Tushar Rastogi   (तुषार रस्तोगी "निर्जन")
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Joined 28 December 2016


Joined 28 December 2016
18 JUL 2019 AT 21:32

/ Gharonda / Aashiana

1. आठ अक्षर का मंदिर प्रेम-विश्वास से बना।
2. प्रकृती भी ईश्वर का दिया कुदरती घर है।

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18 JUL 2019 AT 7:18

मर्ज़-ए-इश्क़ में दवा-ए-बाम कौन करे
बढ़ा जो मर्ज़ तो दिल तमाम कौन करे
फ़रमाते हैं इश्क़ में दर्द बहुत है 'निर्जन'
अब अपनी हसरतों को आम कौन करे

مرضِ عشق میں دواِ بام کون کرے
بڑھا جو مرض تو دل تمام کون کرے
فرماتے ہیں عشق میں درد بہت ہے 'نرجن'
اب اپنی حسرتوں کو عام کون کرے

Marz-e-ishq mein dawa-e-baam kaun kare
Badha jo marz to dil tamaam kaun kare
Farmaate hain ishq mein dard bahut hai 'nirjan'
Ab apni hasraton ko aam kaun kare

बाम - औरत / Women

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6 AUG 2018 AT 13:54

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'निर्जन' उनकी याद में हर शब यूँ ढली है
गोया क़ोई शमशीर सी क़ल्ब पर चली है

'نرجن' انکی یاد میں ہر شب یوں دھلی ہے
گویا کوئ شمشیر سی قلب پر چلی ہے

'Nirjan' unki yaad mein har shab yun dhali hai
Goya koi shamsheer si qalb par chali hai

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3 AUG 2018 AT 12:15

है कौन वो जो ख़्वाब में 'निर्जन' के आती है
है कौन वो जो आंख से नींदे चुरा ले जाती है
इस गुस्ताख़ी का कोई सही अंजाम दो उसको
कुछ भी हो दिल को अदा उसकी ही भाती है

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26 JUL 2018 AT 12:55

मुद्दत हुई के मिले नहीं हैं, तुझसे 'निर्जन'
हर पल हो रहा अज़ाब, सज़ा में जीते हैं

Muddat hui ke mile nahi hain, tujhse 'nirjan'
Har pal ho raha azaab, saza mein jeete hain

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26 JUL 2018 AT 9:16

अफ़्शाँ हैं आब-ए-ज़मज़म तेरे अशआर मुरीदों पर 'निर्जन'
महज़ अलफाज़ नहीं सुरूर-आरा बहार-ए-जाँ-फ़ज़ा हैं वो

Afshaan hain aab-e-zamzam tere ashaar mureedon par 'nirjan'
Mahaz alfaaz nahi suroor-ara bahar-e-jaan-faza hain wo

अफ़्शाँ - sprinkle
आब-ए-ज़मज़म - holy water
अशआ'रों - couplets
सुरूर-आरा - intoxicating
बहार-ए-जाँ-फ़ज़ा - life-invigorating spring

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25 JUL 2018 AT 13:03

कौकब-ए-महविश का मुरीद हो गया 'निर्जन'
देखना है ये अंजुमन तुझे कहाँ लेके जाएगी

Kaukab-e-mehwish ka mureed ho gaya 'nirjan'
Dekhna hai ye anjuman tujhe kahan leke jaayegi

کوکب_ مہوش کا مرید ہو گیا "نِدجن"
ديکهنا ہئ یے انجمن تجھے کہان لےکے خایگی

कौकब-ए-महविश - razel-dazel of moon faced
मुरीद - desciple, student
अंजुमन - union

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17 JUL 2018 AT 10:58

मुझ पे सुधरने की यारों, हर अय्यारी मुश्किल है
चांद हो तो बात बने, पर तारों से यारी मुश्किल है
यां रोज़ परिंदा बन, उड़ने को दिल करता है 'निर्जन'
ये जोश, उम्र ये पागलपन, कर दूँ वारी मुश्किल है

Mujh pe sudharne ki, Har ayyaari mushkil hai
Chaand ho to baat bane, Per taaron se yaari mushkil hai
Yaan roz parinda ban, udne ko dil karta hai 'nirjan'
Ye josh, umr ye pagalpan, kar doon vaari mushkil hai

مجھ پے سدھرنے کی یادوں، ہر اییاری مشکیل ہے
جامد ہو تو بات بنے، پر تاروں سے یاری مشکیل ہے
ہاں روڈ پر ہندو بن، اونٹ کو ڈیل کرتا ہے 'نیرخن'
یے خوش، اور یے پاگلتن، کر دوں واری مشکیل ہے

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10 JUL 2018 AT 0:00

उफ़्फ़! तेरे हुस्न की नाज़ुकी* हमदम
गुलिस्ताँ-ए-ग़ुलाब से है क्या कम
गुलिस्तान-ए-आरज़ू* है तू 'निर्जन'
गर है तू पास तो मिट जाते हैं ग़म

नाज़ुकी - delicacy / कोमलता
गुलिस्तान-ए-आरज़ू - yearning / तड़प

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8 JUL 2018 AT 12:46

नूर-ए-इल्म की ताबीर ज़ुबां से होती है 'निर्जन'
ज़ुबां की जुस्तजू मुझ को यहाँ पर खींच लाई है

Noor-e-Ilm ki taabir zubaan se hoti hai 'nirjan'
Zubaan ki justajoo mujh ko yahan par kheench laayi hai

Noor - Radiance
Ilm - Knowledge
Taabir - Interpretation (of dreams)
Zabaan - Language
Justajoo - Longing

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