Pratik Raj Mishra  
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Joined 26 May 2017


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Joined 26 May 2017
Pratik Raj Mishra 3 DEC 2019 AT 19:38

ये सोच सोच हम वक्त गुज़ार देते हैं
लोग क्यों अपनी ख्वाहिश मार देते हैं

और क्या उन्हें कभी इश्क़ नहीं हुआ
जो शादी के लिए इश्तिहार देते हैं ?

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Pratik Raj Mishra 31 AUG 2019 AT 19:46

गायब मेरे गांव की तितलियां थी सारी
उठनी तुझपे ही तो उंगलियां थी सारी

इस साल पहाड़ों पे बर्फ़ ही नहीं टिकी
शायद जलने लगी तुझसे वादियां थी सारी

इश्क़ में क्या हुआ किसी को क्या बताना
बातें जैसी भी थी हमारे दर्मियां थी सारी

करने लगी थी वो उस बूढ़े बगुले पे भरोसा 
बहुत नादान उस तालाब की मछलियां थी सारी

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Pratik Raj Mishra 15 JUL 2019 AT 21:23

कोशिश करने पर भी इनसे निकलती नहीं एक बूंद
मेरी आंखें हो गई हैं अब इस शहरी ज़मीन जैसी

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Pratik Raj Mishra 8 JUL 2019 AT 1:16

मैं लिखता हूं प्रेम पत्र

(कविता अनुशीर्षक में)

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Pratik Raj Mishra 3 JUL 2019 AT 20:06

मेरी दुनिया की कहानी कहने में
गला सूख जाता है पानी कहने में

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Pratik Raj Mishra 16 JUN 2019 AT 20:29

पहले जब भी कभी बुरे हालात होते थे
कोई फिक्र नहीं थी , पापा साथ होते थे

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Pratik Raj Mishra 10 JUN 2019 AT 16:25

मेरे छत पे सीलन सीलन रहती है
शायद मेरे ऊपर वाला रोता है

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Pratik Raj Mishra 21 MAY 2019 AT 12:04

आलू पाया जाता है , सबके रसोईघर में
फिर चाहे हो वो शुद्ध शाकाहारी
या हो कोई बड़ा मांसाहारी

अगर कुछ न हो खाने को, तब भी बन जाता है
कुछ न कुछ , आलू से
जैसे सबका पेट भरना हो इसकी ज़िम्मेदारी

खास होकर भी ये कितना आम होता है
इसे नहीं मिलती कभी इज्ज़त
पनीर या मांस जितनी
जबकि आलू बिन रसोईघर
शायद चल न पाए ठीक से
एक पूरे दिन

मैं बाज़ार से खरीदे आलू घर लाकर
फैला देता हूं किचन में
ये सोचते सोचते
की कितना एक सा हाल है
आलू और औरत का

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Pratik Raj Mishra 16 MAY 2019 AT 0:06

शराब की बोतलों पे
बत्तियां लगाकर
और कुछ रंग चढ़ाकर
वो उनमें बना देती है
एक पूरा ब्रम्हांड

मेरी छोटी बहन को
बड़ी आदत है
मेरी बुरी आदतों को
खूबसूरत अंत देने की

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Pratik Raj Mishra 15 MAY 2019 AT 1:08

एक पल कि सही
खुशी तो मिलेगी
उस दो दिन के भूखे
तीन साल के बच्चे को
जो रोज़ घूमता है चार मोहल्ले
अपने पांच दोस्तों के साथ
उठता है प्लास्टिक की छह बोतलें
फिर तलाशता है सातवें को
शाम के आठ बजे तक...

ये सोचते सोचते मैंने
निकाले जेब में पड़े नौ नोट
दस रुपए के
और डाल दिए
कूड़ेदान में

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