Reena Vashisth  
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Joined 11 November 2017


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Reena Vashisth 7 FEB AT 1:47

पेंडुलम

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Reena Vashisth 3 JAN AT 23:14

चुप्पी को ये झनझन में बदले और लहराए,
झुकी नज़रें और शर्माता तेरेे कान का झुमका।

हँसने से जमाने ने जो टोका कभी तुम को,
गालों से है टकराता तेरे कान का झुमका।

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Reena Vashisth 26 DEC 2019 AT 0:27

रच ली मैने एक दुनिया
बना दिया एक व्यूह चारों तरफ़
अभेद्य होगा तुम्हारे लिए भी,
ताकि ना देख पाओ कभी
क्या होता है इस दुनिया में,
कैसे इच्छाएँ रोज पंखें से लटक जाती हैं
कभी खुद पंख बन उड़ जाती हैं
कैसे कभी तुम्हें सहेजा जाता है
कभी टुकड़ों में बिखेरा जाता है
सुनो, अब तुम वापस मत आना
तुम्हारी तरह सीख लिया छुप जाना
तुमसे भी...

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Reena Vashisth 12 DEC 2019 AT 0:53

अपरिचित

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Reena Vashisth 5 NOV 2019 AT 2:00

अधूरेपन से कोई लगाव होने लगा है क्या?

ऐसा क्यों लगता है तुम्हें?

क्योंकि आज तुमने फिर से अपनी कविता को अधूरा ही रहने दिया जबकि पूरा कर सकती थी...

कुछ कविताएँ अधूरी ही अच्छी लगती हैं, उन्हें पूरा होने के लिए चाहिए होती है अंतिम पंक्ति... और यह तो तुम जानते ही हो अंतिम पंक्ति मैं कभी नहीं लिख सकती जब कविता तुम्हारी हो.....

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Reena Vashisth 7 OCT 2019 AT 1:33

वियोग
आता है....
चला जाता है
हरा रंग....
और
बन जाता है एक ठूँठ....
जब मिलता है जल
नहीं देखता वो स्त्रोत
और आतुर हो उठता है
हरे रंग से मिलने....

बिछड़े हुए प्रेमी भी होते है
ठूँठ...
तलाशते है प्रेम...
पर उन्हें मिलता है
ठूँठ बने रहने का अभिशाप...

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Reena Vashisth 29 SEP 2019 AT 1:04

प्रेमियों के मरने के बाद
प्रेम ज़िंदा रहता है
हरे रंग में...

वृक्षों की शाखाओं में
मिलती है मुस्कुराहटें...
और घुल जाती है यादें
गिरते पत्तों के साथ
मिट्टी में...

जब जब आती है
नयी कोंपल
पुनर्जीवित हो उठता है
हरा प्रेम...

नहीं होता अंत हरे रंग का...

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Reena Vashisth 11 SEP 2019 AT 0:35

कहाँ रहती हो आजकल? दिखती ही नहीं....

एक दुनिया बनायी है तुम्हारी दुनिया तक रास्ता बनाने को....

कैसी बात करती हो! ऐसा भी भला होता है क्या?

हाँ, बेशक होता है.... सपनो की दुनिया बनायी है... जहाँ पूरे किए जायेंगे वो सभी सपने जो देखे थे तुमने... और देखना उस दिन फिर तुम्हें खुद आना पड़ेगा अपने सपनो को जीने.... बोलो बन सकता है ना रास्ता अब तो.....

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Reena Vashisth 23 AUG 2019 AT 0:37

मैं उस को देखा करती हूँ...

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Reena Vashisth 26 JUL 2019 AT 10:22

कारगिल विजय दिवस

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