Prakhar P. C. Upadhyay   (...प्रखर)
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Joined 22 March 2018


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नजदीकियां अब चुभने लगी हैं
पहाड़ी वादियों में रहना लुभाता है
शहरों का शोर काफी बढ़ने लगा है

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एक बार दिल पर लिख कर देखो
आगाज़ प्यार का ऐसे ही होता है
तुम एक बार सीख कर तो देखो

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कब से चूल्हे पर बैठा रखा है

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५०० का रिचार्ज करा दे

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तेरे प्यार की
वो साथी हैं
इंतज़ार की

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भिगोती नहीं
आती हैं और
चली जाती हैं

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१.इंसान अहम में या वहम में क्यों रहता है?
२. सुख की उम्र कम और दु:ख की
ज्यादा क्यों होती है?
३. जब ईश्वर ने कोई पाबंदियां नहीं
लगाईं तो समाजों की इतनी
खोखली पाबंदियां क्यों?

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सितारों से तुम कहना
मेरा सितारा पहुंचा दो
मुश्किल है अब सहना

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Hi Bro, Aaing aur Jaing?

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मैं तुम्हें ढूंढते ढूंढते
थक गया हूं तुम्हारे
कदम चूमते चूमते

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