8 NOV 2017 AT 23:14

बुरे काम का बुरा ही नतीजा हो,
लगे हो पेड़ जब बबूल का,
तो थाली में आम कहां हो,
बात यहीं नोट बंदी की भाई,
मोदी ने तो अपना फर्ज निभाई,
उसको क्या पता १२५ करोड़ में कुछ ने,
सिर्फ बबूल लगा आम की कल्पना सजाई ।।🤔
धन्यवाद 🙏
#नोट बंदी स्वार्थी प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार
#मै नोट बंदी का समर्थन करता हूं।।

- संजय निराला