YourQuote Didi   (YQ Hindi)
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Joined 1 February 2017


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8 MINUTES AGO

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5 HOURS AGO

रिश्ता तब कमज़ोर होता है

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9 HOURS AGO

वो कोई और नहीं

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12 HOURS AGO

किसी के काम आ जाओ

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22 HOURS AGO

वो भी कुछ भूला हुआ था मैं कुछ भटका हुआ
राख में चिंगारियाँ ढूँडी गईं ऐसा हुआ

दास्तानें ही सुनानी हैं तो फिर इतना तो हो
सुनने वाला शौक़ से ये कह उठे फिर क्या हुआ

उम्र का ढलना किसी के काम तो आया चलो
आइने की हैरतें कम हो गईं अच्छा हुआ

रात आई और फिर तारीख़ को दोहरा गई
यूँ हुआ इक ख़्वाब तो देखा मगर देखा हुआ

वो किसी को याद कर के मुस्कुराया था उधर
और मैं नादान ये समझा कि वो मेरा हुआ

'इक़बाल अशहर'

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YESTERDAY AT 22:04

आँखें बोल पड़ीं

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YESTERDAY AT 18:34

एक सितारा मेरा भी था

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YESTERDAY AT 13:51

ज़िन्दगी की कश्ती में

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YESTERDAY AT 8:25

ताज़गी महसूस करो

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25 OCT AT 23:23

"उम्मीद"

वो सुब्ह कभी तो आएगी
उन काली सदियों के सर से जब रात का आँचल ढलकेगा
जब दुख के बादल पिघलेंगे जब सुख सागर छलकेगा
जब मीरा झूम के नाचेगा जब धरती नग़्मे गाएगी
वो सुब्ह कभी तो आएगी

जिस सुब्ह की ख़ातिर जग जग से हम सब मरमर के जीते हैं
जिस सुब्ह के अमृत की धुन में हम ज़हर के प्याले पीते हैं
इन भूकी प्यासी रूहों पर इक दिन तो करम फ़रमाएगी
वो सुब्ह कभी तो आएगी

माना कि अभी तेरे मेरे अरमानों की क़ीमत कुछ भी नहीं
मिट्टी का भी है कुछ मोल मगर इंसानों की क़ीमत कुछ भी नहीं
इंसानों की इज़्ज़त जब झूटे सिक्कों में न तोली जाएगी
वो सुब्ह कभी तो आएगी

दौलत के लिए जब औरत की इस्मत को न बेचा जाएगा
चाहत को न कुचला जाएगा ग़ैरत को न बेचा जाएगा
अपने काले करतूतों पर जब ये दुनिया शरमाएगी
वो सुब्ह कभी तो आएगी

बीतेंगे कभी तो दिन आख़िर ये भूक के और बेकारी के
टूटेंगे कभी तो बुत आख़िर दौलत की इजारा-दारी के
जब एक अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाए जाएगी
वो सुब्ह कभी तो आएगी

'साहिर लुधियानवी'

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