Meghana Bose   (Meghana Bose Chatterjee)
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Joined 14 November 2016


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Joined 14 November 2016
Meghana Bose 3 JUN AT 21:03

बारिश का मौसम है झूम कर आया,
किसी को डुबोया है उसने मिट्टी की सौंधी खुशबू में कहीं,
तो किसी के मिट्टी के घर को है उसने खुद में बहाया।
किसी के घर में है पकौड़ों की महक फैली,
तो किसी के महीने भर के आटे को
है बारिश की बूंदों ने भिगोया।
चार पहियों पे घूमने वालों को
बौछार नजर आई है तो खुश हैं वो,
चार पैरों पे चलने वालों वो जीव लेकिन
किसी टूटे पेड़ के नीचे, ठिठुर के है सोया।
रहता है ऊंची इमारतों में जो,
काले गरजते बादलों को उसने
तस्वीरों में है कैद किया,
जिनकी छत ही आसमान थी,
उनको उसी आसमान से न्योता है आया।

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Meghana Bose 3 JUN AT 19:51

यादों के बादल गरजे है जो आज,
लगता है अब परछाइयों की बरसात होगी।
आसमान में तो चमक रहेगी बिजलियों की, मगर
इस आंख की हर रात अब अमावस होगी।

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Meghana Bose 17 MAY AT 14:55

कई सालों को बस कुछ पलों में लांग लिया
उन सालों कि आधी - टूटी यादों को खूंटों पर टांग दिया
जिसने भी देखा कभी दीवार पर इन तस्वीरों को
उनपर चिपकी मुस्कान को सबने सच्चा मान लिया

इच्छाओं के ऊन से झूठी संतुष्टी की गर्माहट बुन रहे है
हकीकत के पल तो अब बस कुछ ही रह गए हैं
नींद के घंटे सिकुड़ कर मुट्ठी में समाने लगे हैं
और सपनों के दाम उतने ही बढ़ चले हैं

रंगीन दुनिया देख कर औरों की,
अपने चांद को भी गुलाबी रंग दिया
जब मिटी नहीं भूख विदेशी ज़ायको से भी,
अपनी सूखी रोटी को एक काल्पनिक नाम दिया

चल पड़े है चाल दूसरों की, खुद की चप्पलें रगड़के
थक चुके है बस कुछ ही दशक का सफर तय करके
शोर इतना है अब तो कि अपनी रूह की चीखें भी सुनाई नहीं देतीं
खरीदे है चार पहिए भी सब ने, अपने पंखों को बेच कर के

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Meghana Bose 6 MAY AT 17:19

तेरी सोच और विश्वास में है धार जितनी
तेरे इरादों और तेरे अनुभव की कहानियों में भी
उतनी ही तो है

तेरे डर और तेरी जीत के बीच है दूरी जितनी
तेरे ज़मीन और तेरे आसमान के बीच भी
उतनी ही तो है

लोगों की ईर्ष्या और संदेह में है आग जितनी
तेरे ख्वाहिशों और चाहतों में भी
उतनी ही तो है

तेरी भूल और तेरे अहंकार के बीच है दूरी जितनी
तेरे घुटनों से ज़मीन के बीच भी
उतनी ही तो है

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Meghana Bose 8 APR AT 23:47


Prasoon Vyas

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Meghana Bose 7 APR AT 15:03

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Meghana Bose 7 APR AT 14:34

यूं तो उखड़े उखड़े हैं सब
इस तबाहगार तूफ़ान से मगर,
दो आंखें हैं जो खुश हुई हैं
इस बवंडर को देख कर।

आया नहीं कभी जो
लाख बुलाने पर भी,
आज घर को लौटा है वो,
इस तूफ़ान से डर कर।

कहती है वो कि क्या हुआ जो
घर की छत लूट ली इस तूफ़ान ने आकर,
अरसे बाद मुस्कुराहट देखी है आइने में आज,
जो बंजर कर गई थी चेहरा, बस आंसूओं के
निशान छोड़ कर

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Meghana Bose 7 APR AT 11:49

घंटो बिता देते हो,
मौखने में बैठ कर तुम
कुछ वक़्त कभी हम पर भी
ज़ाया कर दिया करो,
चंद पंक्तियां क्या, पूरी किताब लिख दूं
तुम पर मै,
सिर्फ रातों को छिप कर नहीं,
कभी उजाले में भी
हमारी गली आया तो करो

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Meghana Bose 29 MAR AT 10:03

शिकायतें मनुष्य की खतम नहीं है होती
"आज धूप नहीं है निकली",
"आज काश बारिश होती"
पर प्रकृति से सीखो, कभी नहीं ये हमसे
कोई भी दुखड़ा रोती
है आज ही ये मौका, हम पश्चाताप कर लें
प्रकृति कि संग कोई सांठ - गांठ कर ले
इस धरती और खुद को रोगमुक्त कर ले
कि और अब किसी पे रहें ना बोझ बन के

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Let the Earth heal.

#meghanawrites #yqbaba #yqdidi #earth

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Meghana Bose 10 FEB AT 7:34

हवाओं की संगत में, बदले हैं
बादलों के रूबाब आजकल
कि अब ये मुझे आसमान को
अपना कहने नहीं देते
बाब-ए-ख़्वाब ही कुछ अलग हैं मेरे,
ज़माना हमें उड़ने नहीं देता और हम
खुद पे ज़माने का रंग चढ़ने नहीं देते

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