Sanjay Upadhyay   (SU)
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Joined 24 August 2018


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Joined 24 August 2018
20 NOV AT 7:13

मिलों किसी सुबह तुम्हें जन्नत से मिलाऊं..
इस शहर में ही कहीं तुम्हें ले जाकर चाय पिलाऊ।।

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27 OCT AT 17:51

सब कुछ बदल सा गया है ज़िन्दगी में,
बस तुझे देखने की चाहत कुछ आज भी पहले जैसी है!
🥀

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17 SEP AT 17:10

उसके गालों में उभरते दो सुर्ख से गड्ढे,
तब नज़र आते हैं जब वो मुस्कुराती है।
ऐसा वो कहती है..

कभी-कभी तो सोचता हूं
कि मैं उसकी इस मुस्कराहट के लिए ईश्वर से भी लड़ जाऊंगा।

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5 SEP AT 14:32

मैं ठहरा लड़का पहाड़ी प्रिये
और
तुम शहर की रानी प्रिये
मैं शौकिन हुआ चाय का
तुम ठहरी कॉफी की अमली प्रिये!!

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25 JUL AT 15:34

होती रहेगी मुलाक़ात तुम से वक़्तन-फवक्तन
नज़रों से दूर हो दिल से नहीं !

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18 JUL AT 0:59

तुम बिन जिंदगी कुछ ऐसी हो गई
जैसे चाय बिन बिस्कुट!

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4 JUL AT 23:15

मुझे सुकून सिर्फ दो चीजों से मिलता है।
एक तेरा मेरे साथ में होने से,
दूसरा तेरा हाथ मेरे हाथ में होने से।।

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20 JUN AT 22:39

हाथों में कैमरा
साथ में चाय की प्याली हो
कहीं दूर पहाड़ों के बीच
छोटा सा घर मेरा हो
हर इतवार मैं
क़िस्तों में सपना ये देखता रहता हूं।

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14 JUN AT 15:55

मुद्दतों के बाद हम किसी से मिले
जैसे यूं लगा अपनी जिंदगी से मिले।

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7 JUN AT 9:28

हर घड़ी हर पहर तेरी फिकर रहती है
ना जाने तू आजकल किधर रहती है।

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