M K Yadav   (M K Yadav)
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Joined 27 April 2018


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M K Yadav 4 HOURS AGO

कविता के कबीरदास बनो
कुबेरदास जी नहीं

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M K Yadav 6 AUG AT 8:21

अन्तर्गण में एक नाम समाया
स्वामी मालिक तुम जगत पराया

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M K Yadav 23 JUL AT 4:38

दहकती हुई इस दुनियाँ में
सहजता ही परम् पथ है
खुदगर्ज़ी में खुद प्राणी खोया
जो सबसे बड़ा अनर्थ है।

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M K Yadav 18 JUL AT 7:14

महंगा हुआ ईधंन बड़ा
प्लास्टिक बना खज़ाना

याद आता है हमें आज
उड़न तश्तरी का ज़माना

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M K Yadav 9 JUL AT 8:19

बारिस के पानी से महक़ी
फूलों के रंगों में सजती

धरती मेरी प्यारी धरती
धरती मेरी प्यारी धरती

स्वदेश का मान है यारों
पूर्वजों की पहचान है प्यारों

माँ का आँचल जो बुनती
धरती मेरी प्यारी धरती

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M K Yadav 8 JUL AT 20:25

(सियासत)

सियासत के गलियारों में देखो
हुई शिरकत अब सितारों की
प्रलोभी प्रलोभन से प्रभावित होकर
लड़ेंगें लड़ाई संसद में विचारों की

कलाकार है बन कला का स्वामी
ना समझ तुझे दुखयारो की
वातानुकूलित में विचरने वाले
कैसे नापेंगे राह बनजारों की

जिनसे प्यार मोहब्बत रुतबा मिला
मत लगा क़ीमत उन करतारो की
एक दिन दौलत गवांनी होगी
ना मुनासिफ़ ज़िन्दगी अवतारों की

पूर्ण बोहमत से सरकार बनाई
तो क्या ज़रूरत है अतिकारों कि
भला इतना तो शंसमरन रखो
रुके नीलामी समाजिक अधिकारों की

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M K Yadav 19 JUN AT 16:39

(रुतबा)

गुमनाम हूँ मैं बेनाम नहीं
लो आज से अपनी पहचान यही
एक शांत सुबह का साग़र हूँ
कल उठेगा जिसमें तूफ़ान कही।

तू मुस्कुराले चाहे जितना
मैं पसीनें से प्यास बुझाऊंगा
बनेगा छाला मोती जिसदिन
मैं उसदिन नायब कहलाऊंगा।

हर सोच में मौज के रंग समाये
हुए जन्म-जात से लोग पराये
बादल से निकली रिमझिम बरखा
आँख का पानी आँसू कहलाये।

संगीत है साधक सारथी मन का
अफवाहों में क्या रखा है?
दिन ढलने पर ख़ामोशी सुनना
की कैसे हर शुर सजता है।

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M K Yadav 6 JUN AT 16:23

कौन कहें तुम्हें
की तुम नादान हो
तुम से मेरी ये ख़ुदाई है
संग तेरे जब से यार चला मैं
तूने ख़ुशियों से सेज सजाई है।

ना समझ हूँ मैं
जो समझ सका ना
खामोश क्यों तेरी जुबानी है
ग़म पीके जख्म ना दिखने दिया
तूने हर पल मेरी लाज़ बचाई है।

कौन कहें तुम्हें
की तुम नादान हो
तुम से मेरी ये ख़ुदाई है
संग तेरे जब से यार चला मैं
तूने ख़ुशियों से सेज सजाई है।

त्याग का मोल
वो रब जाने है
दिल की बातें दिल माने है
जिसे खुला दर्पण ना देख सका
मिली बंद आँखों में वही सच्चाई है।

कौन कहें तुम्हें
की तुम नादान हो
तुम से मेरी ये ख़ुदाई है
संग तेरे जब से यार चला मैं
तूने ख़ुशियों से सेज सजाई है।

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M K Yadav 6 JUN AT 5:23

हसरतें हर रोज बदलती है
ज़िंदगी लम्हों में ढलती है।
कल लूँ से आग़ दहकती थी
वही भूमि आज महकती है।

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M K Yadav 31 MAY AT 14:19


जितने गहरे तूफ़ान आये
दरिया उतना बड़ जाता है
एक-एक बूँद गिरने से पूरा
आसमान फट जाता है।।

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