आदित्य राघव   ('राघव')
1.9k Followers · 104 Following

कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा
होता रहता है यूँ ही क़र्ज़ बराबर मेरा
Joined 29 January 2019


कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा
होता रहता है यूँ ही क़र्ज़ बराबर मेरा
Joined 29 January 2019

मन‌ उत्सव सा हिल्लोल लिए
सपनों का सब भूगोल लिए
तकता है आंगन ‌ द्वार पार
विस्तृत फैला, फैला संसार

-


58 likes · 18 comments

आजादी मिलना जितना कठिन था
उतना ही कठिन उसे संभालना कर रखना है...

हम सब अपनी आजादी को संभाले और
हमारा देश नित नए आयाम स्थापित करे।
इसी मंगलकामना के साथ
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

-


44 likes · 2 comments · 5 shares

खेल के बाद
मैदान ‌खाली नहीं होता
खेल के बाद खिलाड़ी
छोड़ जाते हैं स्पंदन

कर्मठ व्यक्तित्व, ओजस्वी वाणी
भारत की पू्र्व विदेश मंत्री
श्रीमती सुषमा स्वराज जी को
भावभीनी श्रद्धांजलि

-


Show more
53 likes · 3 comments

Aaaa

-


86 likes · 17 comments

जब तुम मुझे ऐसे शांत बैठे देखोगे
जैसे अलमारी में छूटी कोई पुरानी किताब

तो ये मत सोचना कि मुझे ज़रूरत है
तुम्हारी हल्की-फुल्की बातों की

जबकि होगा यह कि मैं अपने अंदर की
आवाज़ सुन रहा होऊँगा

#copied

-


Show more
84 likes · 10 comments · 1 share

कोचिंग के इस दौर में हम‌उम्र गुरु होने लगे हैं
गुरु शिष्य के बीच प्रेम प्रसंग शुरू होने लगे हैं
शिक्षा के हाल अब तो इस कदर फटेहाल हैं
पांडव सारे फेल और पास कुरू होने लगे हैं

-


Show more
79 likes · 18 comments · 2 shares

दिल की हस्ती भी है उलझी पहेली सी
जाती है कहां जाने एक राह अकेली सी

खुद ही प्यार लुटाना खुद ही रूठ जाना
लड़की है वो भोली-भाली अलबेली सी

तारों से सजी, मोहक , बिल्कुल शांत
रात भी हो जैसे दुल्हन न‌ई नवेली सी

-


90 likes · 18 comments

बदल गया हूं मैं ?
हां शायद बदल गया हूं मैं
जब मंजिलें बदलती है
तो रास्ते बदलते हैं
सपनों से समझौता कर
फिर सपने बदलते हैं
इन‌ बदलावों की खातिर
हां बदल गया हूं मैं
वक्त के साथ-साथ
सब कुछ बदलता है
ये सुबह, ये शामें,
ये मौसम बदलता है
इन बदलावों में जीने के लिए
बदलना ही होता है सबको
सो, बदल गया हूं मैं

-


Show more
104 likes · 30 comments · 2 shares

रोज बदलती तेरी बात देख रहा हूं मैं
तेरे हाथों अपनी मात देख रहा हूं मैं

-


139 likes · 46 comments

ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं

पिछले कुछ दिनों बहुत
ज्यादा व्यस्तता रहने के कारण कुछ लिख
नहीं पाया। फिर भी आप लोगों से जुड़े रहने
की पूरी कोशिश की । जल्द ही आपको कुछ
न‌ई पोस्ट पढ़ने को मिलेंगी।


-


103 likes · 14 comments · 1 share

Fetching आदित्य राघव Quotes

YQ_Launcher Write your own quotes on YourQuote app
Open App