KPR quotes   (KPR)
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Joined 3 August 2018


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16 JAN AT 16:20

आधे डूबे आशिक़ी में बाकी डूबे ग़म में
तुम्हारा तुम ही जानों हम तो डूबे हम में।

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13 JAN AT 20:19

कभी-कभी लगता है
रातें इतनी लम्बी क्यों होती हैं
और कभी-कभी लगता है
रातें और लम्बी क्यों नहीं होती।

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12 JAN AT 17:38

तु रहती कहाँ है
मुझे तेरे घर की खोज है
बस रात में रूकना पड़ता है
तेरी खोज मुझे हर रोज़ है।

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11 JAN AT 17:48

रोज़ लिखता हूँ दिखता दुख, दर्द और पाप
लेकिन ख़ुदा इतने बेबस हालात ठीक नहीं
कई चीखते लफ़्ज मिटा दिये मैंने यह सोचकर
कि इतनी Negetive बात ठीक नहीं।

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10 JAN AT 17:52

Online होकर जवाब नहीं मिलता
पुराना दौर होता तो कम से कम
ख़त आने की उम्मीद तो होती।

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9 JAN AT 22:30

करते-करते आशिक़ी हम ढेर हो गये
जो ग़म लिखे वो महफ़िल में शेर हो गये।

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28 DEC 2021 AT 17:15

बादल भी देख रो रहा है
गरज जिसे लोग कह रहे हैं
आँसू है यह जो बह रहे हैं
पानी जिसे लोग कह रहे हैं

मेरे भी अश्क मिलें हैं इनमें
जिनसे तुम खेल रहीं हो
तुम्हें क्या पता मेरी टीस का
इसे तुम थोड़े ही झेल रही हो।

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23 DEC 2021 AT 21:18

घड़ी भर सुकून से देख लेने दो
सोने को तो पूरी रात बाकी है।

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22 DEC 2021 AT 23:52

सपने हसीन होते हैं
जब उनमें तेरी मौजूदगी होती हैं।

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21 DEC 2021 AT 22:28

ख्वाहिशों पर ध्यान ना दें
तो ज़िंदगी सहीं चल रही हैं।

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