Parishu Tiwari   (Parïshū)
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Joined 23 February 2020


Joined 23 February 2020
15 SEP AT 20:03

अंधेरों से निकल के तेरी यादो से मैं लड़ गयी
रौशनी का संग पा के टूट के भी संभल गयी

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14 SEP AT 10:10

हक़ीक़त में बदलने के इरादे से कुछ ख्वाब नए संजोए रही हूँ
ख्वाबो के नगर में मैं एक नए सफ़र पर निकल गयी हूँ

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2 SEP AT 22:24

हक़ीक़त जान कर भी
उसे नजरअंदाज किया करती थी
उस बेवफा के वादों पर
आंखे बंद कर विश्वास किया करती थी
वो झूठ बोल कर भी
लोगो के सामने ईमानदार बना फिरता था
खुद से की हुई बेवफाई को भूल
लोगों से वफ़ा की बात किया करता था

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29 AUG AT 11:40

जिससे बनती जीवन रेखा मैं अंतहीन वह बिन्दु हूँ
हिन्दी हिन्दुत्व मेरा परिचय है गर्व मुझे मैं हिन्दू हूँ

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21 AUG AT 19:34

जिन लम्हों के तुम कभी हिस्सा हुआ करते थे
आज वो हर लम्हा एक किस्सा बन कर रह गया है

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16 AUG AT 17:27

उसे भुलाने की ये आखिरी रस्म निबाह रही हूँ
आज बरसों बाद उसे देख मुस्कुरा रही हूँ

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13 AUG AT 19:27

संगिनी बन तेरी जिंदगी में शामिल हो जाऊंगी
मोहब्बत का जोङा पहन मैं तेरी दुनिया में आऊंगी

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9 AUG AT 12:17

समाज की बंधी बेड़ियों से
खुद को आज़ाद कर रहीं हूँ
आज मैं अपने ख्वाबों के
सफ़र पर निकल रही हूँ
दूर कर खुद को उन
निगाहों के खौफ से
आज मैं अपनी मंज़िल के
बेहद क़रीब आ खड़ी हूँ
समाज की बेड़ियों से
आज़ाद कर खुद को
आज मैं अपने ख्वाबों की
उड़ान भर रही हूँ

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5 AUG AT 20:38

रोते हुए को हँसा दे और हँस्ते इंसान को भी रुला दे
कुछ ऐसी नायाब है
वो लड़की नहीं चलती-फिरती आफत की दूकान है
मेरे होठों पर छायी शरारत भरी मुस्कान है
पतझड़ में बारिश की पहली बरसात है
मुस्कराहट उसकी शान है खुबसुरती उसकी पहचान है
सिर्फ दोस्त ही नहीं वो मेरी ख़ास है
मेरी परछाई वो मेरी जान है❣

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1 AUG AT 8:24

इस वक़्त में तुम्हारी
कमी पहले सी है
मेरे आँखों में ये नमीं
आज भी कुछ वैसी है
फर्क सिर्फ इतना है कि
इन होठों पर ये मुस्कान
उन बीते वक़्त की ख़ुशी
की है हा अब मुलाकातें
तो नहीं होती हमारी पर
आज भी इन बूंदों में तुम्हारी
छवि कुछ वैसी ही है‍‍‍‍‍‍‌‌‍...

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