Thufayal Ahmed   (soul_in_pen)
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I m-
Simple as water
Dimple in cheek
Try to understand
Word of my lips.
Joined 7 July 2017


I m-
Simple as water
Dimple in cheek
Try to understand
Word of my lips.
Joined 7 July 2017
Thufayal Ahmed 17 MAR AT 21:29

वह कौन थी?

वह थी,, तरह बेहती हवा सा
जो थी,, सहारा मेरी दावा का।
में था,, बेसहारा आंधी हवा सा
वह थी,, बहारा मेरी जलवा का।

वहीं हैं,, जिस से थी मेरी आशिक़ी
रिश्ता था,, उसी से मेरी बारीकी।
वहीं हैं,, जिस से थी मेरी मोसिकी
रिश्ता था,, उसी से मेरी नजदीकी।

वह थी,, मेरी चांदनी
अंधेरी रातों का चमकदार थी।
वह थी,, मेरी तारिकी
अनजानी राहों का रहबर थी।

कैसे में बयान करो?
वह थी, मेरा सबसे प्यारा।
कैसे में इजहार करो?
चुड़ दो उसी के लिए, यह जमाना सारा।

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Thufayal Ahmed 16 MAR AT 15:08

यह रातें भी, किया हसीन थी,
और बातें भी उनकी, किया ही नशीली थी।
डूब तो गए हम, इन रातों की मोज-मस्ती में,
खो तो गए हम, उनकी प्यारी सी एहसासों में।
फिर अचानक लगा, बढ़ी जुरदार बारिश आयी,
बादल नहीं था, पर सब बेह गई।
आंख खुला, आंसू नीकला,
किया बोलो यारों, यह तो सपना था।

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Thufayal Ahmed 15 MAR AT 14:08

खो गए हो, आप कहां
बस, इन पलकों से, जरा दूर होके,
तरस रहे हैं, यह नैन हमारे
बस, ऐक बार, आपकी दीदार के लिए।

काश! वह पल, फिर आता
जिसमे,
आप नहीं तो आपकी परछाई साथ थी,,
नहीं तरसता यह नैन हमारे
बस, आपसे रुबरु होने के लिए।

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Thufayal Ahmed 14 MAR AT 13:03

ज़िन्दगी का खेल भी किया खेल हैं
यारों

ना तो वह, आराम से जीने देता हैं।
और
ना तो वह, जीने के लिए आराम देता हैं।

बस हर वक़्त वह-
कोई ना कोई कहानी
अपने आप ही बुन लेता हैं।

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Thufayal Ahmed 12 MAR AT 14:50

शायरी नहीं है यह, यह तो दिल की आवाज़ हैं,
सियाहि मत समझ तू, यह तो मेरी जाजबात हैं।

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Thufayal Ahmed 12 MAR AT 14:31

May be it's loneliness, I find it amazing.

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Thufayal Ahmed 12 MAR AT 14:13

जान रह के भी, मुर्दा जैसे
पानी की तरह पढ़ा हूं में।

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#YourQuoteAndMine
Collaborating with Shruti Dangwal

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Thufayal Ahmed 12 MAR AT 13:55

कर रहा हूं इंतज़ार, अभी तक!
तेरी उन गलियों में,
जिनमें, हम तुम्हे कभी देखा करते थे।

हो गए हैं अरसा, तुमसे जुदाई का,
फिर भी! ना जाने क्यों?
तरसता हैं, यह पागल दिल
तुमसे मिलने का।

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Thufayal Ahmed 10 MAR AT 12:27

KIA USUL HAIN YAARON,
IS DUNIA KA.

JISE, AAJ HUM
RANGON KA TAWHAAR KEH RAHE HAIN,,,
USE, KAAL HUM
FAKIRON KA DAAG KAHENGE...

MUH MODH LETE HAIN NAZRON KE SAMNE
AGAR KISI PE KOI DAAG AA JAYE TO,,,
PHIR BHI,
PAISON KE KHATIR KUCH KAHTE HAIN
DAAG AACHE HOTE HAIN...

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Thufayal Ahmed 9 MAR AT 9:55

रिश्ता तो उनसे था हमारा,
दिल का
चाहत भी था हमारा,
ऐक जुनोनियात सा

बस, ऐक पल ही सही
काश, हम उनके साथी बन जाते!

तो वहीं पल हमारे लिए,
पूरी ज़िन्दगी था।

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