मैं शीशा देर तक निहारता रहा
कोई अज़नबी मुझको देखता रहा
मैं बेख़बर रहा यूं इन सदाओं से
कोई अज़नबी मुझको चाहता रहा
मिरी कहानी का ही वो एक अक्स था
ज़माने भर में जिसको ढूॅंढता रहा- मुज़्तर
9 DEC 2025 AT 1:15
मैं शीशा देर तक निहारता रहा
कोई अज़नबी मुझको देखता रहा
मैं बेख़बर रहा यूं इन सदाओं से
कोई अज़नबी मुझको चाहता रहा
मिरी कहानी का ही वो एक अक्स था
ज़माने भर में जिसको ढूॅंढता रहा- मुज़्तर