Shivam Chaubey   (Shivam©)
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Joined 31 May 2017


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Joined 31 May 2017
Shivam Chaubey 3 JUN AT 12:19

१-
पहले औरतें आयीं
फिर आग
और फिर चूल्हा
फिर ख़बरें आईं
औरतों को चूल्हे की आग में
भूनकर खा जाने की।

२-
सूरज देर से जागा
जलता रहा
औरतें पहले जागीं
और बुझा दी गईं
भिनसारे की लालटेन की तरह।

-


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Shivam Chaubey 9 MAY AT 11:58

मैं...
खूबसूरत चीज़ों को छूने से
इसलिए भी डरता हूँ
क्योंकि
मैं उनकी हत्या में
शामिल नहीं होना चाहता।

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Shivam Chaubey 8 MAY AT 20:50

प्रार्थना
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मैं बेतरह चाहता हूँ
कि अब वो लौट आए

इससे पहले कि
मेरे हाथ... भूल जाएं
उसके हाथों की गर्माहट।
और मेरी आँखें उसे खोजते हुए
बदल जाएं किसी रेगिस्तान में।

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Shivam Chaubey 6 MAY AT 20:02

फ़र्क
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पंक्षी!
अपने मन से उड़ते हैं
और पतंगें...?

बस यही फ़र्क है
आदमी और औरत होने में।

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Shivam Chaubey 4 MAY AT 12:11

इश्क़ होता तो इस तरह होता
बस तेरा नाम आख़िरी होता

चूम लेता मैं तेरी आँखों को
और दुनिया से फिर बरी होता!

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Shivam Chaubey 21 APR AT 13:19

डिअर लेखक/कवि/कविता के नाम पर कुछ भी लिखने वाले...

5 किलोमीटर लंबी प्रोफाइल लिखने से बेहतर है 2 लाइन की ढंग की कविता लिखिए...वो ज्यादा बेहतर होगा।कविता के नाम पर रायता फैलाने से बाज आइये और अच्छे कवियों को पढ़िए...फ़ायदे में रहेंगे! बाकी जो आप लिख रहे उसे कविता नहीं कहते।

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Shivam Chaubey 21 APR AT 12:55

अशआर
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एक कमरे में मैं रहता हूँ और नज़र में कोई नहीं
यानी घर मुझमें रहता है और इस घर में कोई नहीं

जब आदम की ज़ात ढूंढने निकला तो ये गौर किया
सबके भीतर एक शहर है और शहर में कोई नहीं

ताखों पर रक्खे हैं सबने अपने अपने दीन ओ करम
महज किताबों में बाकी हैं गुज़र बसर में कोई नहीं

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Shivam Chaubey 15 APR AT 18:57

कम से कम आओ
तो बने रहो मेरे साथ
किसी दुख की तरह
बिल्कुल अकेले

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Shivam Chaubey 9 APR AT 1:44

घटिया से घटिया कविता पर जब कोई भल मानुष केवल प्रोफाइल की सुंदरता देखकर 'कमाल का लेखन' या 'क्या अच्छी कविता लिखी' या 'बहुत खूब क्या कलम चलायी' जैसे कमेंट कर देता है न उसी क्षण में करता है कि लॉक डाउन में ही उससे जाकर मिलूं और उसे सस्ते नशे से मुक्त होने के उपाय बताऊँ!

(प्रोफाइल के सुंदर चेहरे देखकर कमेंट करना बंद करिए... आपका भी भला होगा और कविता का भी!)

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Shivam Chaubey 1 APR AT 18:30

कल रात मैं शिकस्त ए सितमगर से खुश हुआ
वो रो पड़ा तो दिल मेरा अंदर से खुश हुआ

खुश वो है जिसके वास्ते दुनिया सराब है
उसकी खुशी भी क्या जो मयस्सर से खुश हुआ

दुख बाँटना तो रस्म ए जहाँ है मगर जमाल
वो खुश हुआ तो मैं भी बराबर से खुश हुआ

मैं उसके हमसफ़र से मिला इस तपाक से
अंदर से जल के रह गया बाहर से खुश हुआ

[- jmaal ehsaani]

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