QUOTES ON #चुनाव

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#चुनाव quotes

Trending | Latest
Ankita Maran 24 NOV 2018 AT 21:34

हर गरीब की थाली में खाना है,

अरे हाँ ! लगता है यह चुनाव का आना है।।

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Sandeep Vyas 28 OCT 2018 AT 14:12

द्रौपदी

(अनुशीर्षक में)

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Balwantraj Mehta 23 NOV 2018 AT 23:32

अमर्यादित टिप्पणी से क्यों‌
करते है सियासत
करें आलोचना जमकर
रखकर जरा शराफत
पहले भी हो चुकी है
बिन रेझर के‌ हजामत
मुश्किल है चुनावी रणभेरी में
देना कोई नसीहत

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M K Yadav 11 MAR AT 9:18

(गद्दी कौन पाएगा)

चुनावों का ये दौर
वादों में निकल जाएगा
झूठी चाल से छलकर नेता
सत्ता का मज्जा पाएगा।

आस और विश्वास की
इस बुनियादी जंग में
कही बोलकर कभी तोलकर
इंसानी धज्जियां कोई उड़ाएगा।

झूठी चाल से छलकर नेता
सत्ता का मज्जा पाएगा।

धरातल पे भूखा मरने वाला
चाहे भूखा ही मर जाएगा
राजनीतिक ये खेल है ऐसा
जहाँ कागज़ सच्चाई दोहराएगा

झूठी चाल से छलकर नेता
सत्ता का मज्जा पाएगा।

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Munish K Attri 8 APR AT 18:47

देशभक्ति में मिलावट सियासत की बढ़ी है
सियासत  वालो को  सियासत  की पड़ी है

गिराने में लगे हैं सब एक दूसरे को यहाँ
देश की राजनीति किस मोड़ पर खड़ी है

ऐलान-ए-चुनाव  क्या  हुआ  यहाँ
सरहद पर देखो गतिविधियां बढ़ी है

शहरों से उठ रही युद्ध की आवाज़ों से
सरहद  पर  गांवों में  बेचैनियां  बढ़ी है

नेता सब  के सब हमारे , है दूध के धुले
वोट किसको डालू,सोच सोच में पड़ी है

"नेता जी" सा नेता मिलेगा इस देश को एक दिन
माँ भारती के चरणों में मेरी दुआएं पड़ी है ।

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Vihaan 29 MAR 2018 AT 14:07

प्राइवेसी से परीक्षा तक, यहाँ सबकुछ लीक है।
आप चुनाव जीत रहे न? फिर सबकुछ ठीक है।

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Ujjwal Utsahi 9 MAY AT 21:02

हर तरफ शोर है बज रहा नगाड़ा
इंग्लिश बोलने वाले बाबू पढ़ रहे पहाड़ा
ये चुनाव का भी अजब रंग है साहब
नोट खाने वाले मुँह खा रहे सिंघाड़ा

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179 likes · 52 comments · 31 shares

मैं लोगों की कहानी लिखता हूँ
जानी और पहचानी लिखता हूँ

बात उनकी खुश़ियों की हो अगर
तो आग को मैं पानी लिखता हूँ

लोग मिलते हैं बिछड़ जाते हैं
उन्ही की यादें पुरानी लिखता हूँ

इश़्क करके जो छोड़ दे अगर
ऐसे लोगों की नाकामी लिखता हूँ

जनता तो हमेश़ा से ही जनार्दन है
सबकी चुनी हुई निश़ानी लिखता हूँ

"कोरा कागज़" ही तो हूँ नाम का
कलम को इक दीवानी लिखता हूँ।

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Anu Chhangani 8 DEC 2018 AT 12:06

भरें हो पेट तो हो-ह्ल्लें का नुकसान लगाया जाता है,
भीड़ में दिखता वो मलंग तो दो निवालों को जाता है ।।

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Sandhya 12 JAN AT 22:05

शब्दों का मायाजाल है चुनाव,
जो चल रहा है शहर - शहर गाँव गाँव।

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