दिन का तारा
जो नज़र के सामने होते हुए भी ना दिखे वो दिन का तारा बन गया हूं,
ख़ुद ही से अब तो अनजाना हो चला हूं मैं, जब से तुम्हारा बन गया हूं।
मंज़र जो किसी को भी याद ना रहे, सफ़रनामे का वो नज़ारा बन गया हूं,
जो दूर ही से दिखे और जिसकी कोई पहचान ना हो, वो गुमनाम बंजारा बन गया हूं।
जो नज़र के सामने होते हुए भी ना दिखे वो दिन का तारा बन गया हूं।- Virag R. Dhulia
20 SEP 2023 AT 13:48