YourQuote Didi   (YQ Hindi)
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Joined 1 February 2017


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YourQuote Didi 2 HOURS AGO

कहाँ रह गया

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कहाँ रह गया.....
#कहाँरहगया #collab #yqdidi

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YourQuote Didi 4 HOURS AGO

बहुत बार ऐसा देखने को मिलता है - यदि शब्द है समाज तो भाववाचक बनाते हुए हम बेध्यानी में 'समाजिकता' लिख जाते हैं। जब कि सही शब्द 'सामाजिकता' है। इसी प्रकार के कुछ और शब्द भी देखें।

प्रकृतिक नहीं प्राकृतिक
अधिकारिक नहीं आधिकारिक
संसारिक नहीं सांसारिक
अपराधिक नहीं आपराधिक
अंचलिक नहीं आंचलिक

यदि आप को भी ऐसा कोई शब्द याद आ रहा हो तो कमेंट करके बताएँ। हमारे ज्ञान में इज़ाफ़ा होगा।

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YourQuote Didi 8 HOURS AGO

माननीय प्रधानमंत्री जी

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YourQuote Didi 13 HOURS AGO

एक साथ बैठे हैं

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YourQuote Didi 22 HOURS AGO

उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा
वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा

इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे
रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा

प्यास जिस नहर से टकराई वो बंजर निकली
जिसको पीछे कहीं छोड़ आए वो दरिया होगा

मेरे बारे में कोई राय तो होगी उस की
उसने मुझ को भी कभी तोड़ के देखा होगा

एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक
जिसको भी पास से देखोगे अकेला होगा

'निदा फ़ाज़ली'

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*तबस्सुम - मुस्कुराहट, *शरीक - शामिल होना।
#midnightpoemhindi #निदाफ़ाज़ली

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YourQuote Didi YESTERDAY AT 19:59

चुपके से

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चुपके से...
#चुपकेसे #collab #yqdidi

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YourQuote Didi YESTERDAY AT 12:59

तुम कौन हो

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तुम कौन हो
मैं कौन हूँ।
#तुमकौनहो #collab #yqdidi

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YourQuote Didi YESTERDAY AT 9:03

बहुत कुछ देखने को है

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YourQuote Didi YESTERDAY AT 0:03

आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी

रात गहरी है मगर चाँद चमकता है अभी
मेरे माथे पे तिरा प्यार दमकता है अभी
मेरी साँसों में तिरा लम्स महकता है अभी
मेरे सीने में तिरा नाम धड़कता है अभी
ज़ीस्त करने को मिरे पास बहुत कुछ है अभी

तेरी आवाज़ का जादू है अभी मेरे लिए
तेरे मल्बूस की ख़ुश्बू है अभी मेरे लिए
तेरी बाँहें तिरा पहलू है अभी मेरे लिए
सब से बढ़ कर मिरी जाँ तू है अभी मेरे लिए
ज़ीस्त करने को मिरे पास बहुत कुछ है अभी

आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी!
आज के बाद मगर रंग-ए-वफ़ा क्या होगा
इश्क़ हैराँ है सर-ए-शहर-ए-सबा क्या होगा
मेरे क़ातिल तिरा अंदाज़-ए-जफ़ा क्या होगा!
आज की शब तो बहुत कुछ है मगर कल के लिए

एक अंदेशा-ए-बेनाम है और कुछ भी नहीं
देखना ये है कि कल तुझ से मुलाक़ात के बाद
रंग-ए-उम्मीद खिलेगा कि बिखर जाएगा
वक़्त पर्वाज़ करेगा कि ठहर जाएगा
जीत हो जाएगी या खेल बिगड़ जाएगा
ख़्वाब का शहर रहेगा कि उजड़ जाएगा

'परवीन शाकिर'

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YourQuote Didi 15 SEP AT 20:14

मोहब्बत का एक लम्हा

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