M K Yadav   (M K Yadav)
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Joined 27 April 2018


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Joined 27 April 2018
M K Yadav 10 HOURS AGO

आयुर्वेद की पहचान है ऐसी
गुण से भरे गुणवान के जैसी

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M K Yadav 25 JUN AT 8:30

(लो)

शहीदी चली है संग जवान🌹
प्राण से बढ़के वतन की आन

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M K Yadav 24 JUN AT 0:29

परख

अक्ल से लाख कमाता है
देख सकल लुट जाता है
चमक-दमक मिट जाएगी
परख पे मूर्त टिक पाएगी।


सहज सरल व्यवस्थित नारी
चिंतन में उभरी हो अदाकारी
ना घर को कोई अनजान सुनें
सदा लोक लाज का मान बनें।

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M K Yadav 22 JUN AT 21:54

सब दुनिया है

चंद लम्हें अभी गुजरे भी नहीं
की पहुँचा स्वर्ग में अवतार
भला 2 दिन तो ऐतबार करो
ढह जायेगा आँखों से संसार

हम गुनहगार बड़े गुमनाम है
चले संग्राह मगर अनजान हैं
निर्दोष का जो कत्ल करें
ऐसे मासूम रूपी शैतान है

सम्मान करो तुम, चाहे जितना
पर ना घात, करो आतम्भ
है 4 पिल्लर पे, इमारत खड़ी
न कम किसी से कोई सितम्भ

कूट-पिट कर श्रृंगार बने
ख़ुद छिदे तो हार बनें
माला के बस मणियां है
जी, हाँ हम दुनिया है
जी, हाँ हम दुनियां हैं।

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M K Yadav 11 JUN AT 13:39

की गुणगान करू मैं तेरा,
या बखान करू मैं मेरा
ईश्वर रबा मौला अल्हा,
सबकुछ है तू मेरा मेरा....

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M K Yadav 5 JUN AT 12:17

की
है पैगाम जो, शांति-अमन का
मैं बखान करूँगा चमन का

हिन्दू मुस्लिम, सिख ईसाई
सब की एक हैं धरती माई
राम कृष्ण बुद्ध, एवं नानक
है यही पे जन्में सारे भाई।

है
चिन्ह जहाँ, मौजूद अभी भी
दैवीय उन्मुक्त चरण का

कोमल सोच शुद्ध पावन गंगा
न मुख से वन तक कोई पंगा
महान मोहन, कर्मचन्द जन्में
नाम ना जिनके हिंसक दंगा।

सब को ही जो, जीवन सौंपे
उस लहराती हरित पवन का

हाँ
मौखिक भाषा अलौकिक
लेकिन, संस्कार तो एक है
बादल बनकर अपने बरसे
चाहे विचार अनेक है।

हँसी में खुशी जो, बांट के चलदे
उस हृदयमय भावुक लखन का

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M K Yadav 2 MAY AT 23:07

माना है, ये हमने,
की चंद लम्हों की दूरी है
सच है हक़ीकत भी
की इश्क़ बढ़ना ज़रूरी है

पास रहे अपनो में
तुम खोये रहे सपनों में
क्यों प्यार हुआ ग़ुमराह
हमराही बीच बणों में।

उठी है नफरत, यार मिटाना
हर नासमझी दूर भगाना
प्यार में पावन रंग सजना
अ सजनी बहुत जरूरी है

माना है, ये हमने,
की चंद लम्हों की दूरी है
सच है हक़ीकत भी
की इश्क़ बढ़ना ज़रूरी है

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M K Yadav 26 APR AT 18:00

(बादल की बौछार)

दो बूँद गिरा गया बादल
महका है धरती का आँचल
बन सर्द पवन लहराई
मिट्टी की महक-महकाई

सब काम काज रुक गए हैं
बादल के आगे झुक गए हैं
ममता ने ली है अंगड़ाई
लो सब ने प्यास बुझाई

खामोश हुआ इंसान जब
पड़ी गर्ज की चमक दिखाई

पानी-की बौछार चलाके
संगीत में सूर को मिलाके
गालों को मर्म सहलाएँ
कानों से थरथरी आएँ

सप्तधनू आकाश में छाया
देने सूक्ष्म श्रेस्ट बधाई

दो बूँद गिरा गया बादल
महका है धरती का आँचल
बन सर्द पवन लहराई
मिट्टी की महक-महकाई

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M K Yadav 19 MAR AT 9:10


ईमान को लिखो जी
स्वाभिमान को लिखो
तुम मौत से ऊँची
पहचान को लिखो

हाँ, संग इंसान के ढ़लती है
ये, संग हालात के चलती है
पहचान भी रंग बदलती है

त्याग में पिसी जो
चट्टान वो लिखो
आँख में उबलते
बलिदान को लिखो

ईमान को लिखो जी
स्वाभिमान को लिखो
तुम मौत से ऊँची
पहचान को लिखो

ऋषियों ने तप किये जंगलों में
ऋषियों ने तप किये जंगलों में
न कभी मौसम बदले बगलों में

पसीने से निकले
स्नान को लिखो
पानी में उठे जो
तूफ़ान वो लिखो

ईमान को लिखो जी
स्वाभिमान को लिखो..

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M K Yadav 9 MAR AT 10:22

होली है जी

सदाचार की धार हो जिसमें
अपनो का उद्धार
मुबारक हो तुम सब को ऐसा
होली का त्यौहार

षड्यन्त्र कभी फलता नहीं
रहे विफल बारंबार
खुशियों से खुशियाँ सजे
ये रंगों का त्यौहार
सदाचार की धार हो जिसमें
अपनो का उद्धार
मुबारक हो तुम सब को ऐसा
होली का त्यौहार


विष्णु गुरु है ज्ञान जगत में
असुर जगत बेकार
अटल पहलादी सफलहल मंत्र
सत नमोहः आभार
मन शुद्ध वचारिक मंदिर हो
मृत सद्द अहंकार
मुबारक हो तुम सब को ऐसा
होली का त्यौहार

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