क्यों व्यर्थ करुं मैंअल्फ़ाज़ तुम परतुम और तुम्हारी बातेंअब ख़ार की तरह लगती है - Chaubeyji
क्यों व्यर्थ करुं मैंअल्फ़ाज़ तुम परतुम और तुम्हारी बातेंअब ख़ार की तरह लगती है
- Chaubeyji