SIMRAN RAJ   (SIMRAN RAJ)
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डर को डराओ
हार को हराओ
मतलब को मिटाओ
खुद को अपनाओ
Joined 6 August 2018


डर को डराओ
हार को हराओ
मतलब को मिटाओ
खुद को अपनाओ
Joined 6 August 2018
SIMRAN RAJ 11 FEB AT 22:34

ठीक वही चेहरा
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वही इकलौता सवाल
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वही अनूठी जल्दबाजी
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वही अंदाज़-ए-नज़रअंदाज़
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वही पुरानी एकमात्र 'सांत्वना'
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और अंततः वही इक उम्मीद...
.
.
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आज फिर से 'चकोर' की मुलाक़ात "चाँद" से हुई...

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SIMRAN RAJ 3 FEB AT 1:21

... सुनो!
(👉Read in Caption)

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SIMRAN RAJ 1 FEB AT 0:06

जो शख़्स जितना ही क़रीब होता है न इस दिल के
उतना ही हम उसे 'दूर' करने की कोशिश करते हैं

सुना है ! "प्यार" में कोई भी कुछ भी कर सकता है
'दीवाना' समझ उसे मजबूर करने की साजिश करते हैं

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SIMRAN RAJ 30 JAN AT 1:17

जब ऊब जाती हूँ इन झूठे - फ़रेबी रिश्तों से
तब मुझे "इक शख़्स" की बहुत याद आती है

अपना पिता कहूँ या कह दूँ ' परमात्मा ' उसे
फिर से वही "निशी" बनने की मुराद आती है

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SIMRAN RAJ 30 JAN AT 0:40

याद है , कैसे पहले सच में " खुश होते थें "

और अब " हाँ...खुश हैं " ऐसा बस दिखाते हैं

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SIMRAN RAJ 24 JAN AT 23:02

इक 'मासूम परिंदे' की ज़िंदगी बर्बाद कर रहे हैं हम
ना चाहते हुए भी उसे घर से आज़ाद कर रहे हैं हम
खूब सताया ... न जाने कितनी बार उसे रूलाया मैंने
अब छोड़कर तन्हा उसे, देखो! आबाद कर रहे हैं हम

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SIMRAN RAJ 23 JAN AT 22:26

आँखें इक शाइर की हो या हो किसी पत्थर दिल की
यूँ बहता उसका आँसू कभी 'ठोस' नहीं हो सकता
जो होते हैं बड़े शौक़ से देश के खातिर कुर्बान
वैसे औलाद पर माँ - बाप को अफ़सोस नहीं हो सकता
ओढ़कर सियासत को नेता तो सभी कहलाते हैं
पर कोई और "नेताजी सुभाषचंद्र बोस" नहीं हो सकता

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SIMRAN RAJ 16 JAN AT 0:00

समंदर-सा हुआ करता था कभी उसका भी 'दिल'
ना जाने क्यूँ - कब - कैसे रेगिस्तान बन गया
दफ़्न होती हैं हर रोज 'यादें' पन्नों पर यहाँ
डायरी जो दी थी उसने , क़ब्रिस्तान बन गया

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SIMRAN RAJ 14 JAN AT 23:03

तुम और तुम्हारी यादों में
फ़र्क बस इतना ही है कि
.
.
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तुम मुझे बेबाक हँसाया करते थे...
और तुम्हारी यादें रूलाया करती हैं

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SIMRAN RAJ 12 JAN AT 13:48

मिसरा जो झलकता है एक 'शाइर' की आँखों से
तवज्जोह दें , महज़ वो कलम-बंद नहीं होता
चाहे कितना भी अफ़वाह उड़ा लें लोग यहाँ
मगर किसानों जैसा कोई हुनर-बंद नहीं होता
और बुद्धि-विवेक तो सबको मिला है खुदा से
लेकिन हर शख़्श यहाँ "विवेकानंद" नहीं होता

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