Mayanka Dadu   (..."क़ायनात" کائنات)
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Joined 7 September 2016


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31 JUL AT 21:23

सुना था यूँ तो हमने
कि हो तुम भी हमारे ज़माने की
जाने फिर तुम्हें मोहब्बत
इस ज़माने की क्यूँ हुईं

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25 JUN AT 22:24

तुम लहंगा गुलाबी पहन कर आना
साथ में हवन की लकड़ी और सामग्री लाना
मैं फल, फूल, पंच मेवे ले आऊँगा
पसंद है तुम्हें जो रंग हलका सफ़ेद
वो शेरवानी पहन आऊँगा
मिलेंगे उसी मंदिर के पीछे
दो गली छोड़ आम के पेड़ के नीचे
बैठ पर जहाँ करी थी ढेरों बातें
और किए एक दूसरे से हज़ार वादे
सुनो.. भूल जाऊँ अगर मैं लाना वरमाला
तुम करके फ़ोन मुझे फिर याद दिलाना
और जो मैं कह दूँ, हाँ पता है भई..
तो तुम मुझसे रूठ न जाना
तुम मंत्र सारे पढ़ दे ना
मैं रस्म अदा हर कर दूँगा
हम वचन अपने अपने कह देंगे
मान कर अग्नि को साक्षी, सात फेरें भी ले लेंगे
दो रूह को एक इस तरह कर देंगे
क़ायनात में कल, सहर से जब मिलेगा चाँद
ख़्वाबों में ही सही, हम दोनो विवाह कर लेंगे

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23 JUN AT 18:09

पता है..
तुमसे हर बात कहने का मन करता है
तुमसे लड़ना अच्छा लगता है..
रूठ जाती हो जब तुम अक्सर
तुम्हें मनाना अच्छा लगता है
सुनो.. मुझे तुमको
अपना बुलाना अच्छा लगता है
तुम्हारा मज़ाक़ भी सच्चा लगता है
तुम्हारी वो बातें दिल छू जाती है
जब तुम्हारे सपनों में
अपनी मुलाक़ातें हो जाती है
तुम्हारे साथ जाने क्यूँ उम्र बिताने का
मन करता है
इस क़ायनात में मुझे तुम्हारा बन ना
और तुम्हें अपना बनाने का मन करता है

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22 JUN AT 7:24

देख कर तुम्हें, तुम्हारी तस्वीरों में
अब हम, तुम्हें जाना करते है
जब तुम नज़दीक थी..
तब नज़दीकियाँ नहीं थी
आज तुमसे इतनी नज़दीकियों पर भी
तुम मेरे नज़दीक नहीं

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20 JUN AT 7:37

मसरूफ़ियत के आलम से
कुछ पल तो निकाल सकते हो
माना नहीं करनी तुम्हें बातें हज़ार
पर मेरा हाल तो जान सकते हो
हाँ.. है बात और ये के हमसे
नज़र चुराने के तरीक़े हो ये सारे
अजी.. इतनी तकलीफ़ें न उठाओ
तुम हमें सीधा ग़ायब हो जाने को
बता सकते हो..

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19 JUN AT 7:42

तुम्हारी हर तस्वीर में छिपी
कहानी सुनना चाहता हूँ
लेकर तुम्हें बाहों में ज़िंदगी भर
हंसी लम्हे बुनना चाहता हूँ
है नहीं आरज़ू तुमसे
पल दो पल की बातों की
नाम से शुरू हो कर..अजी सुनिए
पर जो जाता है..
यार मैं तुम्हारे साथ उस सफ़र को
चुनना चाहता हूँ

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8 JUN AT 8:48

कभी तो वो,
हमारा भी हाल पूछे
कभी करे ज़िक्र..
के उन बिन दिन हमने कैसे काटे
कभी कहे.. हाँ हम भी तुम बिन ठीक नहीं..
कभी.. तो वो हमें अपना माने..
कभी कहे.. अब उम्र भर
हम साथ रहेंगे
कभी.. कहे.. देखो
अब हम झगड़ा नहीं करेंगे
कभी.. तो वो बिन कहे
हमारे जज़्बात समझे
काश.. कभी.. तो वो भी हमें अपना समझे

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6 JUN AT 22:14

कुछ रोज़ की बातों के बाद
फिरसे ख़ामोश हो जाओगी
घट कर जब बढ़ेगा चाँद
यार तुम फिर ख़फ़ा हो जाओगी
करो वादा, थाम रही हो हाथ जो अब
तो तुम फिर छोड़ कर नहीं जाओगी..
बांध लेंगे हम दोनो एक दूसरे को इश्क़ से
आज की तरह ही मैं रहूँगा हमेशा साथ
और तुम भी उम्र भर साथ निभाओगी
कहो.. भुला कर तमाम
फ़र्क़ उम्र.. के रस्मोंरिवाजों के
क्या मेरे साथ एक घर बसाओगी..

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5 JUN AT 21:31

देखा था तुम्हें
बचते बचाते बारिशों से
और लड़ते उस छाते से
जो बंद नहीं हो रहा था तुमसे
कुछ खोयी खोयी सी तुम
आ कर बैठ गयी थी गाड़ी में
ना हाल पूछा ना कुछ कहा
बस दो टुक सीधा कहा.. चले ?
हाँ.. कहते हुए मैं भी चल पड़ा
खामोशी मिटाने को पूछा तुमसे
क्या गाड़ी चलाना आता है..
तुम बोली थोड़ा बहुत.. और कम कर दिया AC
वो तुम्हारा माथे पर से पानी हटाना
और बालों को झटका कर फिर बांधना
और एक छाते भीगते हुए जाना..
चाय की चुस्कियों में एक दूसरे को जानना
हाँ.. मुझे आज भी याद है अपनी मुलाक़ात का
वो पहला अफ़साना..

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4 JUN AT 23:31

कहो कब होगा
इफ़्तिख़ार तुम्हारा
मेरे दिन-ओ-शब के हिसाबों में
पता है आज भी होता है
मिलना हमारा यार देखो ख़्वाबों में
भुलाया नहीं जा सकता तुम्हें
बस कह कर ना... जवाबों में
सोचा था उम्र भर का रहेगा साथ तुम्हारा
शायद ये होगा मुक़्क़मल बस ख़यालों में

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