Shalini Sahu  
2.7k Followers · 225 Following

read more
Joined 7 July 2019


read more
Joined 7 July 2019
Shalini Sahu YESTERDAY AT 13:46

वो सो जाता है मैं उसे याद करती हूँ,
आ जाये मुझे भी नींद यही फरियाद करती हूँ..
वो मिलेगा या नहीं मुझे मालूम नहीं,
मैं तो सपने में भी उससे मिलने की आस रखती हूँ..

-


58 likes · 32 comments
Shalini Sahu 20 JAN AT 14:55

गलतफहमियां छोड़ फिर एक हो जाते हैं..
ये लड़ाईयां छोड़ फिर इक दूजे में घुल जाते हैं...
क्या रखा है इक-दूजे की गलतियां ढूढ़ने में,
चल इन गलतियों के साथ ही इक-दूजे के हो जाते हैं..

-


Show more
79 likes · 35 comments
Shalini Sahu 15 JAN AT 12:51

उसने कहा इश्क़,
हमने तिरंगा लहरा दिया..
उसने कहा ख़ुदा,
हमने वतन हिन्दोस्तां बता दिया..

-


97 likes · 42 comments · 4 shares
Shalini Sahu 13 JAN AT 16:30

झूठ भी वो लाज़वाब कहता है,
ज़िस्मानी बातों को प्यार कहता है...
मिला कहाँ है वो अभी इश्क़ की महक से,
वरना ऐसे कैसे कह देता इश्क़ वो ज़िस्मो के मिलन को...

-


98 likes · 20 comments · 2 shares
Shalini Sahu 13 JAN AT 15:12

बेवफ़ा निकला वो यार हमारा,
कल तक जो कहता था प्यार सच्चा है हमारा.....

-


90 likes · 22 comments · 1 share
Shalini Sahu 9 JAN AT 4:06

रक़ीब को क्यूँ कहूँ गुनहगार मैं,
जब मेरा ख़ुद का यार गद्दार निकला...

-


142 likes · 48 comments
Shalini Sahu 8 JAN AT 12:43

रहता कैसे ना इश्क़ मेरा अधूरा,
जलते दिए को इश्क़ जो हुआ था बहती हवाओं से...

-


Show more
129 likes · 41 comments
Shalini Sahu 7 JAN AT 23:31

थोड़ी नासमझ थोड़ी समझदार हूँ मैं,
अधूरी ज़िन्दगी की मुकम्मल किरदार हूँ मैं...

-


118 likes · 51 comments · 2 shares
Shalini Sahu 7 JAN AT 12:28

मैं ने उसे उर्दू लिखना सिखाया था, उसने भी मुझे संस्कृत पढ़ाई थी,
हमें इश्क़ हुआ था और हमारी जान पर बन आयी थी..
उसने मुझे गीता का सार सुनाया था, मैं ने भी उसे कुरान की बातें बताई थी,
हमें इश्क़ हुआ था और हमारी जान पर बन आयी थी..
ईद के दिन वो सेवईयां खाता था,करवाचौथ पर मैं उसे छत पे देखने आयी थी,
उस दिन तो चाँद ने भी मज़हबी बात झुठलायी थी,
हमें इश्क़ हुआ था और हमारी जान पर बन आयी थी..
मैं उससे मिलने मंदिर में आयी थी, ये बात पूरे मोहल्ले को पंडित ने बताई थी,
हमें इश्क़ हुआ था और हमारी जान पर बन आयी थी..
अब्बा ने मुझे पर लाख पाबंदी लगाई थी, उसके भी घर वालों ने उसे मज़हबी बात बताई थी,
हमें इश्क़ हुआ था और हमारी जान पर बन आयी थी..
साँसे उसकी थम सी रही थी, धड़कने मेरी रुक सी रही थी,
हाँ हमें इश्क़ हुआ था और हमारी जाँने निकल रही थीं..
"अब इस जहाँ को छोड़ हम उस जहाँ में संग रहा करते थे,
जहाँ जाति-धर्म को छोड़ लोग रूहों के संग जिया करते थे"

-


Show more
80 likes · 41 comments · 1 share
Shalini Sahu 6 JAN AT 12:31

रक़ीब महफ़िल में आज महबूबा को चाँद बता रहा था,
बारी हमारी भी आयी हमने दाग को बेवफाई का इल्जाम बता दिया...

-


134 likes · 47 comments

Fetching Shalini Sahu Quotes

YQ_Launcher Write your own quotes on YourQuote app
Open App