Parishu Tiwari   (PāriShū)
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Joined 23 February 2020


Joined 23 February 2020
26 JAN AT 10:18

दुवाएं निकले जो तेरी तरक्क़ी की है
इन हवाओ में महक मेरी मिट्टी की है
रक्त से सींचा है समर्पित मेरा ह्रदय है
तीन रंगो में रंगा ये तिरंगा मेरा परिचय है

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10 JAN AT 12:54

अपनों से मिले संस्कार मेरी पहली पहचान है
मेरी परवरिश मेरी खूबसूरती का दूसरा नाम है❣

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8 JAN AT 20:48

मैं वो किताब हूँ जो पढ़ी तो जाएगी
मगर पढने वाले के समझ में नहीं आएगी

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8 JAN AT 20:40

जो कहनी है बाते उसे कहते कहते रुक जाती हूँ
बेमतलब की बातें अब बिना सोचे ही कह जाती हूँ
लोगो की भीड़ में भी खुद को अकेली सी पाती हूँ
अपने अंदर के खालीपन को इन्ही बातों से बेहलाती हूँ
हर बात में अब बेवजह ही मुस्कुराती हूँ
ज़िक्र न हो गमो की इस डर से सबसे छिपाती हूँ
लोगो की बाते सुन थोड़ी बेचैन सी हो जाती हूँ
बिना कहे ही कुछ बातें दिल में दफन कर आती हूँ
फिर भी एक उम्मीद,अरमान,आखों इंतज़ार लिए फिरती हूँ
एक डोर है विश्वाश की इस डोर को थामे रहती हूँ
उस एक दिन की आस में हर रोज़ नए ख्वाब बुनती हूँ
जिससे बया कर दू हर राज़ मै उसी की राहे तकती हूँ

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31 DEC 2020 AT 21:23

मेरे एहसासों को कभी महसूस भी कर लिया करो
उनके कहे बिना ही उनकी ज़ुबान समझ लिया करो

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31 DEC 2020 AT 17:36

मुश्किलो में तुम मेरी ढाल बनना
मै गिरु तो तुम मुझे संभाल लेना❣

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13 DEC 2020 AT 19:37

तो इसके करीब से गुजरिये
इसके हर पहलु को एक नयें नज़रिये से समझिये

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21 NOV 2020 AT 12:20

गैरो से मिले गम थे जो अपनों में वो बाँट बैठें
अपनों के हक़ की खुशिया वो गैरों में लूटा बैठें
नाकामियो में साथ थे जिनके वो शोहरतो में भुला बैठें
अपनों से करने वाली बातें भी वो आज महफ़िलों में सुना बैठें

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20 OCT 2020 AT 15:35

कभी जो हाथ थामा था
आज अकेला छोड़ आये हो
मेरी खुशियों का सौदा तुम
गमो के साथ कर आये हो

पलकों पर बिठा जिसे आज
जमीं पर छोड़ आये हो
एक दफा संभालकर तुम
सौ दफा दिल तोड़ आये हो

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20 OCT 2020 AT 14:29

मान लिया मेरी गलती थी आँखे बंद कर
जो तुझपे भरोसा किया करती थी
आँख खुली तो जाना सच
कसूर तेरा नहीं कसूर
तो मेरे दिल की थीं

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