Peeush singh ( vishu)   (😊diary of _Peeush_🤔)
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Joined 15 April 2019


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Joined 15 April 2019

रात को दिन बनाया जाये
किताबो को इश्क़ बनाया जाये
भूख बढती ही जा रही दिन व दिन
नौकरी को हवस बनाया जाये

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23 JUL AT 21:40

कलम अब साथ छोड़ना चाहती है
कागज भी अब साथ नही दे रहे हैं //
लब्ज़ भी गले में सिमट से गए है
वो आज कल बहुत दर्द दे रहे हैं //

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22 JUL AT 20:30

बरसे नही इस साल बादल भी बेवफाई कर रहे है
अब किसान भी शहर में नौकरी करने की बात कर रहे हैं

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21 JUL AT 20:07

ए मिट्टी दर्द में आंसू भी सूख गए ,
क्या बादलों ने बेवफाई कर दी //
इस बार वो क्या आना भूल गए ,
या मोहब्बत किसी रेत से कर ली //
वैसे हाल तो मेरा भी कुछ ऐसा ही है,
मेरा महबूब रोज गुजरता था मेरी गली से,
आज उसने भी अपनी रास्ता बदल ली //

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20 JUL AT 18:39

मुझे अब हर कोई रौंद के चला जाता है इक राह की तरह
मुझसे वो अब इश्क़ नही करता ,उसे मै लगता हूं गुनाह की तरह

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19 JUL AT 16:14

समझ नही आता ये आइना मेरी नक़ल करता है या में इसकी
कहीं गुस्से में तोड़ न दूँ , डर है कि कही में ही न टूट जाऊं
क्यों कि मेरा आईना भी वो ही तो है

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18 JUL AT 13:58

मै मिट्टी वंजर हो गई हूँ
है कोई किसान जो मुझसे इश्क़ कर ले

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17 JUL AT 15:00

लगा ही चुके खुद को जंग-ए-इश्क़ में, फिर कहां जान देखता है
भला जो इश्क़ करता है ,कहां जाति मकान देखता है

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16 JUL AT 13:34

वो किरदार भी बेखहूबी निभाते हैं,
और अदाकारी भी है दिवानगी की तरह ।

वो इश्क़ भी बड़ा गज़ब का करते हैं ,
और सक्स बदलते हैं लिबाज़ो की तरह ।।

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15 JUL AT 13:05

दर्द है थोड़ा और बढ़ाया जाए , दिल में जो है वो उसे फिर बताया जाये ।
इजहार ए मोहब्बत बतलाऊँ कैसे उसे , चलो स्टेटस ही लगाया जाये ।।

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