M K Yadav   (M K Yadav)
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Joined 27 April 2018


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M K Yadav AN HOUR AGO

बीत गया जो वक़्त
कभी वापिस नहीं आयेगा
ये तकदीर का जादू है
तो स्वम हालात तुझे बचाएगा।

उदास मत हो
अह रूठे मैन
कल का क्या भरोसा
वो सपना न्या सजाएगा।

जो तेरा था
वो तेरा है
एक दिन थक कर मिलने
स्वम चला आएगा।

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M K Yadav 10 OCT AT 23:22

(तुम मिल जाओ ना)


तुम जो नहीं तो है मुर्ख मानव
तुम में सम्लित पुराण है
ज्ञान से रौशन है उजाला
वर्ना राक्षस भी बलवान है

आधार जगत का प्यार को माना
हर वक़्त का गुस्सा बेकार है
पवन पानी यहाँ सब का यारों
सिर्फ़ नफ़रत ही निराधार है

सपना जो भी आँखों मे है
हक़ीक़त उसे बनाएँगे
हम हो या ना हो जहान में
पर लोग इसे दोहराएँगे

मन माया और मत लोभ ये
छैण भर मात्र स्वाद है
है बुद्धि वो सम्पूर्ण शुद्धि
ना जिसकी कोई मियाद है।

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M K Yadav 8 OCT AT 4:45

तकनीक के खेल में तकदीर नहीं है
है चोरी-ठग्गी पर ज़ेल नहीं है


अंतरिक्ष का ध्यान हो चाहे
भू-गर्भ का ज्ञान
मृत शरीर को जिंदा करदे
ऐसा बना विज्ञान
किन्तु वृद्धाश्रम में दिखा
शिक्षा का कोहराम
यहाँ सभ्य है इंसान
मग़र संस्कार नहीं है

उँगली है पहचान जगत की
सब है एक समान
तू शिक्षक है या पाठक है
समझ सके तो जान
विस्तार यार न बुरा जगत में
बुरी मार महँगाई है
जीते जी जीवन जी लेना
ये आसान खेल नहीं है


तकनीक के खेल में तकदीर नहीं है
है चोरी-ठग्गी पर ज़ेल नहीं है।

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M K Yadav 4 OCT AT 15:25

लिखना भूल गए

दिल से करि जो बंदगी
गंदगी के सब पाप् धूल गए
जिहवा ने पुकारा परम् का नाम
भूल से जिसे सब लिखना भूल गए।

था समझदार मैं बचपन में
सीखा जगत का हर एक काम
अभिमानी ज़वानी मगरूरियत लाई
तो क़दम-ए-इंसान ख़ुद चलना भूल गए

है नजरों का धोख़ा मायाजाल
क्यों मस्तिक्ष ने बिछा दी है चौपाल
चाहे लाख़ जतन किए बड़े प्रयत्न किए
पर अमर आत्म की यातना सुनना भूल गए

है चंद दिनों की ये कहानी
जल-ओ-जीवन की लीला पुरानी
सुनो बड़े विशाल विख्यात हुए योद्धा
थे मिटटी से उपजे और मिटटी में मिल गए

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M K Yadav 22 SEP AT 9:53

प्रार्थना

अपने कर्मो को ऐसा बना लेंगे हम
मिली भलाईं तो सर को झुका लेगें हम

अभिमानी न होता जगत में बड़ा
इंसान का रब से है नाता जुड़ा

मिले उन्न्त जो शिक्षा हो बेहतर कर्म
नियति का पालन ही अपना धर्म

न रुके अब कभी जो बढ़े है कदम
हो शक्ति का भक्ति से अद्भुत मिलन

......कैप्शन में फूल प्रार्थना पढ़े

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M K Yadav 4 SEP AT 22:15

ना तो क़सूर है इसमे तेरा
ना ही क़सूर है इसमे मेरा
ये तो वक़्त ही करवट बदल गया
मिला उड़ती पँखो को नया सवेरा

हर ज्ञानी ज्ञान को तिनका माने
खरे हीरे की क़ीमत जौहरि जाने
नियति से नियत का हो निर्माण
तूँ तेरी ये दुनियां ले ख़ुद पहचान

था मासूम वो लम्हा चला गया
यहाँ मूर्ख अनुभव से छला गया
कल जो अपनत्व का सम्मान था
आज वही शब्द आत्मा जला गया।

ना तो क़सूर है इसमे तेरा
ना ही क़सूर है इसमे मेरा
ये तो वक़्त ही करवट बदल गया
मिला उड़ती पँखो को नया सवेरा

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M K Yadav 6 AUG AT 8:21

अन्तर्गण में एक नाम समाया
स्वामी मालिक तुम जगत पराया

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M K Yadav 23 JUL AT 4:38

दहकती हुई इस दुनियाँ में
सहजता ही परम् पथ है
खुदगर्ज़ी में खुद प्राणी खोया
जो सबसे बड़ा अनर्थ है।

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M K Yadav 18 JUL AT 7:14

महंगा हुआ ईधंन बड़ा
प्लास्टिक बना खज़ाना

याद आता है हमें आज
उड़न तश्तरी का ज़माना

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M K Yadav 9 JUL AT 8:19

बारिस के पानी से महक़ी
फूलों के रंगों में सजती

धरती मेरी प्यारी धरती
धरती मेरी प्यारी धरती

स्वदेश का मान है यारों
पूर्वजों की पहचान है प्यारों

माँ का आँचल जो बुनती
धरती मेरी प्यारी धरती

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