जीवन ख़ुद में एक उपलब्धि है।
सुबह शाम दिन रात की जुगत
पसीने में सनी प्रेम की रोटी है।
गहरी साँस लेने और बच्चों की
शैतानियों पर मुस्कराने तक
कितनी प्यारी बातें होती हैं।
बीच रात उठ कर ज़रा
सिर पर हाथ फेर देना,
किसी खाँसते दोस्त को
दौड़ कर पानी दे देना।
कभी ढूंढना साथ मिल,
खोया कुछ सामान ज़रूरी।
बताना तुम्हारी मुश्किलें,
रहेंगी मेरी मुश्किलें भी।
सुलझाना ज़िन्दगी के बेतुक किस्से
साथ बैठ बैठ हँस हँस ,
हमारी गलतियों गलतफहमियों पर
गहरा जाना साथ फिर फिर।
ये सब सुकूँ और सारी नमधें
क्या और कहीं मिल सकती हैं?

- प्रज्ञा