Shaikh Rafik   (Raju✍)
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Joined 3 April 2018


Joined 3 April 2018
Shaikh Rafik 19 OCT AT 22:36

कुछ दूर ही सही अपने साथ चलने दे ज़रा..
ऐ ज़िन्दगी थोड़ा वक़्त दे, सँभलने दे ज़रा..

کچھ دور ہی سہی اپنے ساتھ چلنے دے ذرا
اے زندگی تھوڑا وقت دے سنبھلنے دے ذرا

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Shaikh Rafik 19 OCT AT 22:01

छोड़कर ये जिस्म अपना मैं हवा हो जाऊँगा..
ओढ़कर मिट्टी की चादर बे-निशां हो जाऊँगा..
जी उठेंगे ये लफ्ज़ मेरे, दास्तान बन कर मेरी,
यारो, मैं भी एक दिन, इक दास्तां हो जाऊँगा..

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Shaikh Rafik 18 OCT AT 14:47

ये भी मुमकिन था, हम सुलाह कर लेते..
बिछड़ने से पहले तुम, मशवरा कर लेते..

یہ بھی ممکن تھا ہم صلح کر لیتے
بچھڑنے سے پہلے تم مشورہ کر لیتے

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Shaikh Rafik 18 OCT AT 12:56

Another chance..🙂

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Shaikh Rafik 17 OCT AT 18:55

अंधेरो में आऊंगा, उजालों में आऊंगा..
शब-ओ-रोज़ मैं तेरे ख्यालों में आऊंगा..

गोशा-ए-तन्हाई में दौरान-ए-गुफ़्तगू,
जवाब बन कर तेरे सवालों में आऊंगा..

मुझको न रोक पाएगी,ये तेरी कोशिशें,
मुक़ाबिल मैं तेरे, मिसालों में आऊंगा..

कैसी ये बुरी लत है, जो छूटती नहीं, (YQ)
छोडूंगा जब इसे तो सालों में आऊंगा..

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Shaikh Rafik 17 OCT AT 15:56

गुलों की चाह में अक्सर ख़ार मिलते हैं..
उम्मीद-ए-चमन में दर्द हज़ार मिलते हैं..

मैंने जाना जिसे भी ग़म-गुसार अपना,
बन के हमदर्द मुझसे अदाकार मिलते है..

आदतन सबसे खुश-दिली से मिलता हूँ,
मिलने वाले मगर मुझसे बेज़ार मिलते हैं..

जब भी चाहा, कोई ख़्वाब हो अपना,
मेरी हसरतोंं पे मुझको हिसार मिलते है..

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Shaikh Rafik 16 OCT AT 19:38

कभी चाहा ही नहीं तुमने,चाहत की तरह..
मोहब्बत की थी तुमने, तिजारत की तरह..

मुसलसल बोहतान क्यों मेरे ही सर आये,
है मेरा ख़ुलूस जानां,इक इबादत की तरह..

कभी ताखीर नहीं की, तेरी निदां पर मैंने,
मैं दौड़ा चला आया, इक आदत की तरह..

लुटाई खूब तबस्सुम तुमने मेरे रक़ीबों पर,
मुस्कुराया मुझे देखकर इनायत की तरह..

सुकून-ए-जाँ,करार-ए-दिल है कुर्बतें तेरी,
कोई राहत नहीं ऐसी, इस राहत की तरह..

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Shaikh Rafik 16 OCT AT 13:45

शर्म क्या आएगी उन्हें, तंज़-ओ-तक़रीर से..
छुपते फिरते रहे हैं जो, अपने ही ज़मीर से..

شرم کیا آئے گی انہیں طنز و تقریر سے
چھپتے پھرتے رہے جو اپنے ہی ضمیر سے

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Shaikh Rafik 15 OCT AT 19:36

मरीज़-ए-इश्क़ हूँ, कोई तो दवा कर दो..
सहेलाता हूँ ज़ख्मों को, तुम हवा कर दो..

गर इतना भी ना हो सके, तुमसे यारों तो,
शिद्दत से मेरे हक़ में, सिर्फ दुआ कर दो..

बड़ी तकलीफ देता है, अक्सर ये सीने में,
ऐसा करो मुझे, इस दिल से जुदा कर दो..

सदक़ा है नाम यारों, ख़िदमत-गुज़ारी का,
अपनी माशूक़ लाओ,मेरी दिलरुबा कर दो..😂

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Shaikh Rafik 15 OCT AT 14:53

Ek Tha YQ...😛🤣

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