rishabh myjoopress   (©myjoopress RishabhKumar)
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Joined 4 May 2019


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14 JUN AT 22:56

a new circle of life
what's going upside down
will get better and right
I do have this hope
in me though days pass
what to do and
what not to do
will always make
sparks.

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14 JUN AT 22:35

उनकी क्या दरकार करूँ।
मिलते कहाँ है हमकदम
क्या गैरों से प्यार करूँ?

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14 JUN AT 22:31

When you can't see hope
and the light's getting dim
with denial and nope
Wish to have care like spouse
But the sprout not found
The link isn't gone
Yet the things don't bound

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14 JUN AT 22:27

Giving up is easy but....
खुजली आपको है, खुजाने कोई दूसरा नहीं आएगा

-


14 JUN AT 21:53

namaskar sbko..

well now I know why..
the things that are awesome to many
does not lure my eyes, not any
I got different views as sight in mind
that's not gonna change cause held so long
might be atheist of those believes
could be lunatic if seen like much
but should I change of course to adjust
with all the blues when the light's not up
gonna dim my sights for days now
In a hope that I get some answers
with all nows.

-


7 JUN AT 17:51

अपनी मेहनत, अपना राज
काज भी मन का, दाम भी चंगा
हो जाएगा नाम भी ढंग का
जो करना, बस आस पकड़ कर
होगा फिर रब, साथ कदम हर
चलते रहना, दम में रहना
रखना खुद खुद्दारी
पगड़ी अपनी, हाथ हैं अपने
कहाँ कहीं बेगारी
कहते हैं जो दाम ही कम है
उनके ही तो नाम भी कम है
दिखते क्या लाचारी
क्यों हैं यूँ बेचारी
क्या है यूँ बेकारी
क्या है यूँ बेकारी

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7 JUN AT 11:30

ऊँचा उडने के लिए
भरोसा खुद पर रखना ही होगा
पंख अपने ही होंगे, गिरने का डर भी
लाजमी ही होगा
पर हिलाना किया जो बन्द
थक जाने को जो हुए राजी
मौत तो मुकम्मल है
क्यों सोचें हम यूँ माजी

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7 JUN AT 10:57

कितना बिखर गया सब कुछ
अब सब समेटना पडेगा
कितने ही बीते किस्सों को पिरो
यादों में अब सहेजना पडेगा
कुछ बातें अनकही, कुछ अनसुनी भी सही
कुछ सपनों की खातिर, फिर अपनों में कहीं
किसी शाम की तलाश को
अब समझना ही पड़ेगा
कितना बिखर गया सब कुछ
अब सब समेटना पडेगा

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7 JUN AT 10:15

कहना हमने छोड़ दिया, दिखलाने का इन्तजार करो

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7 JUN AT 9:42

हम लिखते ही कब हैं जिसे वे पढ़ेंगे
किताब हैं कोरे, स्याह की कमी है
हम कहते ही कब है जिसे वो सुनेंगे
एहसास हैं अधूरे, अल्फ़ाज़ की कमी है

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