Rahul Desai   (© Rahul Desai)
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Joined 25 January 2018


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19 HOURS AGO

ये किस्मत की लकीरें नहीं , ये तो दारारें है, जो हमे अपनी ख्वाहिशों से दूर ले जाती है।

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30 NOV AT 9:45

बंधा है तू इतनी माया से,
की बेखबर तू साधारण ज़िन्दगी से हो गया है,
उतारकर देख ले ये लालच का चश्मा,
समज आएगा तुझे,
की ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है. (१)

कायल है तू जो मोह के पीछे,
की बेखबर तू सच्चे इश्क़ से हो गया है,
उतारकर देख ये हवस का चश्मा,
समज आएगा तुझे,
की ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है.(२)

बंधा है तू इतना अपने सपनों से है,
की बेखबर तो वास्तविकता से हो गया है,
उतारकर देख ये अनगिनत ख्वाहिशों का चश्मा,
समज आएगा तुझे,
की कितनी खूबसूरत है ज़िन्दगी। (३)

खोया है तू इतना दिखावे की दुनिया में ,
की बेखबर तू सच्चे रिश्तों से हो गया है,
उतारकर देख ये दिखावे का चश्मा,
समज आएगा तुझे,
की ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है. (४)

उलझा है तू दूसरों को खुश रखने में,
की दूर तू खुद अपने आप से हो गया है,
२ घडी आपने आप से बात करके देख कभी,
समज आएगा तुझे,
की ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है. (५)

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27 NOV AT 13:15

अक्सर अधूरे रहे जाते है कई सपने, क्योंकि,
वास्तव में राहें तो कहीं और होती है, और हम उसे लकीरों में ढूंढ़ते रहते है।

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26 NOV AT 14:17

हसी का माहोल गम में बदल चुका था,
क्या बच्चे क्या बूढ़े हर कोई भयभीत था,
शोरगुल अब सन्नाटे में बदल चुका था,
चारो ओर हो रही गोलियों की बौछार थी,
कितनी भयानक वो रात थी। (१)

गुमराह नौजवानों का काफिला था,
पाने को जन्नत उन्होंने, कितने ही बेकसूरों को मारा था,
सदा ही दौड़ने वाला ये शहर मानो आज थम सा गया था,
चारों ओर हो रही गोलियों की बौछार थी,
कितनी भयानक वो रात थी। (२)

हैवानियत और इंसानियत के बीच चल रही लड़ाई थी,
जिसमे कितने जांबाजों ने जोखिम उठाया था,
सदा कर्जदार रहेगा ये वतन उनका,
जिन्होंने हमारे लिए शहादत को स्वीकारा था,
चारों ओर हो रही गोलियों की बौछार थी,
कितनी भयानक वो रात थी। (३)

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25 NOV AT 23:40

रुख बदलती है ज़िन्दगी,
सुख की चांदनी प्रसरती है ये
और दुख का अंधकार भी।

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25 NOV AT 22:59

ફક્ત હું અને મારો એહસાસ છે,
ફક્ત હું અને મારો સંગાથ છે,
ફક્ત હું અને મારી આકાંક્ષા છે,
ફક્ત હું અને હું જ છું.

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23 NOV AT 12:26

जहां सावन की हरियाली के ही चर्चे हो वहां,
पतझड़ में बिखरते पत्तों को कौन समझ पाता है?

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15 NOV AT 13:56

A egofree mind,
A grudge free heart,
And
A helping hand without
any expectation in return.

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7 NOV AT 8:14

કેવી તે આ ખુદા ની રીત છે,
આંખો થી વરસતું મુશળધાર ચોમાસુ છે,
છતાંય હૃદય મા લાગણી નો દુકાળ કેમ છે?

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31 OCT AT 11:22

a destination of their dreams,
But,only the one's who take
courage to walk on path,
reaches the destination.

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