स्वतन्त्र यादव   (स्वतन्त्र यादव)
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🙏महादेव सर्वोपरि महादेव श्रेष्ठ 🙏
Joined 23 December 2020


🙏महादेव सर्वोपरि महादेव श्रेष्ठ 🙏
Joined 23 December 2020

वो कमरे में बैठा आग सुलगाता था लफ़्ज़ों से
बाहर किसी का दम घुट गया,किसी का जिस्म जल गया
इसलिए कलम हर लम्हा गवाही देगी स्वतन्त्र
जो भी लिख ईमान से लिख इत्मीनान से लिख

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कलम ने बगावत कर दी है
उंगुलियों में कैद नहीं रहेगी,

स्याही का भी इश्क टूट चुका है
बन्द बोतलों में नहीं रहेगी,

लिख कैसे दूँ इंकलाब कागज़ पर ...!!!
स्याही की जिद है ,वो अब कलम की रगों में नहीं बहेगी,

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चिंता इतनी कीजिए की काम हो जाए,
पर इतनी नही की जिंदगी तमाम हो जाए,
मालूम सबको है कि जिंदगी बेहाल है,
लोग फिर भी पूछते हैं और सुनाओ क्या हाल है!

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पाँव में बांध ली है आवारगी
है मंज़िल-ए-सफ़र की तलाश

तज रहे हैं ज़माना जिसके लिए
है रूह के हमसफ़र की तलाश

कोई क्या मदद कर पायेगा
अब सहन नहीं ये अंदर की तलाश

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झुमके से कह दो
गालों को चूमना छोड़ दे


इश्क रुसवा हुआ
तो कत्ल हजार होंगे ... 💞💞

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दान नहीं, दानी का हृदय देखिये, कंकड़ नहीं, कंकड़ उठा कर सेतु में लगाने वाली गिलहरी की श्रद्धा देखिए

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तेरे मिजाज के तरीके से परेशान हूँ.
नहीं तो मैं भी एक अदद इंसान हूँ..












तूने कब समझी ज़हनी हालत मेरी
न तू देवी न मैं भगवान हूँ.!

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चारों तरफ जय माता दी जय माता दी छाई है..
फिर ये वृद्धआश्रमों मे किसकी मां आई है !!

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अभी कोरोना चल रहा है ...!

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औरत को अगर हवस की निगाह से ना देखा जाए
तो उससे अच्छा दोस्त कोई नहीं हो सकता..
और
मर्द चाहे कितनी ही तीखी मिर्च क्यों ना हो
उसका आचार औरत ही डालती है...!

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