Ritesh Raikwar   (Ritesh Raikwar ( जो🃏kar))
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एक कहानी है..
कुछ बात पुरानी है..
Joined 19 July 2018


एक कहानी है..
कुछ बात पुरानी है..
Joined 19 July 2018
Ritesh Raikwar 17 HOURS AGO

#पलायन

पाओ छील जाते हैँ और भूख पेट खा लेती है..
कूड़े के ढेर मे पड़ी हुई रोटी भी पास बुला लेती है..

और चलते काफिले ही है, सहारा अपना कहीं छाओं दिखे तो नीद बुला लेती है.. घर के सपने भी अब तो भूख खा लेती है..

माँ खुद नीचे सोती है और कंकड़ पत्थर पर भी अंचल से बिस्तर बना देती है..
एक मेरे दूध की खातिर गुज़रती गाड़ियों से भीख भी वो माँगा लेती है..!!

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Ritesh Raikwar 28 MAR AT 12:35

मैं जिस गली मैं रहता था वहाँ एक लड़की मुझको जानती थी..
दरवाजे अक्सर बंद रहते थे वो खिड़की से पहचानती थी..

और मै उसके पड़ोस मै किराये से रहता था उसको.. देखता था बात नहीं करता था उससे..
इस बात का वो बेहद बुरा मानती थी..

हम साथ खेलते थे साथ स्कूल जाते..
वो उस बचपन को खिलौना मानती थी..

और उसका घर उसके पड़ोस को छोड़कर वाला था उसको वो आखरी बार गले लगाने को मोहब्बत मानती थी..

मैं जिस गली मैं रहता था वहाँ एक लड़की मुझको जानती थी..
दरवाजे अक्सर बंद रहते थे वो खिड़की से पहचानती थी..!!

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Ritesh Raikwar 23 MAR AT 15:18

कुछ मजबूरियों भी हमको तोड़ रही है..
लड़कियां इश्क़ करके हमको छोड़ रही हैँ..

तुम बोहत अच्छे हो, हम नहीं है तुम्हारे काबिल कहकर..
अपने वादों से वो मुँह मोड़ रही हैँ..

जात-पात, ऊंच-नीच, पैसे-वैसे ना जाने कैसे-कैसे बहाने ढूंढ रही हैँ..
चलते चलते रास्तों मै ही हाँथ छोड़ रही हैँ..

कुछ मजबूरियों भी हमको तोड़ रही है..
लड़कियां इश्क़ करके हमको छोड़ रही हैँ..!!

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Ritesh Raikwar 20 MAR AT 10:24

वक़्त ठहरा है जमीं पुरानी है..
हांथो की सिकुड़न अफ़सोस की निशानी है..

पैसे नहीं आते पर अपने बच्चों की याद आती है..
तेरी माँ अक्सर जब रोटी बनाती है..

रोज बैठता हुँ उस टूटी कुर्सी पर..
तो तेरी चाय याद आती है, जब कलम हाँथ से लिखते लिखते गिर जाती है..

तस्वीर तेरे बचपन की जंग लगी कील से लटकती है..
पैर मै तेरे बचपन की साइकिल अक्सर अटकती है..

घर टूट गया है छत से सर्द आती है..
अब कोई बचपन नहीं यहाँ, न कोई लड़की बारिश देखकर मुस्क़ुरती है..

अब तो एक लाठी के सहारे चलती..
उस टूटे घर की कहानी है..!!

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Ritesh Raikwar 18 MAR AT 12:04

#darkemotion

देखो जूता पुराना छूट गया..
एक यार पुराना छूट गया..

वो किस्से तेरी भाग दौड़ के..
नया जमाना भूल गया..
एक जूता पुराना छूट गया..!!

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Ritesh Raikwar 16 MAR AT 11:15

#darkemotion

यार मै तुझे बदलने को नहीं कह रहा..
अपने साथ आगे चलने को नहीं कह रहा..

यार तू प्यार करती है मुझसे, मै भी तुझसे प्यार करता हुँ..
मै तुझे कोई अपना घर बार बदलने को नहीं कह रहा..

तू भगवान को मानती है, मै भी उसी भगवान को पूजता हुँ..
यार मै तुझे कोई जात बदलने को नहीं कह रहा..!!

यार तू लौट आ मै तेरे इंतजार मै हुँ..
यार मै तुझे के अपना प्यार बदलने के लिये नहीं कह रहा..!!

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Ritesh Raikwar 14 MAR AT 8:37

#darkemotion

एक सिक्का पुराना था..
वो एक गुज़रा ज़ामना था..

कभी संतरे की गोली कभी कंचों का दीवाना था..
बचपन की अमीरी का वो एक लौता ठिकाना था..

पुरानी पॉकेट मै पड़ा वो एक सिक्का पुराना था..!!

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Ritesh Raikwar 12 MAR AT 8:48

#darkemotion

पुरानी गली मै गया, घर नहीं रहा..
मंज़िले ऊँची-ऊँची, मैदान नहीं रहा..

और तुम कौन हो, किस्से मिलने आये हो..
यहाँ एक शख्स था मर गया, नहीं रहा..!!

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Ritesh Raikwar 9 MAR AT 16:13

#darkemotion

इस बरस फिर होली है..
तस्वीर ने अलमारी फिर वो खोली है..

किताब के गिरते उन पनो ने..
पुरानी ग़ुलाल फिर टटोली है..!!

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Ritesh Raikwar 7 MAR AT 8:34

#darkemotion

कभी मै उस गली मै रहता था..
एक पेड़ झूला डालने को कहता था..

और वो जमाना चला गया उस लड़की के दुपटे जैसे..
कभी वो मेरी आँखों मै होकर भी उसको ढूढ़ने को कहता था..!!

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