Shoaib Khan   (Shoaib Firozi)
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Songwriter/Lyricist
Shaair/Poet. Storyteller.
Insta : @iamshoaibfirozi
Joined 19 February 2017


Songwriter/Lyricist
Shaair/Poet. Storyteller.
Insta : @iamshoaibfirozi
Joined 19 February 2017
Shoaib Khan 3 JUN AT 13:58


अगर वो मय पिलाये तो गुनह से भी बचाये वो
कि उस लड़की से कह दो ये कि धोके से पिलाये वो

Agar wo may pilaye to gunah se bhi bachaaye wo
Ki us ladki se kah do ye ki dhoke se pilaaye wo

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Shoaib Khan 29 MAY AT 3:41

तुम सोचते हो उतना भी अच्छा नहीं हूँ मैं
दिल मत लगाना मुझ से किसी का नहीं हूँ मैं

Tum sochte ho utna bhi achha nahi'n hoon main
Dil mat lagaana mujhse kisi ka nahi'n hoon main

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Shoaib Khan 9 MAY AT 22:40

हर किसी को महफ़िल में रुला देता हूँ
जब कहानी ख़ुदकी मैं सुना देता हूँ

ख्वाब से मेरा रिश्ता अभी ऐसा है
सोने से पहले उसको सुला देता हूँ

हाल पर अपने मुझको तरस आता है
जब भिकारी को दर से भगा देता हूँ

ज़िन्दगी जब मुझ को ज़ख्म दे जाती है
फिर ग़ज़ल बनती है, मुस्कुरा देता हूँ

अब ख़ुदा मुझ से नाराज़ ही रहता है
नफ़्स को यानी कितना मज़ा देता हूँ

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Shoaib Khan 15 MAR AT 20:19


ख्वाब से मेरा रिश्ता अभी ऐसा है
सोने से पहले उसको सुला देता हूँ

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Shoaib Khan 14 FEB AT 13:04

ये एक ही सच छुपाया सभी से मैंने
यही कि मैं झूठ बोहोत बोलता हूँ

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Shoaib Khan 31 JAN AT 1:39

बात हो रोज़ तुम से पहले की तरह
है दुआ तुम हमेशा मुश्किल में रहो

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Shoaib Khan 25 JAN AT 22:42

फ़िरक़ा परस्ती तो देखो, ज़कात भी देते हैं फ़िरक़ा देखकर
जुम्मा ब जुम्मा पढ़ते हैं नमाज़, ईमाम का शिजरा देखकर

मैं चाहता हूँ अपने चेहरे पे वैसी खुशी लाना बारहां
जो बाप के रुख़ पे आती है बेटे की पेहली तनख्वा देखकर

नीन्द उसी के जैसी माँगता हूँ मैं खाट पर जब देखूं उसे
वो ख्वाब देखे मेरी ज़िंदगी के, मुझमें नजाने क्या देखकर

वो यारियाँ मेरा कॉलेज मस्का बन चाय पूना की हर गली,
मैं याद करता हूँ सूरत में रोज़ पुतला शिवाजी का देखकर

तुम लौटकर ना आजाना कि इश्क़ होने लगा है तन्हाई से
मैंने गुज़ारी कल वो रात हिज्र की, एक ही तारा देखकर

कमबख्त बेटामेरा सेलफ़ोन में खेलता है दिनभर क्रिकेट
मैं चाहता था वो रोने लगे किसी मेले में बल्ला देखकर

ये एक ही जुमला क्यों है ज़ुबाँपे सबके मेरी बेहन के लिये
रुख़सत इसे करदो जल्दी से अब कोई अच्छा सा लड़का देखकर

मैंने ग़ज़ल में भी देख ऐ ख़ुदा शिर्क वाली बातें न की
ये सर झुका दिल्ली में भी नहीं असद बैग़ का हुजरा देखकर

~ Shoaib Khan












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Shoaib Khan 20 JAN AT 21:18

अब देख शीशा सोचता हूँ
मैं लगता कितने साल का हूँ

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Shoaib Khan 31 DEC 2018 AT 19:21

अगला बरस मेरा होगा देख लेना तुम
पिछले दिसंबर भी हम इसी गुमाँ में थे

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Shoaib Khan 28 DEC 2018 AT 23:07

नींद, ख़्वाब, हक़ीक़त और मैं
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नींद की आंखों में फिर भी थोड़ी मुरव्वत बाक़ी है।
बहोत देर के बाद ही सही,
कुछ देर के लिए ही सही,
मुझ से मिलने तो आती है।
मेरी बेचैनी को कुछ पल का आराम तो दे जाती है।

मगर ख्वाब से मुझे ये तवक़्क़ो न थी।
उस से तो मेरा बचपन का याराना था।
पहले वो मेरे पास रोज़ आ कर घंटों बैठता था,
फिर मुझे छेड़ ने के लिए बहोत दूर भाग जाता,
मुझे उस का पीछा करने में बड़ा मज़ा आता
मैं पूरा दिन उसी को ढूंढने में गुज़ार देता।
वो कभी मेरी पकड़ में तो नहीं आता पर
रात को चुपके से वो मेरे पास फिर से आ ही जाता,
बैठ जाता और हम यही खेल दोहराते।

फिर जिस दिन ख्वाब को ये अंदाज़ा हो गया कि
अब मैं दिन भर हक़ीक़त के साथ घूमता हूँ
और रात को भी हक़ीक़त को गले लगा कर सोता हूँ,
वो मेरे पास लौट कर आया ही नहीं
मैंने बहोत दिनों तक कोशिश की उसे ढूंढने की
पर अब मैं हिम्मत हार चुका हूँ।

मुझे लगता है कि ख्वाब इस बात से नाराज़ है कि
अब हक़ीक़त मेरे साथ ज़्यादा खेल खेलती है।
और मेरा सारा वक़्त हक़ीक़त की ज़रूरतों को पूरा करने में ही गुज़र जाता है।

यारो मेरा ख्वाब अगर तुमको कहीं भूले से दिख जाए तो उस से कहना कि........

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