3 FEB AT 9:46

कहने को तो ये रीत पुरानी.....
भाई भाई में प्रीत पुरानी,,
कुनबा तो सब नाम का है बस.......
परिवार ने ही हैं बात निभानी,,
लाज शर्म और लोक समाज......
इन सबकी हैं बात बेगानी,,
रिश्तेदारों की क्या ही कहना अब.....
इन सबने हैं लड़ाई करनी,,
कहने को तो ये रीत पुरानी......
कहने को तो ये रीत पुरानी।।

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