Saket Garg   (Saket Garg)
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Blogger, Journalist, Writer, Social Activist
Joined 13 September 2016


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Saket Garg 22 HOURS AGO

तेरी एक मुस्कान पर, मैं आज भी फ़िदा हो जाता हूँ
साँस-सी आती है इस रूह को, मैं ज़िन्दा हो जाता हूँ

- साकेत गर्ग 'सागा'

-


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Saket Garg 15 JUL AT 23:45



न-जाने क्यों नहीं भाता मैं, किस्मत मेरी को
एक पल हँसा कर, फ़िर चार पहर रुलाती है

- साकेत गर्ग 'सागा'

-


जान लेकर ही मानेगी, यह कम्बख़्त बड़ा सताती है।

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Saket Garg 14 JUL AT 15:44

जो ना रहूँ मैं, यह याद रखना
'मैं था', बस यह याद रखना

- साकेत गर्ग 'सागा'

-


'मैं था', कम-से-कम यह तो याद रखना!

#मैं #याद #YQHindi #YQDidi #SaGa

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Saket Garg 10 JUL AT 16:32

,
Like the moon knows the earth.
Like it know, when earth gets covered
with the darkness and it needs light.
When earth have the brightness and it's
'its' time to get out of the sight.

Like the moon that know,
the dark secrets of the earth
that aren't visible in the bright day-light.
Like it know, when earth has got too
much of the heat and it's 'its' time to
calm and relax, in the lap of a sprite.

I know you,
like that 'moon' knows this 'earth',
not that sunlight.

-


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Saket Garg 8 JUL AT 12:16

ज़रा उजाला दिखाती है, फिर घना अँधेरा ले आती है
ज़िन्दगी हर रोज़ मुझे, कुछ यूँ 'नाशाद' कर जाती है

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 7 JUL AT 16:23

ज़िन्दा हूँ, क्योंकि लिखता हूँ
ज़िन्दा रहूँगा, क्योंकि लिख दिया

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 6 JUL AT 2:07

जो 'दीदार-ए-यार' हुआ आज, एक अरसे के बाद
'ज़िन्दा हूँ मैं' ये अहसास हुआ, एक अरसे के बाद

कब से खड़ा था, एक सूखे दरख़्त-सा वीराने में
'हरा हूँ मैं' ये अहसास हुआ, एक अरसे के बाद

ना सहर का कोई इल्म था, ना शब का था ठिकाना
'होश में हूँ मैं' ये अहसास हुआ, एक अरसे के बाद

हँसती-खिलखिलाती, वो बेनज़ीर नाज़नीं जो दिखी
'आबाद हूँ मैं' ये अहसास हुआ, एक अरसे के बाद

कब से था मैं तन्हा-तन्हा, रुस्वा और बे-ज़ार सा
'ख़ुश हूँ मैं' ये अहसास हुआ, एक अरसे के बाद

भूल चुका था मैं ख़ुद को भी, एक उसको खो कर
'मैं हूँ', 'हूँ मैं' ये अहसास हुआ, एक अरसे के बाद

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 5 JUL AT 1:50

कईं दिनों से भूखा था, मैंने 'रोटी' को देखा
कल तुम्हारी गली से गुज़रा था, मैंने 'तुम' को देखा

- साकेत गर्ग 'सागा'

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मैंने तुम को देखा था!

#भूखा #रोटी #गली #तुम #YQHindi #YQDidi #SaGa

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Saket Garg 4 JUL AT 10:56

अपनी 'तन्हाई' की चिन्ता तो हर पल सताती है तुम्हें,
कभी अपनी तन्हा 'आई' की चिन्ता भी कर के देखो,

तुम्हारी सारी तन्हाई ना मिट जाये तो फिर कहना!

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 3 JUL AT 1:39

फिर एक बार आने लगी है साँस, इस रूह को इस जिस्म में
कुछ ऐसा कमाल का तिलिस्म है, मेरे चारागर की छुअन में

- साकेत गर्ग 'सागा'

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