22 AUG 2019 AT 17:24

एक मैं हूँ यहाँ , एक तू है
सिर्फ साँसों की ही गुफ़्तुगू है

दर्द के साज़ पर चाँदनी
दर्द के साज़ पर रौशनी
गीत गाते हुए आ रही है
तेरी ज़ुल्फो से छनकर वो देखो
चाँदनी नूर बरसा रही है ,

वक़्त यूँही ठहर जाए हमदम
दिल को इतनी सी एक आरज़ू है
एक मैं हूँ यहाँ , एक तू है
सिर्फ साँसों की ही गुफ़्तुगू है ,

दूर धरती के कांधे पर देखो
आसमाँ झूम कर झुक गया है
नर्म बाहों के घेरे के बाहर
शोर दुनिया का चुप रुक गया है,

मेरे ख्वाबों में जो रहती थी
अप्सरा तू वही हु-ब-हु है
एक मैं हूँ यहाँ , एक तू है
सिर्फ साँसों की ही गुफ़्तगू है।

- Rishi