Neel Kamal   (नील कमल)
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Joined 20 August 2018


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Neel Kamal 21 DEC 2019 AT 20:59

"चार सालों का फिक्स डिपोजिट
 मैच्योर हुआ है आज

 फरवरी को ब्याज में
 एक पूरा दिन मिला है ।"

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Neel Kamal 22 OCT 2019 AT 15:55

अब, जब कि तुम चली गयी हो
मेरी जिंदगी से
मैं सोचता हूँ कि मुझे क्या करना चाहिए ?

तुम्हारी तस्वीरें दीवालों से
आलमीरा से, किताबों के पन्नों से
निकाल देनी चाहिए ?

नशे की बेहोशी में डुबो देना चाहिए खुद को ?
या, पंखे से फंदा लगाकर
खुदकुशी कर लेनी चाहिए ?

या फिर, इंतज़ार करना चाहिए
कि प्रकृति की तरह ही
पतझर के बाद
लौटेगा कोई वसन्त

जब वसन्त आता है
तो फूल जरूर खिलते हैं,
मंजरे भी लगती हैं,
और बदलते वक्त के साथ
फल भी आ ही जाते हैं,
पर पतझर में टूटे पत्तियों के दाग
डालियों पर हमेशा के लिए रह जाते हैं ..
ये दाग मुझे पसन्द नहीं ।

देखा है मैंने
जख़्म अक्सर नासूर हो जाया करते हैं ।

तो बताओ मुझे
अब, जब कि तुम चली गयी हो
मेरी जिंदगी से मुझे क्या करना चाहिए ?

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Neel Kamal 14 SEP 2019 AT 9:43

बिना मिले मुझसे
जब तुम, मेरे शहर से गुजरती हो
तुम क्या जानों
मेरे दिल पर क्या गुजरती है ?

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Neel Kamal 10 SEP 2019 AT 14:04

कॉलर पर छूटे लिपस्टिक के दाग,
पीठ में धँसकर टूटा नाख़ून

सब बेच देते हैं बाजार में
मोहब्बत में हारे हुए लोग ।

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Neel Kamal 25 JUL 2019 AT 16:50



... किसी और के हिस्से आए जो ज़ुर्रत,
इल्जाम वो मुझे दे दो, मैं क्या कम बुरा हूँ ?

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Neel Kamal 13 JUN 2019 AT 11:04

फुर्कत पूछती है
सिगरेट चुनूँ,
शराब
या बस मर ही जाऊं अब ?

मन कहता है -
जिंदा रहने को तुम्हारा ख़ुमार ही काफ़ी है  ।

(* फुर्कत = जुदाई, ख़ुमार - नशा )

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Neel Kamal 12 JUN 2019 AT 9:16


गली के मोड़ पर वो जो मेंहदी का पेड़ है
आज से चौदह साल पहले
उसे इसी मेंहदी के पेड़ को लगाते देखा था ।

एक रोज
मेंहदी के सारे पत्ते नोचकर
उसकी हथेलियों पर सजा दिए गए

मेंहदी ठूंठ पड़ा है तब से
तब से मेरा मन भी .....

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Neel Kamal 11 JUN 2019 AT 15:45

एक तिल उग आया है
मेरे कांधे पर

तुम्हारे अलविदा कहकर जाते वक्त
यह चिपक गया था मुझसे शायद

जैसे बिंदी चिपकी रह जाती थी तुम्हारी
हर सुबह मेरे सीने पर

तुम नही हुईं
ये तिल तो उम्र भर के लिए होते हैं न ?

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Neel Kamal 14 FEB 2019 AT 13:00

***
मैंने एक कहानी लिखी
सबने सराहा

उसने बस आह भरकर कहा -
"काश ! यह एक कहानी होती"
***

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Neel Kamal 26 OCT 2018 AT 18:48

***
गुदवा दो अगणित शिलालेख,
लिखवा दो अनेक ग्रन्थ,
या खड़े कर दो असंख्य संगमरीमरी महल

पर तुम्हारी तमाम कोशिशों के बावजूद
अंत तक
पृथ्वी पर बस बचेंगी
तितलियों द्वारा चूमी गयी
फूलों की पंखुड़ियाँ

***

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