Saket Garg   (Saket Garg)
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Blogger, Journalist, Writer, Social Activist
Joined 13 September 2016


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Saket Garg 8 NOV AT 5:07

जो भी है जिस-जिस का भी है कर्ज़ा, बता दो अब मुझ पर
मैं अब ज़्यादा दिन किसी का भी कर्ज़दार, रह नहीं पाऊँगा

जी तो रहा हूँ अभी पल-पल हर पल, मर-मर कर यहाँ मैं
ज़्यादा मरता रहा तो, अब मैं और ज़्यादा जी नहीं पाऊँगा

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 6 NOV AT 15:13

इख़्तिताम हो इस आज़ार का, के अब और सहा नहीं जाता
जी तो रहा हूँ मैं हर रोज़, पर अब हर रोज़ जीया नहीं जाता

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 5 NOV AT 20:34

नहीं रह पाती टिक कर मुस्कुराहट मेरे चेहरे पर
मुस्कुराहट मुझसे कभी-भी वफ़ा नहीं निभा पाई

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 4 NOV AT 14:15

(*हुक़ूक़ = rights, हक़)

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Saket Garg 3 NOV AT 3:08

ना जाहिल रहा यहाँ, मैं आलिम भी कहलाया नहीं
मैंने पढ़ा बहुत कुछ यहाँ, मैं पढ़ कुछ भी पाया नहीं

ज़िन्दगी के मकतब में, दाख़िला ही गलत मिला मुझे
होते गये तज़ुर्बे यहाँ, मैं तज़ुर्बा कर कुछ भी पाया नहीं

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 1 NOV AT 14:02

दीपावली के दिनों में दीप जलाकर, मैंने अँधेरा है भगाया
मैं कभी उस मग़रिबी हैलोवीन का भूत, हो ही नहीं पाया

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 1 NOV AT 2:14

वो जो अधजली बाती है ना उस दीपक में
जिसने अमावस्या की सियाह काली रात में
तेल के संग मिलकर
ख़ुद जलकर
तुम्हारे दिल, परिवार, घर और ज़िन्दगी को रौशन किया था

उस अधजली बाती को
किसी भी काम की ना रहने पर
अब जो तुम कूड़े में फेंकने जा रहे हो
तो बस एक बार सिर्फ़ एक बार
उसकी ओर देखकर मुस्कुरा देना ना

उसने जो साथ दिया है तुम्हारा
तुम्हारे जीवन की स्याह अकेली काली रात में
उसने जो त्याग किया है ख़ुद जलकर तुम्हें रौशन करने का
बस उस साथ के लिये उस त्याग के लिये
तुम उसे कुछ यूँ मन बे-मन से पुरस्कृत कर देना ना

हाँ उसका गंतव्य वो कचरा ही है
वो घर नहीं वो ज़िन्दगी नहीं वो दिल नहीं
जिसे उसने ख़ुद जलकर भी रौशन किया था
पर फ़िर भी तुम उसके त्याग का उसके जलने का
इतना सा मोल दे देना ना

फेंकते वक़्त उसे बाहर कूड़े में...
उसे बस देखकर मुस्कुरा देना ना

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 28 OCT AT 11:22

क्यों ना इस दीपावली कुछ नायाब माँग लूँ
तेरी-मेरी ख़ुशी खिलखिलाती हँसी माँग लूँ

हमारी रूहों के लिये चैन-ओ-सुक़ून
दिलों के लिये उत्साह-उमंग माँग लूँ

साथ माँग लूँ साथ में हर-पल उत्सव माँग लूँ
हम सब के लिये सुख-शान्ति-समृद्धि माँग लूँ

धन-यश-वैभव-कीर्ति-आनंद की अरदास माँग लूँ
क्यों ना इस दीपावली में सब के लिये सब माँग लूँ

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 26 OCT AT 3:03

एक भूली बुरी याद नहीं, एक सुनहरा कल समझ याद रखना ना मुझे
मेरे बाद जो मैं कभी यूँ ही याद आ जाऊँ, तो तुम याद करना ना मुझे

- साकेत गर्ग 'सागा'

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Saket Garg 25 OCT AT 0:08

यूँ ही नहीं मिलता है सुकून, माँ के चेहरे पर हँसी देख कर
पल-पल हर पल आँसू पीकर, मेरी माँ ने मुझको पाला है

- साकेत गर्ग 'सागा'

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