Sunhari Kalam   (K@pil)
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Joined 9 May 2019


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14 JUL AT 19:43

मुकद्दर से कह दो अकेला नहीं हूँ मैं
दुआओं का काफ़िला मेरे साथ चलता है

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27 JAN AT 16:47

अक़्सर सबको दिलासा देने वाला
खुद के दुखों में अकेला होता है

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27 AUG 2021 AT 15:00

ले कर गया था हज़ारों अरमां
मैं सब उसी अस्पताल में फेंककर लौट आया
सोचा था देख के उसे गले लगा लूँगा
उसका दिल राज़ी न लगा तो .......
सिर्फ़ उसकी नब्ज़ देखकर लौट आया

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20 FEB 2021 AT 8:54

मिलते रहा करो कुछ दिनों में
नहीं तो एक दिन मेरी परछाई भी नहीं नज़र आएगी
जो मेरे चाहने वाले होंगें वो तो रो रहें होंगे
तुम तक सिर्फ़ मेरे मरने की ख़बर आएगी

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25 JAN 2021 AT 21:22

आज क़रीब से देखा अपनी मोहब्बत को
एक बात तो तय हो गई
मोहब्बत शक़्ल देखकर नहीं होती

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5 JAN 2021 AT 12:53

कभी ख़ुद मुलाकात करके देखो
मैं जैसा बताया जाता हूँ उससे बेहतर हूँ

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19 DEC 2020 AT 10:55

दिल अभी भी मचल उठता है
एक दिन सब भुलाने आ जाओ
नींद आँखों से अब उड़ गयी है
एक दिन मुझे गहरी नींद सुलाने आ जाओ
हमसफ़र तो बन कर आओगी नहीं तुम
किसी और से ही मिलने के बहाने आ जाओ

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2 DEC 2020 AT 20:01

सबकी असलियत से वाकिफ हूँ मैं
ख़ामोश ही तो हूँ
अंधा तो नहीं

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5 NOV 2020 AT 16:59

मोहब्बत का सफ़र तो और भी सुहाना होता
गर मेरा महबूब भी चाय का दीवाना होता

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29 SEP 2020 AT 20:32

अग़र सड़कें ख़ामोश हो गयी..
तो संसद आवारा हो जाएगी ||

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