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Shubhanshu Chauhan (Mr. Vegan Shubhanshu SC 2019©)

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Shubhanshu Chauhan AN HOUR AGO

तुम दुनिया से लड़ कर थक जाओगी और उम्र निकल जाएगी। जीवन बस एक है, अभी है, इसे मस्ती में न जिया तो फिर मृत्यु तो आनी ही है। जीवन बेकार न जाने दो। आनन्द में डूब जाओ। इसी की चाहत थी, इसी की चाहत है, यही लक्ष्य है।

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लक्ष्य

#yqhindi #yqdidi #inspiration

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Shubhanshu Chauhan 21 FEB AT 6:27

जैसे

कुछ पा लेना।

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Shubhanshu Chauhan 21 FEB AT 6:06

जेब की बातें मीठी हो गईं।
सब को कुछ न कुछ गम है।
मेरा भी गम कौन सा कम है?
दिल की बातें कौन सुने?
दिल की बातें सीठी हो गईं।
हम अकेले ही बुदबुदाते हैं,
सब पे समय बड़ा कम है।

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Shubhanshu Chauhan 21 FEB AT 5:57

क्या मुझको रुला दोगे?
ये गुलाब, ये चेन, ये ग्रीटिंग,
रखा है तेरी खुशबू लिए।
जाना ही है तो रोकूँगा नहीं,
मैं नहीं भूल सकता तुझे पर,
क्या सच में मुझे भुला दोगे?

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Shubhanshu Chauhan 21 FEB AT 5:39

अब बस मकान ही बाकी हैं।
क्या ज़िन्दगी की दौड़ में,
आगे निकलने के चक्कर में,
कहीं हम अपना घर पीछे,
तो नहीं छोड़ आये?
दूसरे से आगे आ गए,
ज़िंदगी भी कट गई,
पर वह अपनापन हम
न जाने किधर छोड़ आये?

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Shubhanshu Chauhan 18 FEB AT 19:40

इतने तारों में सिर्फ चांद ही तो बड़ा दिखता है।
तमाशबीन बन के भला किसी को क्या फायदा?
तमाशा करने वाले का ही तो कद बड़ा दिखता है।
यूं तो भीड़ भी कर सकती है बहुत कुछ, लाजवाब,
पर क्या करे, ये कोई आगे वाला ही बता सकता है।

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Shubhanshu Chauhan 18 FEB AT 19:27

और ले लो इस कठोर जीवन की सारी बलायें।
काश वो तेरी गोदी का बचपन फिर लौट आये।

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Shubhanshu Chauhan 18 FEB AT 19:23

मैं मुसाफिर हूँ, धूप में, मंजिल तक जाना है।

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Shubhanshu Chauhan 18 FEB AT 19:01

एक बात समझ लीजिये। ईश्वर कोई शरीर नहीं तो कुछ भी नहीं। बुद्धि हवा में या बिना द्रव्यमान के नहीं हो सकती और उसका अस्तित्व दृश्यमान होना आवश्यक है जो कि ईश्वर की अवधारणा में सम्भव नहीं है।

जिन लोगों को एक तरफ हाड़मांस का दिमाग और दूसरी तरफ कम्प्यूटर का हार्डवेयर दिखता है उनको अगर अदृश्य बुद्धि के होने का विश्वास है तो मुझे उनके हाड़मांस में किसी भारी गड़बड़ी की आशंका नज़र आती है। इनको मानसिक चिकित्सालय में इलाज की सख्त जरूरत है।

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Shubhanshu Chauhan 16 FEB AT 23:54

अपने मुहँ मियां मिट्ठू

हाँ, मैं किसी पर यूं ही भरोसा नहीं करता।
मैं कुछ नहीं हूँ, कुछ होना भी नहीं चाहता।
हाँ, नहीं मानता मैं कुछ भी बिना प्रमाण के।
मैं ऐसा ही था, ऐसा ही हूँ, ऐसा ही रहूँगा।

आत्मविश्वास, ईगो कहो, या फिर घमंड।
झंड हो-हो कर ही करना सीखा हूँ झंड।
नहीं ठग सकता कोई, धोखा देकर मुझे।
जहाँ कोई नहीं देता, मैं ले लेता हूँ रिफंड।

शुरू में, कहीं नहीं पटती मेरी किसी से।
अकेला पड़ जाता हूँ, हर जगह पर मैं।
अपने पर ही अड़ के बचाता हूँ सबको।
हाँ, बन जाता हूँ लीडर, जहाँ जाता हूँ मैं।

हाँ, खुद ही खुद की तारीफ कर रहा हूँ मैं?
बिना खुद की तारीफ के कुछ बिका कभी?
बिना खुद की तारीफ के नेता बना कोई?
बिन परिचय लिये क्या स्वागत करोगे मेरा?

कहना आसान है, करना बहुत मुश्किल।
अंतर्मुखी को समझना तो और मुश्किल।
नहीं मिलता किसी से, रहता हूँ छिप के।
कभी जुड़ता नहीं, हमेशा टूटा है दिल।

कभी धारा के विपरीत चल कर के देखो।
कभी कोई पत्थर इतना ऊंचा भी फेंको।
पता चलेगा, क्या है, इस लड़के का गम।
तुम्हारे लिए जिया ये, जब तक था दम।

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अपने मुहँ मियाँ मिट्ठू

#imotions #poem #poetry #freedom #introvert #pain

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