vani purohit   (Vani 🎸)
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Joined 27 January 2018


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Joined 27 January 2018
vani purohit 9 NOV AT 11:59

निशब्द हूं मैं कुछ आज
हुई कुछ यूं धरती आहत।
सजती थी कभी तू ,
कर सोलह श्रृंगार,
न कोई मजहब तेरा,
न कोई रखती जात।
फिर भी क्यूं मानव
लिए है आज स्वार्थ।
जमीं से आसमान ,
हाथ फैलाए देती है सौगात।
क्यों नहीं थकते हम करते
फिर भी तुझ पर घात,
घाव सहे , अचल खड़ी रहती क्यों तू नादान
सीने से पत्थर बने, खड़े हम अनजान।
लूटे जा रहे तेरे दामन कलयुग की हम जात
रूठ गई जिस दिन तू हमसे,
गिला होगा खुद हमको हमसे।
क़यामत ही होगी वो खास।
निशब्द हूं मैं कुछ यूं आज।

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vani purohit 5 NOV AT 22:33

थोड़ी उलझी, थोड़ी सुलझी सी
फिर भी कमबख्त मुस्कुरा रही थी।

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vani purohit 20 OCT AT 23:12

यूं तो कई कोशिश थी
जमाने की
हमारी कीमत लगाने की।
उन्हें क्या मालूम सख्ती ,
नीलाम तो सिर्फ
तेरे इश्क़ में हुए हैं।

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vani purohit 15 OCT AT 20:38

यूंही नहीं इश्क़ बदनाम की
कुछ तो तेरी भी साजिश है,

यूंही नहीं इश्क़ बदनाम की
कुछ तो तेरी भी साजिश है,
खुद को लुटा गए जो तुझ पर
बता और क्या इस दिल की ख्वाहिश है।
रजा नहीं इस दिल को
की तुझ पर फना हो जाए,
की वो भी कहीं इंतजार में
कई होंगे महबूब तेरे दीदार में।
जो तुम यूं नादानियां करने लगे हो,
दिल छेड़ कर खुद छुपने लगे हो।

हम तो पहले ही अनाड़ी थे,
तुम और दीवाना बनाने लगे हो।

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vani purohit 9 SEP AT 16:23

रज़ा नहीं इस दिल को की अब
किसी और को पनाह दे दूँ,
कि जो सिर्फ तुझसे ही पूरा था
उसे अधूरा कैसे कर दूँ।

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vani purohit 8 JUL AT 23:43

मेरी माँ आज भी अनपढ़ है,
रोटी एक मांगू
लेकर दो आती है।
मेरी तकदीर में एक भी गम न होता,
अगर तकदीर लिखने का हक माँ को होता।
हर रिश्ते में मिलावट देखी
कच्चे रंगों की सजावट देखी,
लेकिन मेरी माँ के प्यार में मिलावट न देखी।
मेरी खातिर तेरा रोटी पकाना याद आता है
डांट कर खाना खिलाना याद आता है,
कहीं हो न जाते घर की मुसीबत मुझे मालूम
छुपा कर दर्द तकलीफ तेरा मुस्कराना याद आता है।
मेरी मां की फूक का वो मलहम किसी वैद्य के पास नहीं.
जब हम बोलना नहीं जानते थे,तो हमारे बोले बिना
"माँ" हमारी बातों को समझ जाती थी,
और आज हम कहते हैं,
छोड़ो माँ तुम न कुछ नहीं समझोगी।

तेरे डिब्बे की वो दो रोटियाँ कहीं बिकती नहीं माँ,
महंगे होटलों में आज भी भूख मिटती नहीं माँ।
भरे हुए घर में तेरी आहट मिलती नहीं अब माँ,
तेरी बाहों की नरमाहट कहीं मिलती नहीं माँ।
मैं तन पर लादे फिरता हूँ रेशमी दुशाला
तेरे बाहों की गर्माहट कहीं नहीं मिलती माँ।
माँ के कंधे पर सर रखा और पूछा मैंने
"कब तक यूँ सोने दोगी,
माँ ने कहा "तब तक जब तक मुझे लोग
अपने कंधे पर नहीं ले जाएंगे।

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vani purohit 7 JUL AT 12:27

माँ तुम भी गलत हो सकती हो।
हाँ , क्यों नहीं,
स्कूल में टिफिन से लेकर
आफिस के टिफिन बनाने की।
कपड़े प्रेस करने से लेकर ,
किचन सम्हलने तक की।
फुल टाइम ड्यूटी करती हो तुम।
हाथ जल जाए ,चोट लग जाये ,
तो उसे देखती तक नहीं
भगवान थोड़ी न हो जो रो नहीं सकती हो,
तुम भी गलत हो सकती हो,
जरूरत नहीं तुम्हे सहज कर रहने की,
यूँ सम्हलकर हर काम करने की।
जरूरत नहीं तुम्हें मुझसे पूछने की
"मैं ठीक तो लग रही हूँ न'
जरूरत नहीं हमारी शान के लिए घबराने की।
भगवान बन कर जीने की
एक इंसान हो तुम ,
एक खास पहचान हो तुम
मुझे मेरी शख्शियत देने वाली
मुझे नौ महीने गर्भ में रखने वाली
माँ हो तुम,
जरूरत नहीं तुम्हें ही हर
वक्त सही कहने की
तुम भी दिल की कर सकती हो,
तुम भी दिल खोल कर रह सकती हो।
माँ बस करो , खुलकर जियो
भगवान नहीं हो,जो सही रहो,
हाँ, तुम भी गलत हो सकती हो।

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vani purohit 5 JUL AT 19:26

I had an
addiction
of yours.
It's ended ..

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vani purohit 5 JUL AT 19:24

I had an addiction of yours.
It's ended ..

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vani purohit 27 MAY AT 23:43

#Mother

There would have darkness
If she would not let me born.
And there would have darkness.
If she would not helped me to
survive.

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