Mayank Shah Jain   (@ highongoals '©')
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Joined 22 August 2017


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Mayank Shah Jain 11 NOV AT 22:02

जो त्याग तपस्या की जननी कहलाए,
जो प्रेम का अथाह सागर कहलाए,
जो व्यक्तित्व की सम्पूर्ण परिभाषा कहलाए,
जो अनुपम, आलौकिक ममता की मुरत कहलाए,
जो दु:ख में भी खुशियों की बौछार करती हों,

वो हैं, सिर्फ "माँ"|

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Mayank Shah Jain 8 NOV AT 23:41

||श्री राम||
जब भगवा की झलक ही साक्षात मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का दर्शन करा देती है तो जरा सा  सोचो ना , कि भगवा को अपने आचरण में उतारने पर क्या - क्या होगा ?

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Mayank Shah Jain 27 OCT AT 0:48

एक दिवाली - बेटियों के नाम (8)

वास्तविकता से अनभिज्ञ होकर भी, हम बेटी जन्म नहीं चाहते,
"धन लक्ष्मी" तो चाहते हैं, लेकिन "मानव लक्ष्मी" नहीं चाहते,
दियों से प्रकाश की लौ जले, यह भावना तो हर अंतर्मन में जाग्रत हैं,
किन्तु उन बुझे दियों को जलाने की भावना, हर अंतर्मन में बुझ-सी गई हैं |

(Save The Girl Child)

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Mayank Shah Jain 27 OCT AT 0:44

एक दिवाली - बेटियों के नाम (6)

आओ हम सब मिलकर, इस दिवाली एक प्रण लें की  ,
बेटी जैसे "प्रकाश रूपी दिये" की लौ; निरंतर जलती रहें,
प्रण लें कि; "मानव लक्ष्मी" का सम्मान भी, "धन लक्ष्मी" जैसा ही करेंगें,
उन्हें मृत्यु प्रदान करने वाले हथियारों का सदैव बहिष्कार करेंगें|

(Save The Girl Child)

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Mayank Shah Jain 27 OCT AT 0:40

एक दिवाली - बेटियों के नाम (5)

विडम्बना हैं मेरे देश की, बेटी जन्म तो वो भी नहीं चाहता,
"बेटी बचाओं" के साथ - साथ, मृत्यु के हथियार जो उपलब्ध कराता हैं,
लाखों प्रयास किये उस माँ ने, अपनी बेटी को बचाने के लिए,
फिर भी; हर क्षण हार की जीत हुई, उसकी बेबसी के आगे |

(Save The Girl Child)

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Mayank Shah Jain 27 OCT AT 0:37

एक दिवाली - बेटियों के नाम (4)

उसके आने से तीज - त्यौहारों की रौनक तो पुनः लौट आई,
साथ - ही - साथ माँ - बापू की चिंता भी लौट आई,
बेटी के पालन - पोषण से लेकर, उसके दहेज तक की चिंता,
उन्हें अपनी हीं बेटी के, लाड़-प्यार से दुर करती चली गई |

(Save The Girl Child)

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Mayank Shah Jain 26 OCT AT 21:16

एक दिवाली - बेटियों के नाम (3)

जन्म से लेकर मृत्यु तक, कभी भी उसे प्रेम ना मिला,
इस "मंगल कलश" को सदैव, अपमान का हीं घूँट मिला,
कुडे़दान से लेकर गन्दे नालों तक, हर तरफ फेंका उसको,
फिर भी वो देवी का रूप, इस धरा पर; हर क्षण अवतरित हुआ|
(Save The Girl Child)

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Mayank Shah Jain 26 OCT AT 20:44

एक दिवाली - बेटियों के नाम (2)

जब भी उसने अपने हक के लिए आवाज़ उठाई,
हमेशा पुरानी विचारधारा उसकी आवाज़ को दबाती गई,
अपनी बात को रखने का अवसर तो, जैसे छीन हीं लिया गया था उससे,
क्योंकि; अपने हीं परिवार में वों, बराबरी का दर्जा कहाँ पा पाई|

( Save The Girl Child)

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Mayank Shah Jain 26 OCT AT 18:30

एक दिवाली - बेटियों के नाम (1)

गर्भ से हीं वो हर जुर्म को सहती आई,
भ्रूण हत्या से लेकर बलात्कार तक ; हर जुर्म से वो लड़ती  आई,
कभी सफल हुई तो कभी असफल हुई,
फिर भी वो हर सितम को चुपचाप सहती हुई आई |

(Save The Girl Child)

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Mayank Shah Jain 8 OCT AT 11:16

हाँ, मैं यह मानता हूँ कि हम वह हनुमान तो नहीं बन सकते कि जब हम सीना चीरे तो सीने में श्री राम और माँ सीता दिख जाए, लेकिन हम वह इंसान तो बन सकते हैं कि जब हम सीना चीरे तो सीने में से श्री राम के आदर्शों की गंगा बाहर  छलक - छलक पड़े |

"Happy Dusshera To All Of You."
कहते हैं सिंह जहाँ बैठ जाता है वह जगह भी सिंहासन कहलाने लगती है तो ,अपने आप को ऐसा बनाओ कि जहां भी बैठों वह जगह राम के व्यक्तित्व में समाहित हो जाए  | आचरणों में पवित्रता लाना ही प्रभु श्री राम का असली मान-सम्मान करना हैं|

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