ना रख उम्मीद-ए-वफ़ा किसी परिंदे से,जब पर निकल आते है तो अपने आशियाना भी भूल जाते है !! - Rupali Ratan khetan
ना रख उम्मीद-ए-वफ़ा किसी परिंदे से,जब पर निकल आते है तो अपने आशियाना भी भूल जाते है !!
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