Vipulchandra Parmar  
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Joined 19 October 2017


Joined 19 October 2017
Vipulchandra Parmar 22 JAN AT 13:33

मेरी मिट्टी पे खड़ा होकर मुझे पूछता है
की कौन हो तुम।।

मैने का कहा तुम्हारी सियायत हु मैं

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Vipulchandra Parmar 20 JAN AT 10:04

अब _ये _एतराज_ बनाकर_ विपक्ष की तराह खड़ी है
मेरी नाराजगी को कमबख़्त राजनीति समझ बैठी हैं

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Vipulchandra Parmar 19 JAN AT 22:52

देखलो मुझे अपने आईने की तरह ,
की तुझमे ठीक हूँ की नही.
पढलो मुझे अख़बार की तरह ,
की तेरी फिकर नही है मुझे,

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Vipulchandra Parmar 17 JAN AT 14:21

नीतियों अच्छी बनाई हैं जहाँ मे मगर अच्छी नियति बाले लोग कहा है।

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Vipulchandra Parmar 11 DEC 2019 AT 16:25

इन कोरे कागज पर ,मेरे शब्दो के अरमानो का कत्ले आम हुआ.. अच्छा लिखने वाला ही था, तभी शब्दों का जनाजा सरे आम निकला..


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Vipulchandra Parmar 9 DEC 2019 AT 16:37

"किसी को पूर्ण रूप से समर्थन देने का सही अर्थ आत्म समर्पण हैं"

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Vipulchandra Parmar 12 NOV 2019 AT 9:12

लोग हमें समझ समझ कर बैठे हैं
हम है कि अपने आपको अब तक समझ नही सके

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Vipulchandra Parmar 21 OCT 2019 AT 15:25

""हा माना की मैं जमीन की एक धूल हु
मगर मूझे तुफानो के साथ उड़ने की आदत है""

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Vipulchandra Parmar 16 OCT 2019 AT 19:00

चहरे पढ़ ने का हूनर सिख जाओ कभी कभी,
अच्छे दिखने वाले अंदर से बड़े घटिया होते है।

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Vipulchandra Parmar 16 OCT 2019 AT 10:07

....

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