुम पेड़ की छांव सी
महकती हवाओं सी
मैं उस रेत सा
हर पल एक सा
जो तेरे ही झोंको से
ज़मीं पे ठहरा नहीं
होके भी तेरा मैं
हुआ अभी तेरा नहीं
ना सूरज से सवेरा मेरा
ना चांद से है रात कहीं
बेहतर तेरी इन आंखों में ही
मिल जाए मुझे मुकाम कहीं

तुम एक गीत सी
तुम एक धुन सी
मैं एक तन्हा मन
तुम्हें ही गाता रहा
तुम्हें गुनगुनाता रहा
तुम उस नीर‌ सी
बहते समीर सी
मैं एक किनारा बन
तुम ही के लिए ठहरा रहा
कि फिर किसी रोज तुम
आ मिलो फलक से
इक बरसात की बूंद सी
बादलों के बीच एक
मुस्कुराती धूप सी
और शुरू करें हम इक अंतहीन सफर
लोग जिसे यहां इश्क कहा करते हैं.....!
- आकाश विश्नोई


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aakash vishnoi 10 JAN AT 20:03

बेपरवाह मैं और तुम
चलेंगे इस जहां के किनारे
सितारों से सजे आसमां के किनारे

मैं तुम्हारी आंखों में वहां
खुद को ढूंढ पाऊं शायद
जुल्फें तुम्हारी सुलझाने को
करीब तुम्हारे आऊं शायद

फिर तुम्हारी जुल्फों को सुलझा मैं
इन जुल्फों में खुद ही को उलझा मैं
आंखों में मेरी तुम ही को छुपा मैं
पलक खोलने से परहेज़ करता रहूंगा

साथ तुम्हारे वे-परवाह सा
कांटों पर भी लापरवाह सा
हर एक कदम चलता रहूंगा।
💖 Shaheen

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aakash vishnoi 6 JAN AT 22:05

She has
The most beautiful eyes...
Her eyes
Perhaps an ocean in itself
And the Magical
sparks in her eyes
Were brighter
than the moon too...
Perhaps A deep blue ocean
Is less mysterious than her eyes...
Too many lost there
many more
will lost in future too...
Somehow
I escaped
From the magic
Of her beautiful eyes..
I Somehow
escaped from those ocean like
mysterious eyes....
And
The only boat
that didn't lost
In that ocean........was mine...!

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