QUOTES ON #राजनीति

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#राजनीति quotes

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Ashish Awasthi 11 JUL 2017 AT 19:44

खद्दर ने फिर से कोई खेल खेला है
आज फिर से ख़ाकी लाल हुई है ।।

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दीप शिखा 21 FEB AT 8:49

आज फिर हवा का रुख बदलते देखा
आँखो में नया प्रतिशोध पलते देखा,

दबी देखी निशानियाँ हमने अपनों की
बहते आँसुओं से चिंगारी निकलते देखा,

दिल और आग हो गया जब हमने
धुंए में शहर-ओ-शहर मिलते देखा,

कसूर कोई नहीं था मासूमों का लेकिन
बलि आतंकवाद की उनको चढ़ते देखा,

आज फिर उस राख से धुआँ उठता है
खुशियां थी जहां चिताएं भी जलते देखा,

कर लेते हैं लोग मौत पर भी राजनीति
यहां बाद तबाही के हाथ मलते देखा,

वो ज़हर बो रहे हैं और ज़हर ही काटेंगे
देखा जब भी उनको ईमान बदलते देखा !

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Sandeep Vyas 26 MAR AT 9:26

वह
गंगा किनारे
कपड़े धो रही है..

मन ही मन
सफ़ेदपोशों कि
काली करतूतों पर
रो रही है...

वस्त्रों पर साबुन लगाती
पत्थर पर पछीटती
कभी हाथों से मसलती
कभी इकठ्ठा कर घूँसे बरसाती
तो कभी पानी में खंगालती...

नहीं निकाल पा रही है
कपड़ों की धवलता में
छुपी मलिनता को..

सफ़ेदपोशी
भीतर तक काली है..

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Arunish Ankit 10 MAY AT 1:38

उनसे ना पूछिये कि कुर्सी का काम क्या है,
आपको भी जात के गणित में फसायेंगे,
उनसे ना पूछिये कि कुर्ता बेदाग कैसे,
तब सर्फ एक्सेल का गुण गिनवायेंगे।
उनसे ना पूछियेगा भाई-भतीजे का नाम,
बिना बात चार गाली आपको सुनायेंगे।

देश की सुरक्षा हो या चारा जानवर का,
नेताजी हमारे सब कुछ खा जायेंगे,
बड़े बाबू ठोकते हैं ताल नौवीं फेल को,
यही अब देश का विकास करवायेंगे,
नेताजी हमारे बड़े अव्वल व्यापारी हैं,
देखियेगा किसी दिन देश बेच खायेंगे।

मेरे नेताजी के शौक बड़े ही निराले हैं,
बाल कटवाने को विदेश चले जायेंगे,
इतना जो हो-हल्ला मचा रहे बताओ जरा,
बेऔलाद कहाँ से विकास को ले आयेंगे,
गीदड़ सारे बैठकर प्लान हैं बना रहे कि,
कैसे एक शेर को वे मार खा जायेंगे।

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M K Yadav 27 JAN AT 21:29

यहाँ चोरों की सरकार है
वादों में हाहाकार है।

ईमान है ना ज्ञान है
लुभाने में सबका ध्यान है।

तेरी मंजिल का तू ही
राही एक पतवार है।

स्वार्थ की इस बगिया में
झूठों की जय-जयकार है।

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Piyush Sharma 17 NOV 2018 AT 23:45

हमारी ओर से, कोई गवाही नहीं देता
और चिल्लाना भी हमारा, सुनाई नहीं देता
तोड़ मरोड़ कर, संतोष ढूंढ रही है दुनिया
क्या कुछ भी यहां, दिखाई नहीं देता
हालात, बद से, बदतर हो गए
साल, करीब सत्तर हो गए

सुना तो था, अपने हाथों में अपनी तकदीर है
जाने क्यों फिर, पैर थामे, अपनी सी ज़ंजीर है
थाली में अपनी, झांक कर तो देखो
वादों के फाके हैं, आँखों का नीर है
हालात, बद से, बदतर हो गए
साल, करीब सत्तर हो गए

आपस में, लड़ते रहे हम, ज़माने के लिए
वो आए ही कहाँ, कुछ बताने के लिए
कुछ पलों के लिए तो, खुलती है आँखें अपनी
हम जागते भी हैं मगर, फिर सो जाने के लिए
हालात, बद से, बदतर हो गए
साल, करीब सत्तर हो गए

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Gaur Vishakha 6 DEC 2017 AT 18:30

राजनीति से नही, अधिकार से चाहिए
महिलाओं को सिर्फ आपसे सम्मान चाहिए |

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Anjula Singh Bhadauria 8 OCT 2017 AT 14:32

राजनीति एक बिसात है, राजनेता हैं खिलाड़ी,
प्यादा बनाके ज़िन्दगियाँ,शह और मात करा ली|

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M K Yadav 23 JAN AT 14:26

राजनीतिक अखाड़ा

गुजरा वक़्त जो याद करें
सामने रखकर अटल पुराण
सब को पी.म. गद्दी चाहिए
कैसे हो इनका कल्याण।।

ये स्वार्थ के भरे घड़े है
मतलब लेके साथ खड़े है
नहीं किसी का स्वच्छ ईमान
कैसे होगा जग निर्माण ।।

गुजरा वक़्त जो याद करें
सामने रखकर अटल पुराण।

कोई घमण्ड में चूर है
कर्म से वो भी मज़बूर है
दुश्मन मेरे राख़ समान
मैं अकेला इतना बलवान।।

सब को पी.म. गद्दी चाहिए
कैसे हो इनका कल्याण।।

भूली ग़लती आज सुधारे
चुनाव करेंगे किसान हमारे
प्रलोभन का ना कोई मान
धर्म-जात से बढ़कर ज्ञान

गुजरा वक़्त जो याद करें
सामने रखकर अटल पुराण
सब को पी.म. गद्दी चाहिए
कैसे हो इनका कल्याण।।

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Divya P.S. Rawat 7 JUL 2018 AT 7:47


नीली स्याही भी कभी हरा, कभी भगवा रंग बदलती है,
राजनीति के बाज़ार में, हर मज़हब की कलम बिकती है...

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