डॉ.रचना सिंह"रश्मि"   (डॉ.रचना सिंह"रश्मि")
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13/8
Joined 8 May 2018


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Joined 8 May 2018

हूँ एक प्राण मै
शरीर दो हूँ
नर - नारी का
दिव्य रूप हूँ
शक्ति- भक्ति का
कर्मबंधन हूँ
मै अर्द्धनारीश्वर हूँ।

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अर्धनारीश्वर

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शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं। जीवन रूपी पाठशाला में हम जीवन.भर छात्र रहते है यहाँ हम हर पल किसी न किसी से सीखते है और सिखाते भी इसके लिए स्कूल का शिक्षक होना जरूरी नही है
गुरु दोस्त भी हो सकता है मां भी हो सकती है पिता भी हो सकता है बहन भी हो सकती है । और हमारे घर पर काम करने वाली भी हो सकती है।या यूँ कहे जिससे भी हमें सिखने को मिले वही गुरु रूपी शिक्षक है इसके लिए हमें किताबी ज्ञान या डिग्रियों की जरूरत नहीं है ज्ञान की कोई परिधि नहीं है प्रथम गुरु हमारे जीवन में मां होती है जिससे हम जीवन में हर कदम पर चलना सिखाती ।शिक्षक कुम्हार की तरह कच्चे मिट्टी को घड़े में.तराश कर आकृति देता है उसी तरह शिक्षक हमारे जीवन को एक दिशा प्रदान करते है जीवन में ज्ञान की ज्योति जलाते.है हमारे जीवन में अच्छाई बुराई का ज्ञान कराते है हमारे को सही और गलत के पहचान कराते है।
सभी शिक्षकों और जीवन के सभी गुरुओं को आज शिक्षक दिवस पर शत-शत नमन 🙏🙏
डॉ रचना सिंह अध्यक्ष/संस्थापिका का
आशाकिरण समृद्धि फाउंडेशन

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शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं

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((जन्में है कन्हाई))
खुले हैं द्वार
माया अपरंपार
सोए संसार
अर्धरात्रि को
तोड़ सब बन्धन
कान्हा है जन्में
उठा टोकरी
सौंपने को गोकुल
देवकी लाल
मैया यमुना
व्याकुल है छूने को
प्रभु के पांव
लल्ला को देख
फूली न थी समाई
यशोदा माई
✍️डॉ रचनासिंह"रश्मि"

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जन्में.है कन्हाई

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!!पुनः संसार में!!
तेरी यादों का ज्वार
मेरे अंतस में
उठता है
सागर की अथाह
जलराशि की अंनत
गहराई में
विलीन होकर
तेरी रूह से
एकाकार
हो जाऊं
तेरे होने के
मिलन के जैसे !
अहसास मात्र से
असंख्य तारों से
भरे आकाश में
त्यागकर
स्थूल काया
निर्विकार
होकर पारदर्शी
शैनेःशैने
समाहित होने
लगती तेरी
रूह के साथ मेरी रूह
करती है विचरण
बह्मांड में
होने को अवतरित
पुनःसंसार में
✍️डॉ रचनासिंह"रश्मि"

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रक्षाबंधन पारिवारिक और समाज का भी बंधन है

राखी के रूप में वचन वादा दायित्व बांधा जाता है भाई बहन के दायरे से बाहार आए यह बंधन बुजुर्ग माँ बाप,भाई का भाई से बहन का बहन से दोस्त का दोस्त से संतान का माँ बाप से पति का पत्नी से भी हो सकता है।इसलिए सिर्फ यह.धागे का बंधन न समझे
और हाँ सिर्फ अपनी बहन नही दूसरों की बहनो को अपनी बहन.बेटियों समान समझे क्योंकि जो आप किसी और के लिए सोच सकते कोई दूसरा आपकी ....

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बंधक है दायित्वों का

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।।।।।।।सत्तावन से सैंतालिस तक
।।।।।ना जाने कितना खून बहा
।। पर आजादी के दीवानों के
।। दिल मे बसा जुनून रहा
।।
।।
।।

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स्वतंत्रता दिवस

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बेरुखी कर ली
""''''''''''''"""""
मिले न तुम
हमने ग़मों से
दोस्ती कर ली
तेरी याद में
हमने बशर
जिंदगी कर ली
हमने मांगे न चांद तारे
मांगे थे बस रिश्तें सारे
हमसे ही बेरुखी कर ली
माथे की बिंदी
होठों की लाली से
हमने जुदा
जिंदगी कर ली
गुजारी रातें
करवटें बदल-बदल के
आंखों ने मेरी अंधेरों से
दोस्ती कर ली
मौत के इंतजार में
हमने कफन से
दोस्ती कर ली
✍️डॉ रचनासिंह"रश्मि"

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बेरुखी ककर ली

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अपनों का
रुठना
दिल का टूटना
दूर तक फैला
एकाकीपन
अंजाने! रिश्तों का
संगम लिखती हूँ।।

सिरहन
भरी रातें
बोझिल
आँखे
अधूरे सपनों की
चुभन लिखती हूँ।।

अधूरी!
ख्वाहिशें
अपनों का
कहना
सपनों का
टूटना
मन की
घुटन लिखती हूँ।।
✍️ डॉ रचनासिंह"रश्मि"

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जिंदगी के रगं पार्ट2

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!!जिदंगी के रंग!!
पायल की
रुनझुन
चूड़ियों की
खनखन
पिया के
प्यार में भीगा
तन-मन लिखती हूँ।।

अलसाई सी
सुबह
पक्षियों का
कलरव
कनेर से टपकती
ओस की बूंँदें लिखती हूँ।।

मेंघो की
घनघोर घटाएं
बारिश की
रिमझिम बूँदे
इंद्रधनुष के रंग में
सुनहरे सपनों का
संसार लिखती हूँ।।
✍️ डॉ रचनासिंह"रश्मि"

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जिंदगी के रगं3पार्ट

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मन की हर
उलझन
कुछ बीती बातें,
मीठी यादें
आशाओं का डेरा
रोज नया
सवेरा
शब्दों में
जिंदगी के रंग
बेहिसाब लिखती हूँ ।।
✍️डॉ रचनासिंह"रश्मि"

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जिंदगी के रंग बेहिसाब लिखती हूँ

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