Neel Kamal   (नील कमल)
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Neel Kamal 25 JUL AT 16:50



... किसी और के हिस्से आए जो ज़ुर्रत,
इल्जाम वो मुझे दे दो, मैं क्या कम बुरा हूँ ?

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Neel Kamal 13 JUN AT 11:04

फुर्कत पूछती है
सिगरेट चुनूँ,
शराब
या बस मर ही जाऊं अब ?

मन कहता है -
जिंदा रहने को तुम्हारा ख़ुमार ही काफ़ी है  ।

(* फुर्कत = जुदाई, ख़ुमार - नशा )

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Neel Kamal 12 JUN AT 9:16


गली के मोड़ पर वो जो मेंहदी का पेड़ है
आज से चौदह साल पहले
उसे इसी मेंहदी के पेड़ को लगाते देखा था ।

एक रोज
मेंहदी के सारे पत्ते नोचकर
उसकी हथेलियों पर सजा दिए गए

मेंहदी ठूंठ पड़ा है तब से
तब से मेरा मन भी .....

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Neel Kamal 11 JUN AT 15:45

एक तिल उग आया है
मेरे कांधे पर

तुम्हारे अलविदा कहकर जाते वक्त
यह चिपक गया था मुझसे शायद

जैसे बिंदी चिपकी रह जाती थी तुम्हारी
हर सुबह मेरे सीने पर

तुम नही हुईं
ये तिल तो उम्र भर के लिए होते हैं न ?

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Neel Kamal 14 FEB AT 13:00

***
मैंने एक कहानी लिखी
सबने सराहा

उसने बस आह भरकर कहा -
"काश ! यह एक कहानी होती"
***

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Neel Kamal 26 OCT 2018 AT 18:48

***
गुदवा दो अगणित शिलालेख,
लिखवा दो अनेक ग्रन्थ,
या खड़े कर दो असंख्य संगमरीमरी महल

पर तुम्हारी तमाम कोशिशों के बावजूद
अंत तक
पृथ्वी पर बस बचेंगी
तितलियों द्वारा चूमी गयी
फूलों की पंखुड़ियाँ

***

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Neel Kamal 25 OCT 2018 AT 23:57

***
तुम राधा रही होगी,
या मीरा
या मेरी असंख्य प्रेमिकाओं में से कोई एक

मैं नहीं जानता
तुम कौन थी ?

पर तुम्हारे प्रेम ने
मुझे कृष्ण बना दिया ...

***

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Neel Kamal 24 OCT 2018 AT 11:56

"ढक्कन"
..............

जाते-जाते
कितनी जोर से बन्द कर दिया है तुमने
मेरे दिल का ढक्कन ,
कितना भी दम लगा ले कोई
ये खुलता ही नहीं !

आ सको जो कभी इधर
अपने पल्लू से पकड़
ये ढक्कन, जरा ठीला कर जाना,
लोगों को आवाजाही की गुंजाइश मिल सकेगी।

बन्द से इस कमरे में , तन्हा
अब बहुत घुटन होती है यार !

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Neel Kamal 7 OCT 2018 AT 1:15

"They sold their dreams
to buy a loaf of bread

If they didn't sell it
they could be able to buy
breads for others. "

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Neel Kamal 7 OCT 2018 AT 0:46

गर मुमकिन हो
लौटने देना तुम
मेरी मोहब्बत की अनुगूँज

उस मोहब्बत की
जो मैंने की
तुमसे, तुम्हारे बिना जाने हुए

मैं महसूसना चाहता हूँ
उन बोसों की तपिश
जो मेरे ओंठों ने रखे
तुम्हारे अधरों पर
बिना छुए तुम्हें

जेहन के सारे इंद्रधनुषी जज्बात,
जीवन के अगनित वर्षों का वसंत,
और पूनम की वो सब रातें
जिनपर सिर्फ तुम्हारा हक़ रहा

इको होकर लौटने देना उन्हें
गर मुमकिन हो
लौटने देना तुम
मेरी मोहब्बत की अनुगूँज

कि मैं प्रतिक्रिया चाहता हूँ
मोहब्बत में की गई
मेरी प्रत्येक क्रियाओं की

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