Aabha Pandey   (Aabha)
226 Followers · 10 Following

read more
Joined 4 May 2019


read more
Joined 4 May 2019
5 AUG AT 16:43

I was getting old day by day and an unknown fear was chasing me that being in IT, I can be dismissed by industry at any time...
New generation is faster than me...
Sometimes more curious then me...
Adaptable... Learner... Degree Holder...
What I have!
But I found my answer...
I am honest. Honest towards my work...
towards my commitments...
And moreover I have patience...
Patience in succeeding...
Patience in retaining...
Patience in getting jobs done completely till customer satisfaction.

-


25 JUL AT 12:10

इस संसार में शब्द या तो ब्रह्म है,
या मात्र अभिव्यक्ति है
या मिथ्या है...
पर सत्य आंतरिक है,
विचारणीय है,
शांत है,
अतः मौन है।

-


2 JUL AT 6:16

Love is limitless, Limits are the business only.

Love keep itself silent, Limits shout only.

Love has wings to fly
Limits have controls to rule.

Love accepts you as is
And Limits always try to change you.

But actually Love changes you permanently
And Limits hold you tight before you fall in Love.

-


22 MAY AT 18:55

अक्सर इस ज़िंदगी की आपाधापी में
हम भूल जाते हैं कि ―
हम बड़े, हमारी जिद बड़ी,
या हमारा परिवार।

हम अपनों के बीमार होने पर,
सारा व्यापार छोड़ देते हैं...
पैसा पानी की तरह बहा देते हैं...
अपना सुख-चैन सब भूल जाते हैं...

पर वहीं व्यापार में इतने डूब जाते हैं कि
कि परिवार छोड़ो, खुद को भूल जाते हैं।
अब ये व्यापार तो नहीं...
खुद के वजूद की जिद ही तो है,
जो खुद के मरने पर भी जिंदा रहना चाहती है।

-


18 MAY AT 22:38

आज मैं एक दिन और बड़ी हो गई...
और बढ़ गया अनुभव भी मेरा...
बात बस इतनी सी है,
कि ज़िंदगी आज फिर
एक नया सबक सिखा गई।

-


18 MAY AT 9:20

एक ओस की बूँद हूँ,
बस, कभी चमक मैं जाती हूँ,
वरना तो बस लुढ़क घास से,
गुमनामी में खो जाती हूँ।

-


5 MAY AT 13:09

मुझे सांस आ रही है,
पर सांस लेने के मन नहीं कर रहा।
मेरे पास आज काम है,
पर काम में मेरा मन नहीं लग रहा।
छोड़ कर भाग जाना चाहती हूं सबकुछ,
चंद अपनों के पास,
पर अपनों को छोड़कर जाने का,
मन नहीं कर रहा।
इसीलिए अपने में ही गुम होती जा रही हूँ,
किसी से भी अब बात करने का,
मन नहीं कर रहा।
ना जो है उसे छोड़ सकती हूँ,
ना जो हाथ से फ़िसल रहा है,
उसे रोक सकती हूँ,
बस जकड़न है और मैं जड़ होती जा रही हूँ,
पर इस सबसे बाहर आने का अब
मन नहीं कर रहा।

-


1 MAY AT 15:33

मानव समाज में सबसे छोटी और मजबूत इकाई है - परिवार।
इंसान स्वयं के लिए जीत है, पर परिवार के लिए जीत भी है, मरता भी है और रोज़ मर मर कर जीता भी है।
किसी की खुशी एकाकी जीवन हो सकती है, पर लाख दुःख और परेशानी होने पर भी जो मुस्कुराहट आती है, उसका कारण है परिवार।
और ये परिवार सबसे छोटा भी हो सकता है और सबसे बड़ा भी, क्योंकि परिवार कोई भौतिक बंधन नहीं, मन की सोच है।
मानो तो सिर्फ पत्नी-बच्चों और माँ-बाप में ही संसार है और मानो तो ताऊ, चाचा, मामा, मौसी, ससुराल, पीहर सब अपने हैं। मानो तो सारे दोस्त परिवार हैं और मानो तो अनजान के लिए उभरने वाली मानवता भी इसलिए है कि वो भी कहीं न कहीं हममें से एक ही है। सम्पूर्ण देश, पृथ्वी, मानव, पशु, पेड़, सारी सृष्टि एक परिवार ही तो है।

-


29 APR AT 20:50

दुनिया में हर व्यक्ति एक उद्देश्य को लेकर आता है,
और जानते हुए या अनजाने में उसे पूरा करता है,
और चला जाता है...

वो जाने या न जाने,
पर कहीं न कहीं वो जानता भी है
और उसे अनुभव भी करता है...

शायद यही वो कड़ी है
जो मस्तिष्क से हृदय को
धड़कना बन्द होने का निर्देश देती है
और हम अपनी प्राकृतिक मौत का वरण करते हैं।

और हाँ, ये उद्देश्य हमारा कर्तव्य होता है...
न कि हमारी अनन्त इच्छाएँ।

-


27 APR AT 22:22

Unclothing
----------------
Unclothing is nothing
but to share and reveal
yourself as you are...
With all your
perfections and imperfections...
With a believe that
the other one will
accept you as is...
And clothe your secrets
in front of others.

-


Fetching Aabha Pandey Quotes