Tanu Srivastava   (Tanu Srivastava "सखी")
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Joined 5 April 2017


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Joined 5 April 2017
20 JUN AT 17:33

दुनिया-दारी निभाने की मिली ये सज़ा है
चेहरा है मेरा ख़ाली और दिल भरा है !!

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19 JUN AT 18:41

रास्ता भी मैं, मंज़िल भी मैं
मुसाफ़िर है मेरी तन्हाई
मैं ही हूं रात, सुबह भी मैं
है चार पहर मेरी धुंधलाई !!

धर्म भी मैं हूं, कर्म भी मैं
ज़रिया हैं मेरे रोटी- ईसाई
दीन भी मैं हूं, दाता भी मैं
एक तमाशा है मेरी कमाई !

ठेस भी मैं हूं, हर्ष भी मैं
मेरा अहं है मेरी लड़ाई
तट भी मैं हूं ,‌ तल भी मैं
खोखला भ्रम है मेरी ऊंचाई !!

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19 NOV 2019 AT 15:26

दो ख़ूबसूरत लोग
एक हसीन रास्ता
गठबंधन की डोरी
जन्मों का वास्ता

तकरार की धूप
मोहब्बत की छाँव
इज़्ज़त की रौशनी
दोस्ती का गाँव

उम्मीदों के मोती
विश्वास का धागा
ख़ुशी हो या ग़म
हिस्सा आधा-आधा

शक्ति का है पूरक शिव
शिव की पूरक है शक्ति
मैं-तुम सदा हम ही रहें
जब तक रहे सकल ये सृष्टि !! Tanu Srivastava "सखी"






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18 NOV 2019 AT 1:25

समझ नहीं आता
बेबस कहूं
या कहूं नासमझ
आलसी कहूं इन्हें
कि कहूं
नाका़बिल मौकापरस्त
ना जाने क्यों
उड़ती हैं
लड़ती हैं
और कटती हैं
ग़ैर के इशारे पर
पतंगें !!


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17 NOV 2019 AT 1:04

मेरे हद की तेरे हद की
एक दिन एक ही हद होगी
एक पाले में होगी दुनिया
एक में चाहत बेहद होगी !

अपने पाले में हम और तुम
वक़्त में ख़ुद को बोएंगे
फिर काटेंगे हम वक़्त से ख़ुदको
जब कभी तन्हा-तन्हा होएंगे !

अपनी हद के चप्पे-चप्पे पर
मैं-तुम, तुम-मैं बस तुम-मैं होंगे
जब नहीं रहेंगे मैं-तुम एक दिन
तब इस हद में नये दो चेहरे होंगे !!

Tanu Srivastava "सखी"



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16 NOV 2019 AT 4:36

कभी करना तुम बादल के टुकड़े
बदले में पाओगे‌ बादल ही उसके
तुम देखना कभी बांटके धरती
होगी हिस्से में फिर से एक धरती
पानी को भी करना अलग-थलग तुम
हर बूंद में पाओगे गुण पानी का ही तुम
चीर के हवा को भी तुम कभी गुज़रना
हर सांस पे मिलेगा तुम्हें उसी हवा का पहरा
फिर एक रोज़
काट के देखना इंसान को तुम
और आएगी हाथ में तुम्हारे
बस एक लाश
एक बेकार लाश !! Tanu Srivastava "सखी"



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16 NOV 2019 AT 0:13

धूर्तता का शुगर ग्रुप
निष्ठुरता का एडेनिन
लालच का थाइमिन
ख़ुद-ग़रज़ी का साइटोसिन
झूठ-फ़रेब का ग्वानिन
नफ़रत का फोसफेट ग्रुप
मतलब ?
मतलब है .....
" नेताजी का डीएनए " !!

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14 NOV 2019 AT 16:09

मन की बोरी
सपनों की चवन्नी
बैंक सी दुनिया
हुई बेदम चवन्नी !
चिंगारी से लम्हें
बूंद सी हिम्मत
ज़ोर की टक्कर
धुंधला धुआं चवन्नी !
गहरा काला सा डर
उजली खोखली सी भीड़
पहली ही मुलाक़ात
घुटके मरी चवन्नी !! Tanu Srivastava "सखी"





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13 NOV 2019 AT 16:29

!! आख़िर कब तक ? !!
बड़ी देर से मेरी दिखावटी ख़ामोशी पर मेरे अंदर का बेज़बान शोर चोट कर रहा था और मैं बड़ी ही बेपरवाही से उस चोट से बह रहे ख़ून को अपनी आंखों का सहारा दे रही थी पर आख़िर कब तक ? कब तक बर्दाश्त करती मैं ? फिसल ही गये मेरे पांव बर्दाश्त की लकीर से आगे और तपाक से उठकर काट दी नसें मैंने तुम्हारे दिये हुए प्रेम पत्रों की और आज़ाद कर दिए वो सारे रंग जो तुमने भरे थे कभी मेरी ज़िन्दगी में पर तुम्हारे दिये हुए ज़ख़्मों का ज़ख़ीरा बहुत पुराना था इतने में कहां ख़ाली होता सो जला दिया उन‌ प्रेम पत्रों की बेजान लाशों को भी जो अभी भी तुम्हारे प्यार की खुशबू को समेटे हुए थे और अब आज़ाद हैं सारी खुशबुएं , सारे रंग और आज़ाद हूं मैं और मेरे अंदर का शोर !!

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13 NOV 2019 AT 0:06

उसने आख़िरी बार जाते हुए कहा था मुझसे " अब तुम आज़ाद हो इस रिश्ते से ! " और मैं मुस्कुरा कर बस इतना ही कह सकी थी " वक्त के साथ काग़ज़ पर उकेरे हुए शब्द तो मिटा सकती हूं मैं पर स्याही के दाग़ ? उन्हें कैसे मिटाऊं वो तो काग़ज़ के मिटने के बाद ही जाते हैं ना ! "

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