Pratik Raj Mishra  
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Joined 26 May 2017


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19 OCT AT 23:02

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16 OCT AT 23:16

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14 OCT AT 20:17

मेरे लिए जहाँ था जो
मेरे बस का कहां था वो

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1 OCT AT 15:53

दर्द से है गहरी बड़ी यारी हमारी
सबको ही महंगी पड़ी यारी हमारी

इश्क़ दोनों को है आंखें बोलती हैं
और चुप रहने पे अड़ी यारी हमारी

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30 SEP AT 14:02

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26 SEP AT 23:14

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25 SEP AT 0:19

ज़िंदगी के पन्ने तो पड़े थे खाली
तू मिला तो मैंने भी ग़ज़लें कमा ली

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24 SEP AT 23:21

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11 JUN AT 0:59

कुदरत में घुल गई इक कमाल की ख़ुशबू
आती है फूलों से तुम्हारे बाल की ख़ुशबू

बारिश के बाद मिट्टी से मुझको याद आते हैं
तेरे भीगे लब और तेरे गाल की ख़ुशबू

उलझने सुलझाने बैठा , तो उठा सवाल
क्या आती होगी विक्रम से बेताल की ख़ुशबू?

घर से दूर होकर भी घर मुझमें रहा है यूं
आती हो सूखे पत्तों से जैसे डाल की ख़ुशबू

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29 APR AT 13:54

एक बस तुझको ही खोना बाकी था
इस से बुरा और क्या होना बाकी था

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