Meghana Bose   (Meghana Bose Chatterjee)
8.3k Followers · 418 Following

read more
Joined 14 November 2016


read more
Joined 14 November 2016
Meghana Bose 13 JAN AT 22:05

मुस्कुराहट नज़र आती है उसकी
क्यूंकि बदन की तरह
चेहरे पर उसके एक भी दाग दिखते नहीं
कसाईखाने को घर बना बैठी है वो,
जहां रहमत के दाने भर बिकते नहीं।

-


51 likes · 1 comments · 1 share
Meghana Bose 7 JAN AT 7:30

आशा की लहर दौड़ी है अब
कि बंजर ज़मीनों पे भी गुल्सिते खिलेंगे
लिखने रह गए है दास्तां काफी अभी
मेरी कब्र पे भी स्याही के निशां मिलेंगे

-


89 likes · 3 comments
Meghana Bose 6 JAN AT 8:23

क्या रिश्वत दूं मैं
ज़ुबां और नज़रों को अपनी,
कि अब झूठ पर मेरे
पर्दे पड़ते नहीं हैं।
ख्वाबों की तितलियों को अपने
पिंजरे में रखा है बंद यूं तो,
तोड़कर उनको उड़ जाने से ये
कतरा भर डरते नहीं है।
याद आती है अक्सर
बिछड़े ज़माने की मुझको
अल्हड़ सी आंखे अब
भरती नहीं हैं

-


85 likes · 3 comments
Meghana Bose 1 NOV 2019 AT 8:25

चका चौंध कुछ ज़्यादा है आजकल इस शहर में,
सुना है एक अप्सरा आई हुई है।
एक नज़र भर देखने को उसे, लाखों ने
उसके छज्जे पर टकटकी लगाई हुई है।
सूरज और चांद भी साथ नज़र आए है आसमां पर
जो वो ज़ुल्फें सुखाने छत पे आई हुई है
घंटों से बैठे हैं सब दरवाज़े पे उसके,
जो किसीने उसके बाहर आने की अफवाह फैलाई हुई है।
बंद खिड़की से उसके आज रोशनी दिखी है,
लगता है आज फिर उसने बिंदी लगाई हुई है।
सृंगार कर पहली बार निकली है वो घर से,
ये खबर सुनके, आज लाशों को भी मौत आई हुई है

-


77 likes · 5 comments · 3 shares
Meghana Bose 1 NOV 2019 AT 7:49

दिलों के सन्नाटे
पन्नों पर शोर करने लगे हैं,
एहसासों को लिखकर लोग
उसे "गज़ल" कहने लगे हैं।
इश्क का बागीचा
वीरान नज़र आता है आजकल,
अब तो दिलों के हर कहीं
बाज़ार लगने लगे हैं।

-


133 likes · 10 comments · 1 share
Meghana Bose 7 OCT 2019 AT 7:53

She kept all the words that hurt her,
The words that they said not knowing that though words don't have edges, they prick.
She kept not just the words that others threw at her, but also the ones she swallowed, the ones she could have replied them with, but chose not to.
She kept the words that once defined her as strong, but now scrape her and make her weak, from deep within.
She keeps them all, one by one, beading them into a necklace.
"A necklace of words"
And then the world stands to applaud at her strength to stand back and turn the negative words into a beautiful necklace.
She smiles at them. Touches the beads of her necklace and feels proud.
She slowly runs her fingers through each bead, and when her finger reaches her nape, she pulls the string.
Choking, yet smiling.
Death finally comes out of her; the death which was always inside her.

-


Show more
88 likes · 5 comments · 4 shares
Meghana Bose 30 AUG 2019 AT 8:05

लोग काफी हैं यहां,
इंसान कम है मगर।
पक्के है इरादें यहां
पर कच्ची है कोशिशों की डगर।
घड़ी के कांटे भी चल देंगे मर्ज़ी से तेरी,
किस्मत की रेत को कर लो अपनी मुट्ठी में अगर।
किस्से ज़ख्मों के काफी हैं यहां सुनाने को लेकिन
ज़माने की जरूरत है अभी कि बने एक विरोहण की नगर।
चांद को कहते हो अंधेरों में मसीहा फिर भी,
देवता का दर्जा मिला बस सूरज को मगर।
दुनिया में शक्लें सभी की एक ही है साहब,
बस शख़्सियत बदल जाती है उनकी डगर - दर - डगर।

-


146 likes · 6 comments · 4 shares
Meghana Bose 2 JUL 2019 AT 12:40

"तेरी आवाज़ हफ्तों तक बिना सुने
ये मन अक्सर कराह उठता है,
विदेश की हवा ने बदल दिया बेटा तुझे
कि अब तू चिट्ठियां भी कम भेजा करता है"


"माँ, इस तथ्य से तो सभी वाकिफ हैं
तो तुम विज्ञान से अंजान क्यूं?
पानी का भी स्वाद शहर - शहर बदलता है,
मैं भला कौन जो कुदरत का नियम बदल दूं?"


"पानी जिस शहर जाए, उसी शहर का हो जाए,
ये बात तो मुझे भी मालूम थी,
पर उसे जनने वाली धरती से ही अलग होने की प्रवृत्ति
मैंने किसी किताब में ना पढ़ी थी।"

-


110 likes · 13 comments · 14 shares
Meghana Bose 28 JUN 2019 AT 8:25

बचपन की किताबों के पन्ने खोल के कभी बैठूं
तो आंसुओं को आंखो में बंद कर, हंस पड़ती हूं।
नीले पेड़, आसमान गुलाबी, और बिल्लियां लाल।
नारियल के पेड़ पे सेब बने हुए।
उन पर टीचर के लाल कलम से बनाए सितारे और
उनका अक्सर मुझे "बेहद रचनात्मक" कहना।

उसी बुलबुले में बड़ी होती गई और हमेशा ये सोचा कि मैं जो भी बनाऊं,
चीज़ों को जो भी रंग - आकार दूं वो बस मुमकिन ही नहीं,
पर वो एक "कला" है, "रचना" है।
एक समय ऐसा था जब हक़ीक़त ने आंखों पर दस्तक दी,
और मेरे लिए बड़ा मुश्किल था ये मान लेना कि
हर चीज़ का एक निश्चित आकार, रंग, स्थान है।
कि जब पहाड़ों पर बर्फ बनाया हो, तो उस चित्र में सूरज नहीं होता।
अब पेड़ों को एक दायरे के अंदर, केवल हरे रंग से ही रंगना था।
यही दायरे जीवन के हर पहलू में लगाने थे।

आज भी कभी कभी, बेख़याली में मुस्कान को होठों से खींच कर
कानों तक लाल रंग देती हूं
पर दायरे याद आते ही उसे मिटा कर होठों तक सीमित कर देती हूं
जीवन के हर नए पढ़ाव पर एक नया दायरा बनता है
और मै लाल सितारों के सराहना की उम्मीद में
हर बार दायरे के बाहर, अलग रंग भरने की कोशिश करती हूं

-


147 likes · 7 comments · 13 shares
Meghana Bose 9 JUN 2019 AT 12:38

One of the below is a #474 poem and the other is a poem. Following a scheme of number of letters in a poem is just not as easy as breaking a sentence to force it to fit into the scheme.

I saw you there
While you wandered on the clouds above
They never looked prettier.

__ __ __ __ __ __ __ __

While you were excitedly
Wandering on the clouds, you made them
Look prettier than ever.

-


76 likes · 5 comments

Fetching Meghana Bose Quotes

YQ_Launcher Write your own quotes on YourQuote app
Open App