Tulika Srivastava   (तूलिका श्रीवास्तव "मनु")
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जब भी कोई बात मेरे मन मस्तिष्क को परेशान कर जाती है, तो मैं लिखने के लिए विवश हो जाती हूँ।
Joined 10 October 2020


जब भी कोई बात मेरे मन मस्तिष्क को परेशान कर जाती है, तो मैं लिखने के लिए विवश हो जाती हूँ।
Joined 10 October 2020
16 JUL AT 11:29

उजाड़ दिया ख़्वाहिशों ने तेरी, मेरे ख़्वाबों का चमन
सवारूँ भी तो कैसे अब, इन टूटे दरख़्तों से

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22 JUN AT 12:53

~ जीवन मूल्य संजो कर रखो ~

भौतिकतावादी है दलदल, जीवन सरल बना कर रखो
फिसलो न झूठ - फ़रेब में, यथार्थ को पकड़ कर रखो
जीवन मूल्य संजो कर रखो...

चकाचौंध करेगी आकर्षित, फ़र्क अच्छे - बुरे का रखो
कदम चुनें सही राह हमेशा, परख सही - गलत की रखो
जीवन मूल्य संजो कर रखो...

कर अनुसरण आदर्शों का, न डिगो सिद्धान्तों से अपने
दामन थाम संस्कारों का, मजबूत अपनी धरोहर रखो
जीवन मूल्य संजो कर रखो....

निष्प्राण है देह जैसे आत्मा बिन, मूल्यों बिन जीवन अस्तित्व नहीं
अडिग रह जीवन मूल्यों पर, सर्वश्रेष्ठ मानव योनि को रखो
जीवन मूल्य संजो कर रखो....

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12 JUN AT 21:07

रूप नया धरकर, ऐ परेशानी क्यों तू
मुझसे यूँ मिलने, हर बार चली आती है
आती है करने तू कमजोर मुझे
मगर अनजाने में न जाने कैसे
एहसास हिम्मती होने का मेरे
गहरा, और गहरा कर जाती है

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10 JUN AT 0:45

~ सच कहना ~

हर एक चुनौती को ज़िन्दगी की
देते हो शिकस्त और आगे बढ़ जाते हो
न करते हो शिकायत किसी से
ज़िन्दगी को हँसकर फिर गले लगाते हो
सच कहना इन दर्द और मायूसियों को
तुम मुस्कुराहट में अपनी कैसे छुपाते हो

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7 JUN AT 13:58

जिन गलतियों को तुम अपनी
करते रहे हमेशा साबित सही
किया गर हमने भी वैसा ही
तो तुमसे न सहा, न देखा जाएगा
गुज़रोगे उस दर्द से जब तुम भी कभी
गलत सही का फ़र्क बख़ूबी तुम्हें
अपने आप समझ आ जायेगा

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14 MAY AT 15:17

आँखे बंद कर याद करते हैं बस
बीते वक़्त को फिर से जी आते हैं
कुछ लम्हे लाते हैं चेहरे पे हँसी
कुछ दिल में एक कसक छोड़ जाते हैं
देते हैं फिर भी ज़िंदगी को मक़सद
वो खूबसूरत से दिन जब याद आतें हैं

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6 MAY AT 0:11

कैसा रुदन, कैसा क्रंदन, कैसा मचा ये हाहाकार
एक एक सांस की भीख मांग रहा, इंसान है कितना बेबस लाचार
अपने ही घबरा रहे हैं अपनों से, समय की है ये कैसी मार
न सोचा था देखेंगे ऐसा मंज़र कभी, बस ख़ौफ़ तले रहेगा संसार
माना कठिन है दौर बहुत, छाया हर ओर है घना अंधकार
विश्वास से होगा रोशन जग, आज़ाद सुबह फिर से करेगी
बेख़ौफ़ नव ऊर्जा का संचार

चलो लेते हैं प्रण ये मिलकर, समय का पहिया उल्टा घुमाएंगे
न डरेंगे, न डरने देंगे किसी को, कंधो से कंधा मिलायेंगे
एकजुट हो जीतेंगे ये जंग, मौत को बार-बार हरायेंगे
सावधानियों का रखेंगे ध्यान, और मिलकर आगे आयेंगे
एक दूसरे की हिम्मत बन, इस निर्दयी कोरोना को भगायेंगे
अब भी नहीं तो कब हम, मानवता का धर्म निभायेंगे
सफल होगा हमारा ये जीवन तभी
गर किसी एक के भी काम हम आयेंगे
गर किसी एक के भी काम हम आयेंगे

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24 MAR AT 1:58

----- मेरा प्यारा घर -----

सपने जो देखे थे हमने कभी, हर कोने से ताकते झाँकते हैं
यादों की परतों में छिपे वादे, अधूरेपन के एहसास से जागते हैं
स्मृति के धरातल पे बिछे, कुछ अच्छे तो कुछ बुरे बिछौने हैं
हिम्मत को अपनी ताकत बना
गिरके भी हर बार संभलने के, अनगिनत किस्से सलोने हैं
दिल में कसक, चुभन है तीखी, थाह दर्द की पाना मुश्किल है
कहना चाहता है दिल बहुत कुछ, बयाँ शब्दों में करना कहाँ मुमकिन है
सोचा न था उम्र के इस पड़ाव पे, एक नए सफर की शुरुआत करेंगे
बनायेंगे हक़ीकत को यादें कभी, भीड़ में गुम होने का रास्ता चुनेंगे
चुनौतियाँ दी हैं ज़िन्दगी ने बहुत, इस चुनौती को हम ख़ुद ही चुनेंगे
समय आ ही गया अब तो, अलविदा अब तुझे कहेंगे
आँखों में भर के आसूँ, तुझसे हमेशा के लिये बिछड़ेंगे
नई जगह, नई शुरुआत करेंगे, फिर से कहीं नए सपने बुनेंगे
तुझको फिर भी अपना कहेंगे, तेरे हर कोने में सदा ज़िंदा रहेंगे
सोचा न था कभी भी हमने, कि हालात कुछ ऐसे बदलेंगे
कभी तुझको छोड़कर जाने का, इतना बड़ा ये फ़ैसला करेंगे

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16 MAR AT 3:04

बस आना ही था मुझे यहाँ तक
इस ज़िद में नहीं आयी मैं दूर इतनी
फ़ासला ये लंबा अब तक
तय किया है इसलिए मैंने
हर हाल में पाउँगी मंज़िल मैं
चाहे हो रास्ता कठिन आगे जितना भी

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11 MAR AT 14:43

खूबसूरत ख़्वाब सी एक शाम के नाम
लिखा था हमने अफ़साना दिल का
खालीपन था कुछ इस कदर मगर
कि आवाज़ ही न मिली अल्फाज़ो को

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