Poonam Archana Singh   (Poonam Archana Singh)
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Joined 6 March 2017


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Joined 6 March 2017
Poonam Archana Singh 2 OCT AT 17:50

बारिश की बूँद सी होती है स्त्री
सूरज के स्पर्श मात्र से समेट लेती है
वो ताप जो असंख्य किरणों से बना है
सोख लेती है बस कुछ आवश्यक ऊष्मा
बची हुई फैला देती है अपने आसपास
अंकुर के प्रस्फुटन का आनंद सब ओर
इस भाव की अंतरात्मा के केन्द्र में है स्त्री
और सदैव ही रहेगा परिधि पर पुरुष ।

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Poonam Archana Singh 2 OCT AT 13:26

Follow your heart, and explore your dreams. Acclamation comes with a pack of risks.

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Poonam Archana Singh 22 SEP AT 18:51

your favourite dish or the worst.
Matter of perception!

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Poonam Archana Singh 15 SEP AT 10:23

those that cannot be bought by money....compassion, love, empathy and respect, to name a few!❤

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Poonam Archana Singh 11 SEP AT 15:36

अहसास ऊँचाईयों का है अच्छा
बस दोस्त छूट न जाए कोई सच्चा
खलता है गर तो बढ़ा लो हाथ वरना
ता उम्र रिसता रहता है रंग कच्चा

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Poonam Archana Singh 5 SEP AT 12:11

दश्त औ सहरा में फ़र्क कितना
हो नम चश्म पर न आए बाहिर इतना

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Poonam Archana Singh 27 AUG AT 14:02

चाँद तकता है ज़मीं को फ़लक से
ज़मीं कुछ ज़्यादा ही ख़ामोश है
बर्दाश्त भी कमाल का फ़न है

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Poonam Archana Singh 25 AUG AT 12:54

जला हूँ मैं,
इस आशा में कि,
ठंडी बयार ले आओगी तुम,
दिन के किसी पहर बादल के पीछे,
उमड़ घुमड़ हलचल मचाती भरी हुई,
मेरे ऊपर बरस जाने के लिए...
निरर्थक

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Poonam Archana Singh 25 AUG AT 7:59

दिहाड़ी दिहाड़ी कटती ज़िंदगी
पूरी क्या है इतनी समझ कहाँ
सुबह जला चूल्हा साँझ के फेर में
तिल तिल कर जलती ज़िंदगी

आ रहा त्यौहार बापू की लाठी टूटी
अम्मा की भी तो धोती कुचैली
रेहन का मिल जायेगा पैसा कल
बस इतनी ही महत्वकांक्षी ज़िंदगी

बाज़ार के झुनझुने पायलों की झंकार
आँखों में पाने की पर न दिखाने की
गुलबिया के सपनों वाली साड़ी पर
घर के सपने पूरे करने को डटी ज़िंदगी

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Poonam Archana Singh 19 AUG AT 18:25

Pitter patter of the raindrops
Swaying of lush green crops
Makes me weave the day in a poem
With glistening fresh muses in rhythm

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