KPR quotes   (KPR)
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Joined 3 August 2018


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22 HOURS AGO

हम रोज़ मरे जाते हैं चाय-काॅफी पीने को
उनका ख़्याल कौन करें
जिन्हें पानी भी नसीब नहीं।

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12 MAY AT 22:53

बचे-खुचे वहम भी निकल जाने दो
सब निकल लेंगे बस काम निकल जाने दो।

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11 MAY AT 22:49

आंखें खुलती है टूट जाता है
सपना वो सुहाना उस शाम का
अगली रात को जब तुम ना हो वहां
तो फिर वो सपना किस काम का।

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10 MAY AT 19:35

जिसके गुज़रने का इंतजार है
वह वक्त गुज़रता नहीं
जिनके गुज़रने की उम्र भी नहीं
वह गुज़रते चले जा रहे।

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9 MAY AT 16:58

माँ का साथ ऐसा जैसे
रेगिस्तान में प्यासे को पानी।

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8 MAY AT 19:17

हवा ज़ोरो की चल रही आंधी के आसार है
सुना है मरघट में लगा लाशों का बाज़ार है
अंगारों में गिर पड़ा यह बारुद सा आज़ार है
फैल चुकी है गांव-शहर राख की भरमार है
मसनद के मरें मरकर भी मरघट के ही बाहर है
कतार हुई लाज़मी मजमा जो यम के द्वार है।

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8 MAY AT 16:38

अगर सत्ता मेरे हाथों में होती तो...

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7 MAY AT 20:29

काफ़ी दिलचस्पी ली जाती है आजकल हमारी बातों में
मालूम पड़ता है उनके इरादे कुछ ठीक नहीं।

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6 MAY AT 21:30

तेरे ज़ेवर के मनके भी अपने ही मन का करते हैं
तुझपर सजकर इतराते हैं गुमान तेरे तन‌ का करते हैं।

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5 MAY AT 19:25

तुम खुद ठहर जाना बर्फ़ की छत बनके
पिघली तो पानी मैं कैद कर ना पाऊंगा

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