suramya shubham   (Sur)
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Joined 13 April 2018


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Joined 13 April 2018
suramya shubham 6 HOURS AGO

सुनो,
तुम मुझे कभी ख़ास ना करना
मैं तुम्हारे लिए बेहद आम होना चाहती हूँ
हाँ... बेहद आम
जैसे कि तुम्हारी अनायास सी कोई आदत
या फिर कोई बेहद मामूली सी जरूरत
जिसे जरूरी काम की गिनती में न रखो तुम
इतनी आम...
जैसे तुम्हारा वो बेखयाली में
पैर हिलाने लगना
या फिर बार बार बालों को संभालना
या वो अपने तक खुद को महदूद रखना
हाँ... यहीं...
बेहद आम...
साँस लेने जितना आम...
तुम मुझें कभी ख़ास न करना...

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suramya shubham YESTERDAY AT 14:53

उसने मोहब्बत की
और उसे हो गई...
अब जंग-ए-ऐलान करने और होने में है...

एक नज़र में भरता है
और एक नजर में रहता है...
अब जंग-ए-ऐलान भरने और रहने में है...

एक डर से आज़ाद डराता रहता है
एक कयामत में कैद डरता रहता है
अब जंग-ए-ऐलान डराने और डरने में है...

इंतेज़ार और मुहब्बत में तनी है
देखते है जंग कितनी "लाल" होनी है....

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suramya shubham YESTERDAY AT 13:45

रात के अंतिम पहर में
आँखें मूंदे
किसी सपने की गोद में
जुगनुओं की मद्धम रोशनी तले
हवाओं के साये साये संग
गिलहरी सी चंचल
एक मखमली याद आई थी
चुपके से,
हौले से,
नाजुक सी,
दो चोर निगाहों ने
इस बेतरतीबी में ही
चूम लिया था उसे
उसके हाथों में कसे
डायरी के पन्ने
फड़फड़ा उठे थे
और उन चंद क्षणों ने
लिख दी थी
ना जाने कितनी ही
"वो एक कविता"...

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suramya shubham YESTERDAY AT 16:03

इक इंतज़ार मसला था
आंखों में उसके ऐसे...
मानो एक,
कत्थई से गुलाब ने
झुक कर उसकी
सुर्खी चूम ली हो...

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suramya shubham 13 OCT AT 9:51

नींद की सिलवटों में इतनी गिरहें हैं,
समंदर के भँवर को भी जो उलझन हो जाएं...

आँखें मूंदूँ भी तो किस पहर को अब,
हर एक गली तुझसे होकर जो गुजर जाएं...

उंगलियों को उलझने की आदतसी हो गई है,
निढाली ओढूं तो बेफिकरी किस करवट जाएं...

नया नया शौक़ लगा है शायद तुझें भी "सुर",
पलकें बिछा ले, एक क़िस्त शायद अदा हो जाएं..

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suramya shubham 13 OCT AT 0:33

लम्हें जा ढले हैं काँधे पर तेरे,
माथे से छू लूँ तो वक़्त गुजरे...

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suramya shubham 12 OCT AT 10:50

तेरे कान के पीछे से सरकती मेरी उंगलियाँ
कुछ यूँ भी तो धड़कने ख़ामोश होती हैं...

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suramya shubham 11 OCT AT 23:19

"किरदार" बहुत होते है आदमी के आजकल
किरायेदार भी बहुत होने लगे हैं "घरों" में...

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suramya shubham 11 OCT AT 20:15

वो खोया नहीं था... बदला था...
वो लापता नहीं थी...बेघर थी...

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suramya shubham 11 OCT AT 18:18

इन आँखों की मासूमियत तो देखो
उसे मूंद , उसे ही ढूंढ़ती रहती है...

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